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हम बाहर निभा रहे फर्ज, आप घरों में रहिए
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मीनाक्ष्री अरोरा, स्टाफ नर्स।
झांसी। लॉकडाउन में लोगों की सेवा करने के लिए महिलाएं जुनून के साथ जुटी हैं। एक ओर जहां वे ड्यूटी के जरिए देश सेवा कर रही हैं, दूसरी ओर उन्होंने परिवार से दूरी बना ली है। बस स्टैंड पर तैनात स्टाफ नर्स पूरी हिम्मत और लगन के साथ अपने कार्यों को अंजाम दे रही हैं। कोई बच्ची को मकान मालिक के पास छोड़कर महामारी से लड़ रहा है, तो किसी ने बच्चे से दूरी बना ली है। महामारी के दौर में महिला योद्घा लोगों को लॉकडाउन का पालन करने की सलाह दे रही हैं। वे बस स्टैंड पर आने वाले यात्रियों की टोली का चेकअप करती हैं। इस दौरान सावधानी भी बरतती हैं।
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पति लुधियाना में फंसे हैं, बेटी को रखती हैं दूर
बस स्टैंड पर तैनात स्टाफ नर्स सीपरी बाजार निवासी मीनाक्षी अरोरा मुश्किल हालात में भी पूरे लगन से अपने कर्तव्य को निभा रही हैं। मूल रूप से इलाहाबाद निवासी मीनाक्षी ने इन दिनों अपनी सात साल की बेटी को खुद से दूर कर दिया है। पति लुधियाना में फंसे हैं, ऐसे में उनकी दोहरी जिम्मेदारी हो गई है। ड्यूटी पर निकलने से पहले बेटी को मकान मालिक के पास छोड़ती हैं। शाम को घर पहुंचने पर खुद को सैनिटाइज करने के लिए नहाती हैं। संक्रमण का साया बेटी पर न पड़े, इसलिए उसे दूर रखती हैं। वे बताती हैं कि जिम्मेदारी तो बढ़ गई है, लेकिन लोगों की सेवा के लिए जुटे हैं।
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चार साल के बेटे को नहीं दे पा रहीं वक्त
खातीबाबा निवासी स्टाफ नर्स शिवानी यादव भी लॉकडाउन में ड्यूटी के चलते अपने चार साल के बेटे को समय नहीं दे पा रही हैं। घर जाने के बाद भी वह बेटे से दूर रहती हैं। पति रेलवे में लोको पायलट हैं, तो वे भी मालगाड़ी पर रहते हैं। ऐेसे में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। पूरे दिन ड्यूटी के दौरान वे बाहर से आ रहे मजदूरों और लोगों की जांच करती हैं। घर जाने के बाद खुद को नहाकर सैनिटाइज करती हैं। साथ ही घर में काम करते समय भी पूरी सावधानी बरतती हैं। उनका कहना है कि बच्चों के लिए कोरोना खतरनाक है। इसलिए बेटे को दूर रखते हैं। गर्व है कि हम इस आपदा के दौर में मददगार बने हैं।
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मां का ख्याल छोड़ मरीजों की सेवा में जुटीं
अंसल कॉलोनी निवासी एक और स्टाफ नर्स दीपा यादव भी पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रही हैं। उनकी मां का पिछले दिनों ऑपरेशन हुआ है, लेकिन ड्यूटी के चलते वे मां को समय नहीं दे पा रही हैं। घर पर पहुंचने के बाद वे भी सैनिटाइजेशन का ध्यान रखती हैं। साथ ही क्वारंटीन नियमों का पालन करती हैं। परिजन भी उनके सेवाभाव की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम ड्यूटी को पूरी निष्ठा से अंजाम दे रहे हैं, लेकिन कुछ लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। लोगों को कोरोना के खतरे को समझने की जरूरत है।
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पति लुधियाना में फंसे हैं, बेटी को रखती हैं दूर
बस स्टैंड पर तैनात स्टाफ नर्स सीपरी बाजार निवासी मीनाक्षी अरोरा मुश्किल हालात में भी पूरे लगन से अपने कर्तव्य को निभा रही हैं। मूल रूप से इलाहाबाद निवासी मीनाक्षी ने इन दिनों अपनी सात साल की बेटी को खुद से दूर कर दिया है। पति लुधियाना में फंसे हैं, ऐसे में उनकी दोहरी जिम्मेदारी हो गई है। ड्यूटी पर निकलने से पहले बेटी को मकान मालिक के पास छोड़ती हैं। शाम को घर पहुंचने पर खुद को सैनिटाइज करने के लिए नहाती हैं। संक्रमण का साया बेटी पर न पड़े, इसलिए उसे दूर रखती हैं। वे बताती हैं कि जिम्मेदारी तो बढ़ गई है, लेकिन लोगों की सेवा के लिए जुटे हैं।
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चार साल के बेटे को नहीं दे पा रहीं वक्त
खातीबाबा निवासी स्टाफ नर्स शिवानी यादव भी लॉकडाउन में ड्यूटी के चलते अपने चार साल के बेटे को समय नहीं दे पा रही हैं। घर जाने के बाद भी वह बेटे से दूर रहती हैं। पति रेलवे में लोको पायलट हैं, तो वे भी मालगाड़ी पर रहते हैं। ऐेसे में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। पूरे दिन ड्यूटी के दौरान वे बाहर से आ रहे मजदूरों और लोगों की जांच करती हैं। घर जाने के बाद खुद को नहाकर सैनिटाइज करती हैं। साथ ही घर में काम करते समय भी पूरी सावधानी बरतती हैं। उनका कहना है कि बच्चों के लिए कोरोना खतरनाक है। इसलिए बेटे को दूर रखते हैं। गर्व है कि हम इस आपदा के दौर में मददगार बने हैं।
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मां का ख्याल छोड़ मरीजों की सेवा में जुटीं
अंसल कॉलोनी निवासी एक और स्टाफ नर्स दीपा यादव भी पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रही हैं। उनकी मां का पिछले दिनों ऑपरेशन हुआ है, लेकिन ड्यूटी के चलते वे मां को समय नहीं दे पा रही हैं। घर पर पहुंचने के बाद वे भी सैनिटाइजेशन का ध्यान रखती हैं। साथ ही क्वारंटीन नियमों का पालन करती हैं। परिजन भी उनके सेवाभाव की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम ड्यूटी को पूरी निष्ठा से अंजाम दे रहे हैं, लेकिन कुछ लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। लोगों को कोरोना के खतरे को समझने की जरूरत है।

शिवानी यादव, स्टाफ नर्स।