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डीआईजी के प्रयास से महिला को मिली नई जिंदगी
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छह महीने बाद महिला में इस तरह आया सुधार डीआईजी के प्रयास से महिला को मिली नई जिंदगी
डीआईजी के प्रयास से महिला को मिली नई जिंदगी
झांसी। थाना प्रेमनगर के ग्वालटोली निवासी एक महिला एक साल पहले मंदिर के पास भटकती मिली थी। जानकारी मिलने पर डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर महिला को भर्ती कराने के बाद उसकी देखरेख का जिम्मा उठाया था। एक साल पूरे होने के बाद आज वह अपनी नई जिंदगी जी रही है।
बुधवार कोे डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने बताया कि 26 अक्तूबर 2018 को थाना नवाबाद क्षेत्र स्थित मरई माता मंदिर के पास एक असहाय महिला होने की सूचना मिली थी। जिस पर उन्होंने सवेरा सीनियर सिटीजन पुलिस सेल की टीम को भेजकर मदद के निर्र्देश दिए थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर मदद का प्रयास किया था, लेकिन मानसिक संतुलन सही न होने के कारण वह अपना नाम व पता नहीं बता सकी थी। इसके बाद महिला को मदर टेरेसा आश्रम में भर्ती कराया था। एक साल तक चले उपचार व बेहतर देखरेख के बाद उनको नई जिंदगी मिली। परिजनों ने इसका पूरा श्रेय र्डीआईजी को दिया है। समय - समय पर वह खुद मटर टेरेसा आश्रम पहुंचकर हालचाल लेते रहे। हालत में सुधार होने के बाद उसने अपना नाम थाना प्रेमनगर के ग्वालटोली निवासी चंदा बताया था, जहां परिजनों को बुलाकर सुपुर्द कर दिया गया। बच्चे को मां को पाकर गदगद हो गए थे। डीआईजी ने टीम के सदस्य उपनिरीक्षक मनोज मिश्रा, उपनिरीक्षक मोहम्मद मतीन खान, उपनिरीक्षक बब्बू सिंह, विमल कुमार श्रीवास्तव, महिला हेड कांस्टेबिल मीना कुशवाहा, गजेंद्र सिंह, सुबोध कुमार, मानवेंद्र सिंह, ओपी परमानंद को 25 हजार रुपये पुरस्कार देने की भी घोषणा की।
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झांसी। थाना प्रेमनगर के ग्वालटोली निवासी एक महिला एक साल पहले मंदिर के पास भटकती मिली थी। जानकारी मिलने पर डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर महिला को भर्ती कराने के बाद उसकी देखरेख का जिम्मा उठाया था। एक साल पूरे होने के बाद आज वह अपनी नई जिंदगी जी रही है।
बुधवार कोे डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने बताया कि 26 अक्तूबर 2018 को थाना नवाबाद क्षेत्र स्थित मरई माता मंदिर के पास एक असहाय महिला होने की सूचना मिली थी। जिस पर उन्होंने सवेरा सीनियर सिटीजन पुलिस सेल की टीम को भेजकर मदद के निर्र्देश दिए थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर मदद का प्रयास किया था, लेकिन मानसिक संतुलन सही न होने के कारण वह अपना नाम व पता नहीं बता सकी थी। इसके बाद महिला को मदर टेरेसा आश्रम में भर्ती कराया था। एक साल तक चले उपचार व बेहतर देखरेख के बाद उनको नई जिंदगी मिली। परिजनों ने इसका पूरा श्रेय र्डीआईजी को दिया है। समय - समय पर वह खुद मटर टेरेसा आश्रम पहुंचकर हालचाल लेते रहे। हालत में सुधार होने के बाद उसने अपना नाम थाना प्रेमनगर के ग्वालटोली निवासी चंदा बताया था, जहां परिजनों को बुलाकर सुपुर्द कर दिया गया। बच्चे को मां को पाकर गदगद हो गए थे। डीआईजी ने टीम के सदस्य उपनिरीक्षक मनोज मिश्रा, उपनिरीक्षक मोहम्मद मतीन खान, उपनिरीक्षक बब्बू सिंह, विमल कुमार श्रीवास्तव, महिला हेड कांस्टेबिल मीना कुशवाहा, गजेंद्र सिंह, सुबोध कुमार, मानवेंद्र सिंह, ओपी परमानंद को 25 हजार रुपये पुरस्कार देने की भी घोषणा की।
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