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UPPCS: झांसी की प्रिंसी बनीं असिस्टेंट कमिश्नर, पिता हैं पुलिस विभाग में एएसआई, गांव में हर्ष का माहौल
Mon, 30 Mar 2026 08:44 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 30 Mar 2026 08:44 PM IST
सार
यूपी पीसीएस 2024 परीक्षा में प्रिंसी ने 88वीं रैंक हासिल की है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
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प्रिंसी यादव को सम्मानित करते गांव के लोग।
- फोटो : संवाद
विस्तार
छोटे से गांव गौपुरा की बेटी प्रिंसी यादव ने यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि बड़ा हौसला जरूरी होता है। यूपी पीसीएस 2024 परीक्षा में 88वीं रैंक लाकर सफलता हासिल करने वाली प्रिंसी का चयन असिस्टेंट कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर हुआ है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया और बेटी की सफलता को अपना गर्व बताया।
प्रिंसी की इस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास छिपा है। उनके पिता माधव सिंह यादव पुलिस विभाग में अभी औरैया में एएसआई के पद पर तैनात हैं और हमेशा बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और प्रिंसी ने भी इस भरोसे को कभी टूटने नहीं दिया।
प्रिंसी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। बेहतर मार्गदर्शन के लिए वह कुछ समय दिल्ली भी गईं, लेकिन कोविड के बाद हालात बदले और उन्हें गांव लौटना पड़ा। जहां कई लोगों के सपने इस दौर में टूट गए, वहीं प्रिंसी ने गांव को ही अपनी ताकत बना लिया।
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गांव के शांत माहौल में रहकर उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। इंटरनेट और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने खुद को अनुशासित रखा और हर दिन को अपने लक्ष्य के करीब ले जाने में लगा दिया। यह उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल कर यह दिखा दिया कि असफलता अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी की शुरुआत होती है।
ग्राम प्रधान बबलू यादव ने प्रिंसी की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सफलता पूरे गांव के लिए प्रेरणा है। अब यहां की बेटियां भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रही हैं।
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प्रिंसी की इस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास छिपा है। उनके पिता माधव सिंह यादव पुलिस विभाग में अभी औरैया में एएसआई के पद पर तैनात हैं और हमेशा बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और प्रिंसी ने भी इस भरोसे को कभी टूटने नहीं दिया।
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प्रिंसी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। बेहतर मार्गदर्शन के लिए वह कुछ समय दिल्ली भी गईं, लेकिन कोविड के बाद हालात बदले और उन्हें गांव लौटना पड़ा। जहां कई लोगों के सपने इस दौर में टूट गए, वहीं प्रिंसी ने गांव को ही अपनी ताकत बना लिया।
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गांव के शांत माहौल में रहकर उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। इंटरनेट और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने खुद को अनुशासित रखा और हर दिन को अपने लक्ष्य के करीब ले जाने में लगा दिया। यह उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल कर यह दिखा दिया कि असफलता अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी की शुरुआत होती है।
ग्राम प्रधान बबलू यादव ने प्रिंसी की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सफलता पूरे गांव के लिए प्रेरणा है। अब यहां की बेटियां भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रही हैं।