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घपलेबाज बाबू पर कौन दर्ज कराएगा मुकदमा...एक दूसरे पर टाल रहे अफसर
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झांसी। रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के पैसे में गबन करने के आरोपी पर निदेशक प्रशासन के आदेश के बावजूद 48 घंटे बाद तक जिला अस्पताल प्रशासन मुकदमा दर्ज नहीं करा पाया है। इस मामले में अस्पताल के अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते रहे। सीएमएस आरकेएस के नोडल अधिकारी को एफआईआर कराने के लिए कहते रहे तो नोडल अफसर ने कहा कि निदेशक के पत्र में सीएमएस को मुकदमा कराने की बात लिखी है।
जिला अस्पताल में तैनात कनिष्ठ सहायक दिनेश कुमार रायकवार के खिलाफ विभागीय जांच में रोगी कल्याण समिति का पैसा जमा करने में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने एक अक्तूबर को जांच कर अपनी आख्या महानिदेशालय को सौंप दी थी। इसमें दिनेश के खिलाफ रोगी कल्याण समिति खाते में जमा की गई राशि दो लाख अड़तालिस हजार तीन सौ पच्चीस रुपये की भिन्नता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर निदेशक प्रशासन डॉ. राजागणपति आर ने इस भिन्नता को वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में मानते हुए कनिष्ठ सहायक को निलंबित करते हुए सीएमएस को मुकदमा दर्ज कराकर इसकी कॉपी तत्काल भेजने के आदेश दिए हैं। निदेशक के आदेश के बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन दो दिनों में कर्मचारी पर मुकदमा दर्ज नहीं करा सका। सीएमएस रोगी कल्याण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. गोकुल प्रसाद को मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहते रहे। डॉ. गोकुल ने बताया कि जब निदेशक के पत्र में सीएमएस द्वारा मुकदमा कराने की बात लिखी गई है तो फिर वह कैसे एफआईआर करा सकते हैं। सीएमएस ने पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा तो मैंने कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही एफआईआर हो जाएगी।
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जिला अस्पताल में तैनात कनिष्ठ सहायक दिनेश कुमार रायकवार के खिलाफ विभागीय जांच में रोगी कल्याण समिति का पैसा जमा करने में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने एक अक्तूबर को जांच कर अपनी आख्या महानिदेशालय को सौंप दी थी। इसमें दिनेश के खिलाफ रोगी कल्याण समिति खाते में जमा की गई राशि दो लाख अड़तालिस हजार तीन सौ पच्चीस रुपये की भिन्नता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर निदेशक प्रशासन डॉ. राजागणपति आर ने इस भिन्नता को वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में मानते हुए कनिष्ठ सहायक को निलंबित करते हुए सीएमएस को मुकदमा दर्ज कराकर इसकी कॉपी तत्काल भेजने के आदेश दिए हैं। निदेशक के आदेश के बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन दो दिनों में कर्मचारी पर मुकदमा दर्ज नहीं करा सका। सीएमएस रोगी कल्याण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. गोकुल प्रसाद को मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहते रहे। डॉ. गोकुल ने बताया कि जब निदेशक के पत्र में सीएमएस द्वारा मुकदमा कराने की बात लिखी गई है तो फिर वह कैसे एफआईआर करा सकते हैं। सीएमएस ने पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा तो मैंने कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही एफआईआर हो जाएगी।
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