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पश्चिम में हम मजबूत हैं, बुंदेलखंड, मध्य और पूरब में और अच्छे नतीजे आएंगे, योगी
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झांसी। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में होने वाले मतदान से ठीक पहले बुंदेलखंड दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये चुनाव 80 बनाम 20 का है। यानी कि 80 फीसदी सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिलने जा रही हैं। पश्चिम से भी ज्यादा अच्छे परिणाम बुंदेलखंड, मध्य और पूरब में देखने को मिलेंगे। विपक्षी पार्टियों के नेताओं में हार की बौखलाहट साफ दिख रही है।
सीएम योगी ने कहा कि पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हर तीसरे दिन दंगे होते थे। बुंदेलखंड में खनन और भूमाफिया हावी थे। सत्ता का प्रश्रय भी उन माफियाओं को था। 2017 में जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से लोगों को सुरक्षित वातावरण मिला है। अब दंगाई इस प्रदेश को छोड़कर भाग गए हैं। 10 मार्च के बाद गर्मी शांत करने की बात पर मुख्यमंत्री बोले कि आदर्श आचार संहिता लगते ही बिलों में घुसे माफिया निकल आए हैं और जनता को परेशान कर रहे हैं। ऐसे लोगों की गर्मी 10 मार्च के बाद शांत कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बुलडोजर उत्तर प्रदेश के विकास का एक मॉडल होगा। योगी ने ये भी कहा कि पिछले पांच सालों में सात एक्सप्रेस-वे और 33 नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बोले कि इस बार फिर से भाजपा 300 पार सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रही है।
दो चरणों के चुनाव हो गए हैं, खासकर वहां जहां किसानों का आंदोलन था। क्या स्थिति मानते हैं?
भाजपा के प्रति जनता में विश्वास है। पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा था। यहां हर तीसरे दिन दंगे होते थे। महीनों कर्फ्यू लगा रहता था। व्यापारी तबाह हो जाता था। लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता था। लड़कियां स्कूल, महिलाएं बाजार नहीं जा पाता थीं। हमने दंगा मुक्त और भयमुक्त प्रदेश के नारे को साकार किया है। जन अपेक्षाओं पर सरकार खरी उतर रही है। मैंने 80 बनाम 20 का कहा था। तो मानकर चलिए कि 80 फीसदी सीटें भाजपा जीतेगी।
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क्या पश्चिम में मुस्लिम वोट नहीं बंटा और हिंदू बंटा है? अखिलेश-जयंत की जोड़ी कोई असर दिखाएगी?
2019 में कोई विभाजन हुआ था क्या? सपा, बसपा, कांग्रेस, आरएलडी सब मिलकर लड़ रहे थे। 2019 में चार साथ थे, अब तो दो कम हो गए हैं। फिर भी इनकी हताशा, निराशा इस बात को प्रदर्शित करती है कि ये लोग चुनाव हार चुके हैं। हार की बौखलाहट उनको उत्तेजित कर रही है।
कोई बदलाव हुआ तो जयंत के मुकाबले आजम मजबूत होंगे?
जयंत को फुर्सत ही कहां है दिल्ली से बाहर निकलने की। बड़े बाप के पुत्र हैं। आराम तलब हैं। फिर पश्चिम में वही दंगाई, वही माफिया हावी हो जाएंगे, जो पहले भी पश्चिम और उत्तर प्रदेश को तबाह कर रहे थे।
स्वामी प्रसाद के जाने से वोट बैंक पर कुछ असर पड़ेगा।
अब तो चुनाव हो ही रहे हैं। जिन लोगों के लिए खुद की सीट बचानी मुश्किल हो रही हो, वो लोग कितना बीजेपी को वोट दिला सकते थे, ये चुनाव परिणाम स्पष्ट कर देगा।
शिवपाल को बेचारा बना दिया गया है
शिवपाल तो बेचारा हो गए। प्रदेश के नेता थे। उनको एक विधानसभा तक सीमित करके एक तरफ से उनकी राजनीतिक विदाई ही कर दी गई है।
इस बार के चुनाव में शब्दों की मर्यादा टूट रही है?
जो जिस भाषा को समझेगा, उसमें समझाएंगे। अखिलेश बड़े बाप के बेटे हैं। वो जमीनी हकीकत से वाकिफ कम होते हैं। दोपहर 12 बजे उठते हैं। मित्र मंडली उनको घेर लेती है। तैयार होने में दोपहर के तीन-चार बज जाते हैं। फिर मित्र मंडली के साथ समय निकालने का दूसरा अवसर मिल जाता है। उनको प्रदेश और जनता के बारे में बात करने का कहां समय रहता है। स्वयं की ही दिनचर्या में मस्त, व्यस्त रहते हैं। उनको प्रदेश के जिले, मंडल, ब्लॉक, थाने के बारे में जानकारी नहीं और दुर्भाग्य से ये प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। जिस ई-ऑफिस का उन्होंने विरोध किया था, उसकी परिकल्पना को हम साकार कर चुके हैं। मैं कंप्यूटर चलाता हूं या नहीं, ये तो प्रदेश का हर व्यक्ति जानता है। ई-कैबिनेट और ई-बजट हमने ही प्रस्तुत कराया था विधानसभा में। हर विधायक को टैबलेट देने का काम किया। उनको परेशानी इस बात की है कि जो काम वो नहीं कर पाए, वो हमने कर दिया। कोरोना काल में युवाओं पर असर पड़ा। स्कूल, कॉलेज नियमित नहीं खुल पाए। ऑनलाइन शिक्षा के लिए टैबलेट, स्मार्ट फोन नहीं थे। जो खरीदता भी तो डिजिटल एक्सेस के लिए पैसे नहीं थे। हमने टैबलेट, स्मार्ट फोन देने का फैसला लिया। दूसरा डिजिटल एक्सेस फ्री कर दिया। इससे अखिलेश को तकलीफ हो गई। उन्होंने चुनाव आयोग में भी शिकायत की है कि स्मार्ट फोन, टैबलेट वितरित नहीं होना चाहिए। पिछले साढ़े चार साल में जो माफिया, अपराधी बिलों के अंदर घुसे थे, वो अचानक चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन आने के बाद निकलकर फिर से धमकी देने लगे। उन्हें ये तो नहीं कहेंगे कि आप बहादुर हो। तभी कहा गर्मी न दिखाओ, 10 मार्च को गर्मी ठीक हो जाएगी। शांति से चुनाव लड़ना है तो लड़ो, जनता को धमकाओ मत। वरना गर्मी शांत कर दी जाएगी।
बुंदेलखंड में अन्ना पशु और पानी की समस्या अभी भी है
आप जानते हैं कि अन्ना पशु की समस्या का 50 फीसदी समाधान हुआ है। बचा हुआ 50 फीसदी का भी कर देंगे। जिन लोगों ने 70 सालों तक बुंदेलखंड और बुंदेलों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसाया। अब समय आ गया है कि बुंदेलखंड का एक-एक मतदाता अपनी वोट की चोट से उनको सबक सिखाएगा। हमारे समय में ट्रेन से पानी लाने की नौबत नहीं आई। टैंकर भी कम से कम रखे गए। आज दस हजार करोड़ की पेयजल योजना लागू की है। पाइप बिछ रहे, ओवरहेड टैंक बन रहे, ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हो रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्टर बनाने में समय लगता है। 15 सालों तक पेयजल की स्कीम लागू करने की गारंटी भी देगी संस्था। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है। मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बुंदेलखंड के बारे में कौन सोचता था? यहां तो खनन, भूमाफिया हावी थे। सत्ता का प्रश्रय उन माफियाओं को था, जनता को नहीं।
अयोध्या में मंदिर बन रहा है, मथुरा की क्या योजना है?
बृज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से मथुरा में विकास के कार्य बहुत अच्छे से आगे बढ़ रहे हैं। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, बलदेव, गोवर्धन में इन सभी तीर्थों का विकास हो रहा है। बाकी हर चीज का समय होता है, उसके हिसाब से आगे बढ़ेंगे।
आपको बुलडोजर बाबा भी कहा जाने लगा है, बुंदेलखंड में कब चलेगा?
देखिए, अभी तो बुलडोजर ने अपने काम को आगे बढ़ाया ही है। मुझे लगता है कि ये उत्तर प्रदेश के विकास का एक मॉडल होगा। पहली बार प्रदेश के अंदर कुख्यात माफियाओं के ऊपर बुलडोजर चले हैं। ये माफिया जिसकी भी सत्ता होती है, उसके बहुत नजदीक हो जाते थे। आज तो ऐसा नहीं है। निश्चिंत रहिए विकास और बुलडोजर साथ-साथ चलता रहेगा।
कोई और बड़े प्रोजेक्ट बुंदेलखंड के लिए सोच रहे हैं?
डाटा अगर देखें तो 70 साल में प्रदेश में केवल डेढ़ एक्सप्रेस-वे बन पाया। आज सात नए एक्सप्रेस-वे बना रहे हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे राष्ट्र को समर्पित हो चुका है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे अपने निर्माण की अंतिम प्रक्रिया के साथ जुड़ रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और दो अन्य एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। गोरखपुर-सिलीगुढ़ी के बीच में और एक वाराणसी-कोलकाता के बीच में। ये नौ एक्सप्रेस-वे पांच साल में भाजपा की डबल इंजन सरकार के कारण आगे बढ़ रहे हैं। मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो 1947 से 2017 तक 70 सालों में सिर्फ यूपी में 12 मेडिकल कॉलेज बने थे। अब हम 33 नए मेडिकल कॉलेज बना रहे हैं। अब एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना को साकार करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। मेडिकल कॉलेज विशेषज्ञ स्वास्थ्य बिंदु का केंद्र बिंदु होता है। झांसी में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की कार्य पद्धति में स्पष्ट अंतर दिखता है।
इस चुनाव कितनी सीटें मानकर चल रहे हैं?
फिर एक बार तीन सौ पार। 300 से ज्यादा सीटें भारतीय जनता पार्टी जीतेगी, इसमें कोई संदेह रहना ही नहीं चाहिए।
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सीएम योगी ने कहा कि पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हर तीसरे दिन दंगे होते थे। बुंदेलखंड में खनन और भूमाफिया हावी थे। सत्ता का प्रश्रय भी उन माफियाओं को था। 2017 में जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से लोगों को सुरक्षित वातावरण मिला है। अब दंगाई इस प्रदेश को छोड़कर भाग गए हैं। 10 मार्च के बाद गर्मी शांत करने की बात पर मुख्यमंत्री बोले कि आदर्श आचार संहिता लगते ही बिलों में घुसे माफिया निकल आए हैं और जनता को परेशान कर रहे हैं। ऐसे लोगों की गर्मी 10 मार्च के बाद शांत कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बुलडोजर उत्तर प्रदेश के विकास का एक मॉडल होगा। योगी ने ये भी कहा कि पिछले पांच सालों में सात एक्सप्रेस-वे और 33 नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बोले कि इस बार फिर से भाजपा 300 पार सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रही है।
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दो चरणों के चुनाव हो गए हैं, खासकर वहां जहां किसानों का आंदोलन था। क्या स्थिति मानते हैं?
भाजपा के प्रति जनता में विश्वास है। पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा था। यहां हर तीसरे दिन दंगे होते थे। महीनों कर्फ्यू लगा रहता था। व्यापारी तबाह हो जाता था। लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता था। लड़कियां स्कूल, महिलाएं बाजार नहीं जा पाता थीं। हमने दंगा मुक्त और भयमुक्त प्रदेश के नारे को साकार किया है। जन अपेक्षाओं पर सरकार खरी उतर रही है। मैंने 80 बनाम 20 का कहा था। तो मानकर चलिए कि 80 फीसदी सीटें भाजपा जीतेगी।
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क्या पश्चिम में मुस्लिम वोट नहीं बंटा और हिंदू बंटा है? अखिलेश-जयंत की जोड़ी कोई असर दिखाएगी?
2019 में कोई विभाजन हुआ था क्या? सपा, बसपा, कांग्रेस, आरएलडी सब मिलकर लड़ रहे थे। 2019 में चार साथ थे, अब तो दो कम हो गए हैं। फिर भी इनकी हताशा, निराशा इस बात को प्रदर्शित करती है कि ये लोग चुनाव हार चुके हैं। हार की बौखलाहट उनको उत्तेजित कर रही है।
कोई बदलाव हुआ तो जयंत के मुकाबले आजम मजबूत होंगे?
जयंत को फुर्सत ही कहां है दिल्ली से बाहर निकलने की। बड़े बाप के पुत्र हैं। आराम तलब हैं। फिर पश्चिम में वही दंगाई, वही माफिया हावी हो जाएंगे, जो पहले भी पश्चिम और उत्तर प्रदेश को तबाह कर रहे थे।
स्वामी प्रसाद के जाने से वोट बैंक पर कुछ असर पड़ेगा।
अब तो चुनाव हो ही रहे हैं। जिन लोगों के लिए खुद की सीट बचानी मुश्किल हो रही हो, वो लोग कितना बीजेपी को वोट दिला सकते थे, ये चुनाव परिणाम स्पष्ट कर देगा।
शिवपाल को बेचारा बना दिया गया है
शिवपाल तो बेचारा हो गए। प्रदेश के नेता थे। उनको एक विधानसभा तक सीमित करके एक तरफ से उनकी राजनीतिक विदाई ही कर दी गई है।
इस बार के चुनाव में शब्दों की मर्यादा टूट रही है?
जो जिस भाषा को समझेगा, उसमें समझाएंगे। अखिलेश बड़े बाप के बेटे हैं। वो जमीनी हकीकत से वाकिफ कम होते हैं। दोपहर 12 बजे उठते हैं। मित्र मंडली उनको घेर लेती है। तैयार होने में दोपहर के तीन-चार बज जाते हैं। फिर मित्र मंडली के साथ समय निकालने का दूसरा अवसर मिल जाता है। उनको प्रदेश और जनता के बारे में बात करने का कहां समय रहता है। स्वयं की ही दिनचर्या में मस्त, व्यस्त रहते हैं। उनको प्रदेश के जिले, मंडल, ब्लॉक, थाने के बारे में जानकारी नहीं और दुर्भाग्य से ये प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। जिस ई-ऑफिस का उन्होंने विरोध किया था, उसकी परिकल्पना को हम साकार कर चुके हैं। मैं कंप्यूटर चलाता हूं या नहीं, ये तो प्रदेश का हर व्यक्ति जानता है। ई-कैबिनेट और ई-बजट हमने ही प्रस्तुत कराया था विधानसभा में। हर विधायक को टैबलेट देने का काम किया। उनको परेशानी इस बात की है कि जो काम वो नहीं कर पाए, वो हमने कर दिया। कोरोना काल में युवाओं पर असर पड़ा। स्कूल, कॉलेज नियमित नहीं खुल पाए। ऑनलाइन शिक्षा के लिए टैबलेट, स्मार्ट फोन नहीं थे। जो खरीदता भी तो डिजिटल एक्सेस के लिए पैसे नहीं थे। हमने टैबलेट, स्मार्ट फोन देने का फैसला लिया। दूसरा डिजिटल एक्सेस फ्री कर दिया। इससे अखिलेश को तकलीफ हो गई। उन्होंने चुनाव आयोग में भी शिकायत की है कि स्मार्ट फोन, टैबलेट वितरित नहीं होना चाहिए। पिछले साढ़े चार साल में जो माफिया, अपराधी बिलों के अंदर घुसे थे, वो अचानक चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन आने के बाद निकलकर फिर से धमकी देने लगे। उन्हें ये तो नहीं कहेंगे कि आप बहादुर हो। तभी कहा गर्मी न दिखाओ, 10 मार्च को गर्मी ठीक हो जाएगी। शांति से चुनाव लड़ना है तो लड़ो, जनता को धमकाओ मत। वरना गर्मी शांत कर दी जाएगी।
बुंदेलखंड में अन्ना पशु और पानी की समस्या अभी भी है
आप जानते हैं कि अन्ना पशु की समस्या का 50 फीसदी समाधान हुआ है। बचा हुआ 50 फीसदी का भी कर देंगे। जिन लोगों ने 70 सालों तक बुंदेलखंड और बुंदेलों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसाया। अब समय आ गया है कि बुंदेलखंड का एक-एक मतदाता अपनी वोट की चोट से उनको सबक सिखाएगा। हमारे समय में ट्रेन से पानी लाने की नौबत नहीं आई। टैंकर भी कम से कम रखे गए। आज दस हजार करोड़ की पेयजल योजना लागू की है। पाइप बिछ रहे, ओवरहेड टैंक बन रहे, ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हो रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्टर बनाने में समय लगता है। 15 सालों तक पेयजल की स्कीम लागू करने की गारंटी भी देगी संस्था। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है। मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बुंदेलखंड के बारे में कौन सोचता था? यहां तो खनन, भूमाफिया हावी थे। सत्ता का प्रश्रय उन माफियाओं को था, जनता को नहीं।
अयोध्या में मंदिर बन रहा है, मथुरा की क्या योजना है?
बृज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से मथुरा में विकास के कार्य बहुत अच्छे से आगे बढ़ रहे हैं। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, बलदेव, गोवर्धन में इन सभी तीर्थों का विकास हो रहा है। बाकी हर चीज का समय होता है, उसके हिसाब से आगे बढ़ेंगे।
आपको बुलडोजर बाबा भी कहा जाने लगा है, बुंदेलखंड में कब चलेगा?
देखिए, अभी तो बुलडोजर ने अपने काम को आगे बढ़ाया ही है। मुझे लगता है कि ये उत्तर प्रदेश के विकास का एक मॉडल होगा। पहली बार प्रदेश के अंदर कुख्यात माफियाओं के ऊपर बुलडोजर चले हैं। ये माफिया जिसकी भी सत्ता होती है, उसके बहुत नजदीक हो जाते थे। आज तो ऐसा नहीं है। निश्चिंत रहिए विकास और बुलडोजर साथ-साथ चलता रहेगा।
कोई और बड़े प्रोजेक्ट बुंदेलखंड के लिए सोच रहे हैं?
डाटा अगर देखें तो 70 साल में प्रदेश में केवल डेढ़ एक्सप्रेस-वे बन पाया। आज सात नए एक्सप्रेस-वे बना रहे हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे राष्ट्र को समर्पित हो चुका है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे अपने निर्माण की अंतिम प्रक्रिया के साथ जुड़ रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और दो अन्य एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। गोरखपुर-सिलीगुढ़ी के बीच में और एक वाराणसी-कोलकाता के बीच में। ये नौ एक्सप्रेस-वे पांच साल में भाजपा की डबल इंजन सरकार के कारण आगे बढ़ रहे हैं। मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो 1947 से 2017 तक 70 सालों में सिर्फ यूपी में 12 मेडिकल कॉलेज बने थे। अब हम 33 नए मेडिकल कॉलेज बना रहे हैं। अब एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना को साकार करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। मेडिकल कॉलेज विशेषज्ञ स्वास्थ्य बिंदु का केंद्र बिंदु होता है। झांसी में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की कार्य पद्धति में स्पष्ट अंतर दिखता है।
इस चुनाव कितनी सीटें मानकर चल रहे हैं?
फिर एक बार तीन सौ पार। 300 से ज्यादा सीटें भारतीय जनता पार्टी जीतेगी, इसमें कोई संदेह रहना ही नहीं चाहिए।