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घर-घर पाइपलाइन बिछाकर बेच रहे पानी, अफसरों को नहीं दिखता ये प्राइवेट जलसंस्थान
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झांसी। लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम सरकारी महकमे की नाक के नीचे शहर के कई मुहल्लों में प्राइवेट जल संस्थान धड़ल्ले से चल रहा है। यहां पानी के बदले लोगों से मोटा पैसा वसूला जा रहा है। जिसको पानी चाहिए वह सड़क और नालियों के बीच यहां-वहां पाइपलाइन डलवा रहा है। पानी बेचने का यह खेल झांसी के 400 से अधिक घरों तक पहुंच चुका है। जबकि जलसंस्थान के अफसर इससे अंजान बने हुए हैं।
शहर में जल संस्थान के समानांतर प्राइवेट जल संस्थान बन गए हैं। महानगर के तीन इलाकों में जल संस्थान की तरह ही इन लोगों ने न सिर्फ घर-घर पाइपलाइन बिछा रखी है बल्कि उनसे हर महीने बिल वसूली भी काम करते हैं। महानगर के बड़ागांव गेट बाहर, अन्नपूर्णा कॉलोनी, भगवंतपुरा में इन्हीं प्राइवेट जल संस्थान की पाइपलाइन वर्षों से लोगों की प्यास बुझा रही है।
बड़ागांव गेट बाहर स्थित सत्यम कॉलेानी, अन्नपूर्णा कॉलोनी एवं भगवंतपुरा के आसपास का पूरे इलाके में चार सौ से अधिक घर हैं। इस पूरे इलाके में पहले लोगों को बोरिंग से पानी मिलता था लेकिन, जलस्तर घटने के बाद यहां पानी मिलना बंद हो गया। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत जल संस्थान से की लेकिन, जल संस्थान ने यहां पेयजल लाइन नहीं बिछाई। इसके चलते इन इलाकों में आज तक सरकारी आपूर्ति नहीं पहुंच सकी है।
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सरकारी आपूर्ति न होने का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने इन इलाकों में अपनी खुद की पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति आरंभ कर दी। यह काम वह पिछले कई दशकों से कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कुछ जगहों में झिर से पानी इन प्राइवेट आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचता है। इसकी मदद से यह लोगों को पानी बांटते हैं। वहीं, महाप्रबंधक कुलदीप सिंह का कहना है जहां पानी नहीं पहुंचता वहां टैंकर भेजे जाते हैं। इसके अलावा पाइप लाइन भी बिछवाई जा रही है।
पांच सौ रुपये महीना चुकाने पर सिर्फ एक घंटे पानी
इन इलाकों में पानी भी सरकारी दाम के करीब पांच गुना अधिक कीमत पर मिलता है। सामान्यता एक घर में 1100-1200 रुपये ही वाटर टैक्स आता है लेकिन सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में हर महीने पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं। यह मोटी रकम देने के बाद भी रोजाना पानी नहीं मिलता। स्थानीय लोगों का कहना है हर दो दिन के अंतर पर सिर्फ एक घंटे जलापूर्ति होती है।
पिछले बीस साल से अधिक समय से खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सरकारी विभाग ने आज तक इस इलाके में पेयजल लाइन नहीं बिछाई। कई बार इसकी मांग की जा चुकी।
गीता सोनी
दो दिन में सिर्फ एक बार पानी मिलता है। जल संस्थान की पाइपलाइन न होने से लोगों को पानी खरीदना पड़ता है। मजबूरी में लोग पानी लेते हैं।
पिंकी मिश्रा
कई बार जल संस्थान के अफसरों से इसकी शिकायत की गई लेकिन, पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। इसके बिछवाने से हजारों लोगों को फायदा होगा।
राकेश मोहन
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शहर में जल संस्थान के समानांतर प्राइवेट जल संस्थान बन गए हैं। महानगर के तीन इलाकों में जल संस्थान की तरह ही इन लोगों ने न सिर्फ घर-घर पाइपलाइन बिछा रखी है बल्कि उनसे हर महीने बिल वसूली भी काम करते हैं। महानगर के बड़ागांव गेट बाहर, अन्नपूर्णा कॉलोनी, भगवंतपुरा में इन्हीं प्राइवेट जल संस्थान की पाइपलाइन वर्षों से लोगों की प्यास बुझा रही है।
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बड़ागांव गेट बाहर स्थित सत्यम कॉलेानी, अन्नपूर्णा कॉलोनी एवं भगवंतपुरा के आसपास का पूरे इलाके में चार सौ से अधिक घर हैं। इस पूरे इलाके में पहले लोगों को बोरिंग से पानी मिलता था लेकिन, जलस्तर घटने के बाद यहां पानी मिलना बंद हो गया। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत जल संस्थान से की लेकिन, जल संस्थान ने यहां पेयजल लाइन नहीं बिछाई। इसके चलते इन इलाकों में आज तक सरकारी आपूर्ति नहीं पहुंच सकी है।
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सरकारी आपूर्ति न होने का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने इन इलाकों में अपनी खुद की पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति आरंभ कर दी। यह काम वह पिछले कई दशकों से कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कुछ जगहों में झिर से पानी इन प्राइवेट आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचता है। इसकी मदद से यह लोगों को पानी बांटते हैं। वहीं, महाप्रबंधक कुलदीप सिंह का कहना है जहां पानी नहीं पहुंचता वहां टैंकर भेजे जाते हैं। इसके अलावा पाइप लाइन भी बिछवाई जा रही है।
पांच सौ रुपये महीना चुकाने पर सिर्फ एक घंटे पानी
इन इलाकों में पानी भी सरकारी दाम के करीब पांच गुना अधिक कीमत पर मिलता है। सामान्यता एक घर में 1100-1200 रुपये ही वाटर टैक्स आता है लेकिन सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में हर महीने पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं। यह मोटी रकम देने के बाद भी रोजाना पानी नहीं मिलता। स्थानीय लोगों का कहना है हर दो दिन के अंतर पर सिर्फ एक घंटे जलापूर्ति होती है।
पिछले बीस साल से अधिक समय से खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सरकारी विभाग ने आज तक इस इलाके में पेयजल लाइन नहीं बिछाई। कई बार इसकी मांग की जा चुकी।
गीता सोनी
दो दिन में सिर्फ एक बार पानी मिलता है। जल संस्थान की पाइपलाइन न होने से लोगों को पानी खरीदना पड़ता है। मजबूरी में लोग पानी लेते हैं।
पिंकी मिश्रा
कई बार जल संस्थान के अफसरों से इसकी शिकायत की गई लेकिन, पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। इसके बिछवाने से हजारों लोगों को फायदा होगा।
राकेश मोहन