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अपराजिताः कुदरत की अनमोल धरोहर है जल, इसे बचाएं

Fri, 28 Jun 2019 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 01:15 AM IST
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watter nature harritage
झांसी। अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत बृहस्पतिवार को जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी हुई, जिसमें वर्षा जल के संचयन पर जोर दिया गया। साथ ही वक्ताओं ने कहा कि पानी कुदरत की अनमोल धरोहर है। ये कृत्रिम रूप से तैयार नहीं किया जा सकता। भविष्य की पीढ़ी के लिए आज पानी बचाना बेहद जरूरी है।
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एक होटल में इनरव्हील क्लब ऑफ वीरांगना झांसी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में डा. मनीषा जैन ने कहा कि वर्षा जल के संचयन के लिए घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। रेखा अग्रवाल ने कहा कि आरओ से निकलने वाला पानी बेकार नहीं जाने देना चाहिए। इसका उपयोग कूलर, बगीचे में करना चाहिए। स्नेहलता अग्रवाल ने कहा कि घरों की धुलाई में कम से कम पानी इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। सोनल अग्रवाल ने कहा कि बारिश के पानी को संरक्षित किया जाना चाहिए। छत से बेकार बहने वाले पानी का भी उपयोग रोजमर्रा के काम में किया जा सकता है।
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इस मौके पर अंजू शर्मा, कविता, ममता यादव, सुनीता सिजरिया, स्मिता जैन, शशि गर्ग, कविता जैन, ममता जैन, अंजू अग्रवाल, निशा अग्रवाल, रिचा जैन, शैली अग्रवाल, ममता अग्रवाल, प्रीति गुप्ता, कौशल्या अग्रवाल, निर्मल अग्रवाल आदि उपस्थित रहीं। आभार संस्था की सचिव डा. मनीषा जैन ने जताया।
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जल संरक्षण बेहद गंभीर मसला है। पूरी गंभीरता के साथ सभी को जल संरक्षण का काम करना चाहिए। इसमें आज की जाने वाली लापरवाही, भविष्य की पीढ़ी पर भारी पड़ सकती है।
- सुषमा अग्रवाल
रेन वाटर हार्वेस्टिंग वर्षा जल के संचयन का बेहद आसान जरिया है। इससे भूगर्भ जल के स्तर में बढ़ोत्तरी होती है। इसे सभी भवनों पर अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।

- डा. इंदु
पानी के हमारे पुराने स्रोत कुएं, तालाब आदि को संरक्षित किया जाना चाहिए। इनका पानी तो काम आता ही है, साथ ही ये आसपास के क्षेत्र का भूगर्भ जल स्तर भी बढ़ाते हैं।
- सीमा गुप्ता
पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन ये कम होता जा रहा है। ये आने वाली पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा है। इससे निपटने के अभी से उपाय किए जाने चाहिए।
- मंजू अग्रवाल
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