फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   yatayat policewalo ko sunai dene laga kam

यातायात पुलिस वालों को सुनाई देने लगा कम

Thu, 14 Jan 2021 01:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 01:50 AM IST
विज्ञापन
yatayat policewalo ko sunai dene laga kam
वाहनों के हॉर्न से परेशान इलाइट चौराहा पर तैनात ट्राफिक के सिपाही। अमर उजाला
फोटो
विज्ञापन

.................
किस्त नंबर : 3
यातायात पुलिस कर्मियों का फूल रहा दम, सुनाई देने लगा कम
- वाहनों के तेज हॉर्न की आवाज और धुएं से होने लगीं कई बीमारियां, एलर्जी व सांस की बीमारियों से जूझ रहे
- जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में चल रहा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिले में यातायात पुलिस कर्मी भी कई बीमारियों से घिर रहे हैं। वायु व ध्वनि प्रदूषण यातायात पुलिस कर्मियों पर खासा असर डाल रहा है। इसके चलते अधिकांश को कम सुनने, एलर्जी व सांस की समस्या पैदा हो रही है। यह आंकडे़ पिछले साल यातायात थाना परिसर में लगे स्वास्थ्य शिविर में सामने आए हैं। इन सभी का जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
गर्मी, सर्दी चाहे हो बरसात हर मौसम में यातायात पुलिसकर्मी चौराहों पर आठ से दस घंटे ड्यूटी करते हैं। ड्यूटी के दौरान चौराहों से गुजरने वाले वाहनों के हॉर्न की तेज आवाज के बीच उन्हें खड़ा रहना पड़ता है। पिछले साल स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आया कि किसी को कम सुनाई देने लगा है तो कोई एलर्जी व सांस की तकलीफ से ग्रस्त हो रहे हैं। जिले में यातायात विभाग में 23 कर्मी तैनात हैं। साथ ही पीआरडी के 100 व होमगार्ड के 25 जवान भी ड्यूटी करते हैं।
विज्ञापन

पिछले साल यातायात थाना परिसर में लगे स्वास्थ्य जांच शिविर में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए थे। जांच के दौरान तेज-हॉर्न व वाहनों के शोरगुल के चलते कई जवानों की कम सुनने की समस्या सामने आई थी। वहीं , कई सांस की तकलीफ से पीड़ित पाए गए थे। एक यातायात पुलिसकर्मी ने बताया कि यातायात पुलिस में कार्यरत 35 प्रतिशत कर्मचारी वाहनों के धुएं व शोरगुल के कारण किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। किसी को सुनने में परेशानी तो किसी को एलर्जी की समस्या पैदा हो रही है। ऐसे पुलिसकर्मी जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में उपचार करा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

धुआं भी बनता हानिकारक
चौराहों से हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। भीड़भाड़ वाले ऐसे इलाकों में वाहनों के धुएं से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड व बैनेजन गैस पर वातावरण में जहर घोलने का काम करती है। गैस व प्रदूषण के दस माइक्रोन से कम के कण मानव के नाक, आंख व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी चपेट में आने से दमा, सिरदर्द, जुकाम, खांसी, अनिंद्रा, उच्च रक्तचाप, आंखों मेें जलन, स्किन एलर्जी व फेफड़े का कैंसर होने का खतरा रहता है।

90 डेसिमल से ज्यादा आवाज बनती घातक
बताया गया है कि 90 डेसिमल से ज्यादा की आवाज ध्वनि प्रदूषण के तहत आती है। जो कानों को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे करीब 40 पुलिसकर्मियों का उपचार उनके पास चल रहा है। ऐसे पुलिसकर्मियों को सावधानियां बरतने की जरूरत है। डॉ. जेपी पुरोहित, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed