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जहां से चले, वहीं लौटकर आए

Thu, 17 Sep 2015 11:55 PM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Thu, 17 Sep 2015 11:55 PM IST
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Where to go, return for water
झांसी। केंद्र में नई सरकार बनने पर झांसी महानगर के लिए तैयार की गई पेयजल महा योजना की फाइल जहां से चली थी वहीं लौट कर आ गई है।  केंद्र के निर्देश पर अब इस योजना को राज्य सरकार स्वीकृति प्रदान करेगी, जिसके लिए नए स्तर से फाइल तैयार की जा रही है। स्मार्ट सिटी के हिसाब से प्लान तैयार किया जा रहा है।
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झांसी महानगर में बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से पानी की मांग बढ़ती जा रही है। जल निगम ने इस समस्या से निजात पाने के लिए  पांच साल पहले यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम (स्माल एंड मीडियम टाउन) कार्यक्रम के तहत 462 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा था। समय के साथ यह प्रोजेक्ट 755 करोड़ पर पहुंच गया। केंद्र में सरकार बदलने के एक साल तक योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। इसके बाद इस योजना का नाम बदलकर अटल मिशन फार रेजूनेशन एंड अरबन ट्रांसफोरमेशन कर दिया गया है।
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साथ ही केंद्र सरकार ने कह दिया कि इस योजना को अब राज्य सरकार स्वीकृति प्रदान करेगी। इसके बाद ही केंद्र सरकार अपने हिस्से का बजट देगी। नए सिरे से इस योजना को तैयार कर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशित किया गया है कि स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन के हिसाब से योजना को तैयार कर भेजा जाए। निर्देशों के बाद जल निगम ने दुबारा फाइल तैयार करना शुरू कर दी है।
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‘स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन को फोलो करने के लिए नगर निगम से डिटेल मांगी गई है। योजना पर चार पांच साल पहले डाटा तैयार किया गया था। इस कारण योजना का कुछ डाटा बदलेगा। हालांकि, ढांचा वहीं रहेगा।’
ए पी यादव
अधिशासी अभियंता
जल निगम

लग जाएंगे पांच साल
योजना के तहत पहले चरण में नगर निगम के सभी विस्तारित क्षेत्रों में पाइप लाइन व टंकी निर्माण का काम होगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो योजना को मंजूरी मिलने के बाद उसे पूरी होने में कम से कम पांच से सात साल का समय लग जाएगा। ऐसे में जल संकट झेल रहे लोगों को इतनी अवधि तक और परेशानी झेलनी होगी।


कुएं, हैंडपंप और बोरिंग के सहारे प्यास बुझाने को मजबूर हैं लोग
बुंदेलखंड में पानी की गंभीर समस्या है। इससे झांसी महानगर के बाशिंदे भी अछूते नहीं हैं। हर साल गर्मियों में यहां के हजारों परिवारों को एक- एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गर्मियों में लोग कुएं, हैंडपंप और बोरिंग के सहारे प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
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