{"_id":"6750c0fd2291f3c4970ea065","slug":"world-soil-day-soil-of-jhansi-fields-becomes-sick-nutrients-depleted-jhansi-news-c-11-1-jhs1032-447219-2024-12-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व मृदा दिवस : बीमार हो गई झांसी के खेतों की मिट्टी, पोषक तत्व खत्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व मृदा दिवस : बीमार हो गई झांसी के खेतों की मिट्टी, पोषक तत्व खत्म
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी की मिट्टी बीमार हो गई है। इससे महत्वपूर्ण पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं। यह खुलासा कृषि विभाग की प्रयोगशाला में हुई जांच में हुआ है। इसमें सामने आया है कि जिले की मिट्टी में जीवाश्म कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस की भारी कमी है। इसका प्रतिकूल प्रभाव कृषि उत्पादन पर पड़ रहा है। रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल से यह स्थिति पैदा हुई है।
कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में वैज्ञानिक पद्धति से मिट्टी के नमूनों की जांच की जाती है। इसके बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से लेकर नवंबर माह तक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी के 11,913 नमूनों की जांच की गई, जिनमें जीवाश्म कार्बन की मात्रा 0.42 से 0.68 प्रतिशत पाई गई, जबकि अच्छी मिट्टी में यह एक प्रतिशत या इससे अधिक होता है।
विज्ञापन
इसी प्रकार नाइट्रोजन की मात्रा प्रति हेक्टेअर में 280 किलोग्राम से कम पाई गई। जबकि, मिट्टी में 280 से 560 किलो तक नाइट्रोजन की मात्रा मध्यम और 560 से अधिक उच्च मानी जाती है। इसी प्रकार मिट्टी में फास्फोरस की मात्रा प्रति हेक्टेअर में 10 किलोग्राम से भी कम पाई गई। यह बेहद निम्न श्रेणी है। सेहतमंद मिट्टी में 20 से 40 किलोग्राम तक फास्फोरस का होना जरूरी होता है।
विज्ञापन
मिट्टी में अवयवों की भूमिका
- जीवाश्म कार्बन : इसे मिट्टी का हीमोग्लोबिन माना जाता है। यह मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाता है। मिट्टी के तापमान को नियंत्रित रखता है। मिट्टी में भुरभुरापन बनाए रखता है। पौधों को पोषण प्रदान करता है।
- नाइट्रोजन : पौधों की बढ़त में नाइट्रोजन की सबसे अहम भूमिका होती है। मिट्टी में इसकी प्रचुर मात्रा से उपज भी अच्छी होती है।
- फास्फोरस : पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है। बीज बनाने में मदद करता है। बीज की गुणवत्ता भी बढ़ाता है।
29 रुपये में मिट्टी की जांच
कृषि विभाग द्वारा अभियान चलाकर मिट्टी के नमूने एकत्र किए जाते हैं। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा भी लोग अपने खेत की मिट्टी की प्रयोगशाला में जांच करा सकते हैं। मुख्य तत्वों की जांच का शुल्क विभाग द्वारा 29 रुपये लिया जाता है। जबकि, मुख्य तत्व व अन्य सूक्ष्म तत्वों की जांच का शुल्क 102 रुपये अदा करना होता है। जांच के लिए आधा किलोग्राम मिट्टी देनी होती है। मिट्टी सूखी होने पर एक-दो दिन में जांच रिपोर्ट दे दी जाती है। जांच रिपोर्ट के साथ किसानों को मिट्टी को सेहतमंद बनाने के उपाय भी बताए जाते हैं।
रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। जांच के बाद किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उपाय भी बताए जाते हैं। - एमपी सिंह, उप निदेशक कृषि