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Jhansi News: बच्चा क्यों नहीं पी रहा दूध, मम्मियां ले रहीं काउंसलिंग
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झांसी। मोबाइल और ऑनलाइन जिंदगी की भागदौड़ में काउंसलिंग एक ऐसी जरूरत बन गई कि पढ़ाई, कॅरिअर, फिटनेस, स्वास्थ्य और बिजनेस ही नहीं हर क्षेत्र में इसकी जड़ें मजबूत हो रही हैं, लेकिन अब बच्चे को दूध पिलाने के लिए मम्मियां भी काउंसलिंग ले रही हैं। मेडिकल कॉलेज और प्रसव कराने वाले निजी अस्पतालों में आवश्यक रूप से बच्चे को दूध पिलाने के लिए मांओं को काउंसलिंग दी जा रही है। डॉक्टरों के पास हर महीने ऐसे 30-40 केस आ रहे हैं जिसमें किसी वजह से बच्चे को दूध नहीं पिला पाने वाली मां को कई सैशन की काउंसलिंग दी जा रही है। वहीं, कई केस में दो-तीन काउंसलिंग के सैशन चलाए जाते हैं।
कहा जाता है कि मां का दूध बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए संपूर्ण खुराक होती है। बच्चे के जन्म लेने के बाद मां उसे आंचल से लगाकर दूध पिलाती है तो मांं और बच्चे के बीच में एक भावात्मक रिश्ता भी बन जाता है। लेकिन, एकल परिवार, नौकरी और भागदौड़ भरी जिंदगी में मांओं के सामने बच्चे को दूध पिलाने की कई दिक्कतें आ रही हैं। कई बार पूरी जानकारी न होने के कारण मां बच्चे को अपना दूध नहीं पिला पाती हैं। इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है। मेडिकल कॉलेज बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 50-60 केस पहुंचते हैं जिसमें माएं बताती हैं कि बच्चे का ठीक से विकास नहीं हो रहा। बच्चा ठीक से दूध नहीं पी रहा। इसके अलावा स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के पास भी केस आते हैं। ऐसे में डॉक्टर मां की काउंसलिंग पर जोर दे रहे हैं। ताकि मां बच्चे को सही तरीके से दूध पिला सकें।
नवजात को आंचल में लेकर दूध पिलाएं मां
ओपीडी में अक्सर मां बताती हैं कि उनका बच्चा बहुत कमजोर है, कई केस में नवजात के जन्म के बाद मां किसी वजह से बच्चे को दूध नहीं पिला पाती है। ऐसे सभी केस में मां की काउंसलिंग की जाती है, उन्हें बताया जाता है कि आंचल में लेकर बच्चे को किस तरह से दूध पिलाएं। दूध पिलाने की पोजीशन, बच्चे को कितनी-कितनी देर में कितना दूध पिलाना है। इन सबके बारे में काउंसलिंग की जाती है। ओपीडी में महीने में 15-20 ऐसी मां भी आती हैं जो बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहती हैं, ऐसे केस में खास तौर पर काउंसलिंग की जाती है। इसके लिए अगस्त के पहले हफ्ते में ब्रेस्ट फीडिंग दिवस भी मनाया जाता है।
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डॉ. ओमशंकर चौरसिया, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग
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प्रसव के बाद ही शुरू हो जाती है काउंसलिंग
कामकाज के चलते महिलाओं का खान-पान और दिनचर्या भी बिगड़ी है। ऐसे में बच्चे के जन्म के बाद उसे दूध पिलाने में कई मांओं को काफी दिक्कत आती है। महिलाएं दूध न होना, दर्द या बच्चे द्वारा दूध न पीने की बात बताती हैं। इन मामलों में सबसे पहले मां की काउंसलिंग की जाती है। आजकल एकल परिवारों के कारण अधिकांश महिलाओं को पता नहीं होता कि नवजात बच्चे को दूध कैसे पिलाना है। काउंसलिंग में दूध पिलाने से जुड़ी हर जानकारी मां को दी जाती है। चार-पांच केस भी होते हैं जिसमें मां या परिवार वाले बच्चे को डिब्बे या गाय को दूध देना चाहते हैं, ऐसे मामलों में मां को कई सैशन काउंसलिंग की जाती है।
डॉ. प्रियंका सिंह, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
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कहा जाता है कि मां का दूध बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए संपूर्ण खुराक होती है। बच्चे के जन्म लेने के बाद मां उसे आंचल से लगाकर दूध पिलाती है तो मांं और बच्चे के बीच में एक भावात्मक रिश्ता भी बन जाता है। लेकिन, एकल परिवार, नौकरी और भागदौड़ भरी जिंदगी में मांओं के सामने बच्चे को दूध पिलाने की कई दिक्कतें आ रही हैं। कई बार पूरी जानकारी न होने के कारण मां बच्चे को अपना दूध नहीं पिला पाती हैं। इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है। मेडिकल कॉलेज बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 50-60 केस पहुंचते हैं जिसमें माएं बताती हैं कि बच्चे का ठीक से विकास नहीं हो रहा। बच्चा ठीक से दूध नहीं पी रहा। इसके अलावा स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के पास भी केस आते हैं। ऐसे में डॉक्टर मां की काउंसलिंग पर जोर दे रहे हैं। ताकि मां बच्चे को सही तरीके से दूध पिला सकें।
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नवजात को आंचल में लेकर दूध पिलाएं मां
ओपीडी में अक्सर मां बताती हैं कि उनका बच्चा बहुत कमजोर है, कई केस में नवजात के जन्म के बाद मां किसी वजह से बच्चे को दूध नहीं पिला पाती है। ऐसे सभी केस में मां की काउंसलिंग की जाती है, उन्हें बताया जाता है कि आंचल में लेकर बच्चे को किस तरह से दूध पिलाएं। दूध पिलाने की पोजीशन, बच्चे को कितनी-कितनी देर में कितना दूध पिलाना है। इन सबके बारे में काउंसलिंग की जाती है। ओपीडी में महीने में 15-20 ऐसी मां भी आती हैं जो बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहती हैं, ऐसे केस में खास तौर पर काउंसलिंग की जाती है। इसके लिए अगस्त के पहले हफ्ते में ब्रेस्ट फीडिंग दिवस भी मनाया जाता है।
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डॉ. ओमशंकर चौरसिया, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग
प्रसव के बाद ही शुरू हो जाती है काउंसलिंग
कामकाज के चलते महिलाओं का खान-पान और दिनचर्या भी बिगड़ी है। ऐसे में बच्चे के जन्म के बाद उसे दूध पिलाने में कई मांओं को काफी दिक्कत आती है। महिलाएं दूध न होना, दर्द या बच्चे द्वारा दूध न पीने की बात बताती हैं। इन मामलों में सबसे पहले मां की काउंसलिंग की जाती है। आजकल एकल परिवारों के कारण अधिकांश महिलाओं को पता नहीं होता कि नवजात बच्चे को दूध कैसे पिलाना है। काउंसलिंग में दूध पिलाने से जुड़ी हर जानकारी मां को दी जाती है। चार-पांच केस भी होते हैं जिसमें मां या परिवार वाले बच्चे को डिब्बे या गाय को दूध देना चाहते हैं, ऐसे मामलों में मां को कई सैशन काउंसलिंग की जाती है।
डॉ. प्रियंका सिंह, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ