वाटर टैंकर: राजनीति दुनिया भर की, नतीजा शून्य

अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 11 May 2016 02:35 AM IST
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झांसी। केंद्र सरकार के निर्देश पर रेलवे यार्ड में भेजे गए खाली टैंकरों पर कई दिनों की सियासत के बाद भी सूखे बुंदेलखंड को कुछ भी नहीं मिला, उल्टे इन टैंकरों में भरकर झांसी का पांच लाख लीटर पानी आगरा भेज दिया गया।
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गौरतलब है कि बुंदेलखंड के महोबा क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए वाटर टैंकरों को रतलाम से झांसी भेजा गया था, पर महोबा डीएम के पानी लेने से मना करने पर टैंकर भेजने का मकसद पूरा नहीं हो सका और न ही रूटीन में छोटे स्टेशनों पर पानी पहुंचाने का काम हो सका। नतीजा शून्य ही रहा। हालांकि, प्रेस फोटोग्राफर की मौत के बाद टैंकरों को आगरा भेज दिया गया। इनके साथ झांसी का पांच लाख लीटर पानी भी चला गया।
इसके बाद से टैंकरों को लेकर सियासत थम र्गई है। मगर, यह सब कैसे हो गया। यह कोई समझने को तैयार नहीं है। दरअसल, झांसी में हर साल गर्मियों के दिनों में पानी के टैंकर भेजे जाते हैं। मंडल के जिन स्टेशनों पर पानी की कमी हो जाती हैं, इन टैंकरों से ही संबंधित स्टेशनों तक पानी पहुंचाने का काम होता है। इसी उद्देश्य से इस बार भी पानी के टैंकर झांसी भेजे गए थे। मगर, जिस तरह से पानी के टैंकरों पर सियासत शुरू हुई तो दस टैंकरों की गाड़ी को ही ‘जल एक्सप्रेस’ बना दिया गया।
रेल प्रशासन भी जवाब देते- देते परेशान हो गया। नेताओं के शोरगुल को शांत करने के लिए रेल प्रशासन ने आनन- फानन में टैंकरों में पानी भर दिया। रेल प्रशासन को उम्मीद थी कि जल्द ही महोबा के डीएम टैंकरों से पानी मंगा लेंगे, मगर उन्होंने भी पत्र लिखकर पानी से लेने से मना कर दिया। इधर, सियासत कम होने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे रेल प्रशासन बेहद परेशान था। ऐसे में सोमवार को रेलवे यार्ड में टैंकरों की कवरेज के लिए गए इंडियन एक्सप्रेस के फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत ने मामले को नया मोड़ दे दिया। इस कारण रेल प्रशासन को आनन- फानन में टैंकरों को आगरा भेजना पड़ा।  


..... तो नहीं जाती जान
रेल प्रशासन ने टैंकरों पर बढ़ रही सियासत को देखते हुए सोमवार की शाम छह बजे ही उन्हें आगरा भेजने का मूड बना लिया था। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए थे। पर, शाम पांच बजे फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया कवरेज के लिए पहुंच गए और हादसे का शिकार हो गए। अगर, टैंकरों को एक घंटे पहले ही रवाना कर दिया होता तो शायद आज रवि जिंदा होते।
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