फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   writ petition dismissed in HC, businessman should give water tax

जलसंस्थान: व्यापारियों को देना होगा जलकर, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 03 Sep 2021 03:34 PM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Fri, 03 Sep 2021 03:34 PM IST
सार

जलसंस्थान द्वारा निकाली गई महानगर के डेढ़ सौ व्यापारियों पर 17 करोड़ रुपये की बकायेदारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी है। अब बकायेदारों को पैसा जमा करना होगा।
 

विज्ञापन
writ petition dismissed in HC, businessman should give water tax
highcourt - फोटो : social media

विस्तार

 जलसंस्थान द्वारा निकाली गई महानगर के डेढ़ सौ व्यापारियों पर 17 करोड़ रुपये की बकायेदारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी है। अब बकायेदारों को पैसा जमा करना होगा।
विज्ञापन

जलसंस्थान ने महानगर के 150 प्रतिष्ठानों की रिकवरी (आरसी) जारी की थी।

इस बकायेदारी को लेकर व्यापारियों में काफी रोष था। यह सभी व्यापारी ऐसे थे, जिनके ऊपर 25 हजार रुपये से अधिक की बकायेदारी है। व्यापारियों का तर्क था कि उनके यहां नलों का कनेक्शन नहीं है, फिर भी बकायेदार बना दिया गया। जबकि, विभाग का कहना था कि शासनादेश है कि यदि किसी के प्रतिष्ठान से सौ मीटर की दूरी से पाइप लाइन निकली है, तो उसे जलकर देना अनिवार्य है, भले ही उसके यहां कनेक्शन हो या नहीं। इसको लेकर व्यापारियों में रोष था।
विज्ञापन


याचिकाओं को किया खारिज
पहले व्यापारियों ने महापौर के साथ बैठक कर समस्या का समाधान करना चाहा, लेकिन बात नहीं बनी तो व्यापारी हाईकोर्ट चले गए और स्थगन आदेश मिल गया। इसके जवाब के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया। जलसंस्थान ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा और 26 अगस्त को मुकेश गुप्ता बनाम उप्र राज्य एवं अन्य याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिका खारिज होने से व्यापारियों को तगड़ा झटका लगा है। विभाग ने सभी बकायेदारों को बकाया जमा करने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


टैक्स को लेकर कई विसंगतियां
जलसंस्थान के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने बताया कि शासनादेश केवल लखनऊ के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए जारी होता है। इस संबंध में याचिकाकर्ता उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री मुकेश गुप्ता ने कहा कि जीत हमारी ही हुई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आप अपीलीय अधिकारी के यहां सुनवाई करा सकते हैं, यदि वहां सुनवाई नहीं होती है तो हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। टैक्स को लेकर कई विसंगतियां हैं। नियमत: तीन साल से अधिक का टैक्स नहीं ले सकते, जबकि विभाग ने बीस - बीस साल का टैक्स मांगा है।

 उप्र वाटर सप्लाई एवं सीवरेज एक्ट 1975 के अंतर्गत प्रावधान है कि मकान के आसपास सौ मीटर की दूरी पर निकली पाइपलाइन से कनेक्शन लिया गया हो अथवा नहीं, मकान के वार्षिक मूल्यांकन का 12.5 प्रतिशत जलकर लिया जाएगा। इसी आधार पर व्यापारियों की रिकवरी जारी की गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed