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अमर उजाला शिक्षा अभियान : हमने ठाना है हर रोज स्कूल जाना है, बच्चों में फिर से लिखने-पढ़ने की आदत डालनी है

Sun, 27 Mar 2022 12:48 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sun, 27 Mar 2022 12:48 AM IST
सार

कोरोना काल में लॉकडाउन के समय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए मोबाइल ही एक साधन था। विद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर बच्चाें को शिक्षा से जोड़े रखने का प्रयास किया गया था। लेकिन इस प्रयास का प्रभाव यह हुआ कि बच्चों की किताब से पढ़ने और कॉपियों में लिखने की आदत ही छूट गई।

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Amar Ujala Abhiyan Education Health have decided to go to school everyday inculcate the habit of reading and writing again in children
अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : amar ujala

विस्तार

महामारी के दौर में कमरों में और मोबाइल में कैद हो गई जिंदगी को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए बच्चे अभिभावक और विद्यालय तीनों मिलकर प्रयास कर रहे हैं। विद्यालय प्रशासन अभिभावकों को बता रहे हैं कि बच्चे में फिर से पहले की तरह लिखने-पढ़ने की आदत डालनी है तो उसे रोज विद्यालय भेजें। उधर अभिभावकों ने भी ठाना है कि बच्चों को रोज स्कूल भेजना है।

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कोरोना काल में लॉकडाउन के समय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए मोबाइल ही एक साधन था। विद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर बच्चाें को शिक्षा से जोड़े रखने का प्रयास किया गया था। लेकिन इस प्रयास का प्रभाव यह हुआ कि बच्चों की किताब से पढ़ने और कॉपियों में लिखने की आदत ही छूट गई। जब ऑफलाइन कक्षाओं में पढ़ने का समय आया तो शिक्षकों ने देखा अधिकांश बच्चों का कॉपियों में काम पूरा ही नहीं था। कुछ बच्चे तो काम पूरा न हो पाने के कारण स्कूल ही जाने को तैयार नहीं थे। बच्चों से वार्षिक परीक्षा में लिखा नहीं जा रहा था। वहीं छोटी कक्षाओं के बच्चों का काफी नुकसान हुआ है।
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विद्यालय ने अब यह रणनीति तैयार की है कि पहले बच्चों को लिखने की आदत डालेंगे। नए सत्र के पहले एक दो महीने बच्चों को पुरानी कक्षाओं का ही पढ़ाएंगे। कक्षाएं बढ़ने के साथ-साथ विषय भी बढ़ते जाते हैं, अब ऑनलाइन कक्षाओं में कई विषयों की आधारभूत चीजें स्पष्ट ही नहीं हो पाई थी। ऐसे में बच्चों को अगली कक्षा का समझने में कठिनाई न हो इसके लिए कुछ माह पिछली कक्षा का ही दोहराया जाएगा।
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बच्चों की लिखावट बहुत बेकार हो गई है। हमने अभी वार्षिक परीक्षाओं के दौरान देखा कि बच्चे को कुछ जवाब याद हैं लेकिन वे लिख नहीं पा रहे। हैंडराइटिंग सुधरवाई जा रही है। - आफताब, शिक्षक, ज्ञान स्थली स्कूल


बच्चों की याद करने की क्षमता कम हो गई है। इसलिए अब बच्चे को कक्षाओं में ही याद करवाया जाएगा। कक्षाओं में शिक्षक स्वयं बच्चे को याद कराएगा। अभिभावकों की भी काउंसंलिंग कर रहे हैं। - नुजहत परवीन खान, शिक्षिका, जैकब स्कूल

अब बच्चों को अपने सामने ही पढ़ने बैठाते हैं। नए सत्र में रोज बच्चे को स्कूल भेजेंगे। - पवन धुरौलिया
बच्चे का घर पर रहने से शारीरिक और मानसिक तौर पर नुकसान हुआ है, इसे सुधारने के लिए मेहनत लगेगी। - संजना सेन, अभिभावक
बच्चों ने दो सालों में बहुत उतार-चढ़ाव देख लिया है, अब बस वे पढ़ाई पर ध्यान दें, हमारा यही प्रयास रहेगा। - हरकुंवर, अभिभावक
रोज एक पेज हिंदी, एक पेज अंग्रेजी का लिखते हैं ताकि राइटिंग सही हो जाए। - काव्या सेन, विद्यार्थी
सोमवार से स्कूल खुल रहे हैं, इसमें रोज का पढ़ाया रोज याद किया करेंगे। - साक्षी, विद्यार्थी

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