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न्याय के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाएं महिलाएं

Mon, 01 May 2017 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 May 2017 01:06 AM IST
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women Increase participation in the field of justice
court - फोटो : demo
अधिवक्ता परिषद कानपुर का महिला अधिवक्ता सम्मेलन दतिया गेट बाहर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि महिला अधिवक्ता न्याय के क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाएं और समाज को जागरूक करें।
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उन्होंने कहा कि महिला अधिवक्ता कुरीतियों को मिटाने के लिए आगे आएं। प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण पहल ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के विरोध में महिला अधिवक्ता आगे आएं और न्याय के लिए उनकी आवाज बने। राष्ट्रीय परिषद की सदस्या अनीता बालियान ने कहा कि सभी महिला अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति को उसका हक मिले। संगीता मित्तल ने कहा कि महिलाएं भी अधिक से अधिक पढ़ लिखकर न्याय के क्षेत्र में आगे आएं। संध्या ने कहा कि महिलाओं को खुद सजग होना होगा।
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 सम्मेलन में रजनी जैन, नंदिनी गौर, साधना सिंह, संगीता मित्तल, संजीव सरावगी, सुनील खरे, मनमोहन गेड़ा का सम्मान किया गया। इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद के जिलाध्यक्ष उदय सोनी, केशवेंद्र प्रताप सिंह, जीतेश हयारण, महामंत्री चरण सिंह, बिपिन त्यागी, प्रियांशु पटैरिया, सरदार वीर सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन साधना ने किया और आभार राजेंद्र त्रिपाठी ने जताया।  
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कई परेशानियां हैं
वकालत के पेशे में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। लेकिन कई दिक्कतें भी हैं। कुछ के पति सपोर्ट नहीं करते हैं। कई महिला अधिवक्ता गरीब है, जिनकी बार संघ मदद करे।
साधना सिंह, अधिवक्ता

आगे नहीं बढ़ने दिया जाता
कई मौकों पर महिला अधिवक्ताओं को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है। उन्हें समय का अभाव भी झेलना पड़ता है। मेरा उद्देश्य है कि न्याय क्षेत्र से जुड़कर महिलाओं को उनके अधिकारों पर सजग किया जाए ।
भारती अधिवक्ता
 
जिम्मेदारी समझती हैं
महिला अधिवक्ताओं पर वादकारी भरोसा करते हैं। इसके वाबजूद भी ज्यादातर केस पुरुष अधिवक्ताओं को मिलते है। जनपद में लगभग 40 महिला अधिवक्ता नियमित प्रैक्टिस करती हैं, जो अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझती हैं।

निर्मला चौरसिया अधिवक्ता

घर और कोर्ट दोनों में देना पड़ता है समय
वर्ष 1986 से वकालत कर रही हूं। घर और कोर्ट दोनों में ही समय देना पड़ता है। हालांकि सभी सहयोगी अधिवक्ताओं से पूरा सहयोग मिलता है। ऐसे में आसानी रहती है।
शांति पौडवाल अधिवक्ता
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