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Jhansi News: मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को खेल दिवस विश्वनाथ शर्मा ने कराया था घोषित

Sat, 30 Mar 2024 01:35 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:35 AM IST
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Vishwanath Sharma had declared Major Dhyanchand's birthday as Sports Day.
विकास सनाड्य
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झांसी। राष्ट्रीय खेल दिवस पर मेजर ध्यानचंद के साथ-साथ खेलप्रेमी पूर्व सांसद पं. विश्वनाथ शर्मा को भी याद करना नहीं भूलते। विश्वनाथ शर्मा ही लोकसभा के अपने दूसरे कार्यकाल में मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को खेल दिवस घोषित करने का बिल लेकर आए थे और इसे पारित कराने के लिए उन्होंने बड़ी संख्या में सांसदों की लामबंदी की थी। आखिरकार वे लोकसभा में इस बिल को पारित कराने में कामयाब हो गए थे। इसके अलावा विश्वनाथ झांसी के पहले ऐसे सांसद थे, जो दूसरे संसदीय क्षेत्र से भी चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे।
बड़े औद्योगिक घराने से ताल्लुकात रखने वाले पं. विश्वनाथ शर्मा ने सन 1980 में हुए लोकसभा के छठवें चुनाव में झांसी-ललितपुर सीट से जीत हासिल की थी। वह कांग्रेस के टिकट पर पहली बार संसद पहुंचे थे। इसके 11 साल बाद उन्होंने बुंदेलखंड की हमीरपुर सीट से बतौर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और अपनी लोकप्रियता की वजह से वहां से भी वे चुनाव जीतने में कामयाब हो गए थे। अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस (29 अगस्त) को राष्ट्रीय खेल दिवस घोषित कराने के लिए मुहिम छेड़ दी थी। इसके लिए उन्हें बड़ी संख्या में लोकसभा के सदस्यों समर्थन लेना पड़ा था, जिसमें वह कामयाब हो गए थे और लोकसभा में ध्यानचंद के जन्मदिवस को खेल दिवस घोषित करने का बिल पारित हो गया था। बाद में राज्यसभा में भी यह बिल पारित हो गया था। इसके लिए भी वे लगातार प्रयास करते रहे थे।
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अड़ गए थे ग्राउंड में ध्यानचंद के अंतिम संस्कार के लिए
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने बताया कि पूर्व सांसद विश्वनाथ शर्मा झांसी की दो विभूति रानी लक्ष्मीबाई व मेजर ध्यानचंद के प्रति बहुत सम्मान का भाव रखते थे। वह इन दोनों विभूतियों को झांसी की पहली पहचान बताते थे। तीन दिसंबर 1979 को मेजर ध्यानचंद का निधन होने के बाद उनके शव को दिल्ली से झांसी लाया गया था। उनका अंतिम संस्कार नंदनपुरा मुक्तिधाम पर करने की तैयारी थी। लेकिन, विश्वनाथ शर्मा ने इसका विरोध कर दिया था। उनका कहना था कि हीरोज ग्राउंड ध्यानचंद की कर्मस्थली रही है। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार ग्राउंड में ही किया जाए। इसके लिए वह धरने तक पर बैठ गए थे। उनके आगे प्रशासन को भी झुकना पड़ा था। हीरोज ग्राउंड में ही ध्यानचंद का अंतिम संस्कार किया गया था। यहां उनकी समाधि बनी हुई है, जो खेलप्रेमियों की आस्था का केंद्र है।
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