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Jhansi News: स्मार्ट सिटी झांसी में संवारी नहीं जा सकी इतिहास की अनूठी इमारत
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। स्मार्ट सिटी योजना के तहत झांसी में इतिहास की अनूठी इमारत झांसी किले का परकोटा को संवारा नहीं जा सका। जबकि, 990 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। देखरेख के अभाव में ये बुलंद इमारत लगातार दरकती जा रही है। कहीं परकोटा की दीवार ढह गई है, तो कहीं कब्जे का शिकार हो गई है। परकोटे के दरवाजों का जरूर एक साल पहले जीर्णोद्धार किया गया था।
झांसी के किले का निर्माण वर्ष 1613 से 1619 के बीच किया गया था। इसके बाद वर्ष 1755 में पुराने शहर के चारों ओर झांसी को सुरक्षित रखने के लिए मराठा सूबेदार नारोशंकर ने परकोटे का निर्माण कराया था। इस परकोटा की अपनी ही खासियत है। शहर से बाहर आवागमन के लिए जगह-जगह विशाल दरवाजे और खिड़कियां (छोटे दरवाजे) बने हैं। 1857 के संग्राम में ये परकोटा झांसी की ढाल बनाकर खड़ा रहा था। फिरंगी सेनाएं भी इसे नहीं भेद पाई थीं। लेकिन, सरकारी महकमे की अनदेखी के चलते अब ये इमारत अपने वजूद को लेकर संघर्ष कर रही है। इसकी दीवार को तोड़कर कई जगहों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है। दतिया गेट से अलीगोल खिड़की और अलीगोल खिड़की से उनाव गेट तक कई जगहों पर परकोटा पर कब्जा हो गया है।
परकोटे की दीवार को तोड़कर किसी ने मकान तो किसी ने दुकान बना ली है। उनाव गेट से भांडेरी गेट मार्ग पर भी यही स्थिति है। जगह-जगह से इस परकोटा की दीवार खासकर बारिश के दिनों में ढह भी जाती है। वहीं, किले से सैंयर गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी परकोटा काफी जगह पर क्षतिग्रस्त हो गया है। पुराना बस स्टैंड से सैंयर गेट तक जाने वाले परकोटा का काफी हिस्सा तोड़ दिया गया है। अब फिर से बारिश का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में परकोटा के जीर्णोद्धार के लिए जल्द ही सरकारी महकमा कोई योजना नहीं बनाता है तो भविष्य में इसका नामोनिशान मिट सकता है।
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ये दरवाजे और खिड़कियां बनी हैं
परकोटा के चारों तरफ 10 गेट बने हुए हैं। ओरछा गेट, लक्ष्मीगेट गेट, भांडेरी गेट, दतिया गेट, बड़ागांव गेट, उनाव गेट, खंडेराव गेट, सैंयर गेट, चांद दरवाजा और सागर गेट शामिल हैं। छह लघुद्वार यानी खिड़कियां भी हैं। इसमें भैरो खिड़की, सूजे खां खिड़की, आलीगोल खिड़की, गनपत खिड़की, सागर खिड़की आदि शामिल हैं।
ये बोले शहरवासी
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परकोटा इतिहास की अनूठी विरासत है। इसका संरक्षण बहुत जरूरी है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इसको संवारा जा सकता था। - पीके अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएएस।
अगर परकोटा का सही से जीर्णोद्धार कर दिया जाए तो ये पर्यटन के लिहाज से भी अच्छा होगा। परकोटा देखने के लिए भी कई सैलानी झांसी आएंगे। - शानू कंचन।
विदेशों में विरासत को सहेजकर रखा जाता है। जबकि, भारत में ऐसा देखने को नहीं मिलता। झांसी के परकोटा को कब्जामुक्त कराया जाना चाहिए। - डॉ. प्रगति गुप्ता।
वर्जन..
स्मार्ट सिटी के तहत जो बजट मिला था, उससे परकोटे के नौ दरवाजों का एक साल पहले ही जीर्णोद्धार किया गया है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति भी ली गई थी। - मो. कमर, अपर नगर आयुक्त।
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झांसी। स्मार्ट सिटी योजना के तहत झांसी में इतिहास की अनूठी इमारत झांसी किले का परकोटा को संवारा नहीं जा सका। जबकि, 990 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। देखरेख के अभाव में ये बुलंद इमारत लगातार दरकती जा रही है। कहीं परकोटा की दीवार ढह गई है, तो कहीं कब्जे का शिकार हो गई है। परकोटे के दरवाजों का जरूर एक साल पहले जीर्णोद्धार किया गया था।
झांसी के किले का निर्माण वर्ष 1613 से 1619 के बीच किया गया था। इसके बाद वर्ष 1755 में पुराने शहर के चारों ओर झांसी को सुरक्षित रखने के लिए मराठा सूबेदार नारोशंकर ने परकोटे का निर्माण कराया था। इस परकोटा की अपनी ही खासियत है। शहर से बाहर आवागमन के लिए जगह-जगह विशाल दरवाजे और खिड़कियां (छोटे दरवाजे) बने हैं। 1857 के संग्राम में ये परकोटा झांसी की ढाल बनाकर खड़ा रहा था। फिरंगी सेनाएं भी इसे नहीं भेद पाई थीं। लेकिन, सरकारी महकमे की अनदेखी के चलते अब ये इमारत अपने वजूद को लेकर संघर्ष कर रही है। इसकी दीवार को तोड़कर कई जगहों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है। दतिया गेट से अलीगोल खिड़की और अलीगोल खिड़की से उनाव गेट तक कई जगहों पर परकोटा पर कब्जा हो गया है।
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परकोटे की दीवार को तोड़कर किसी ने मकान तो किसी ने दुकान बना ली है। उनाव गेट से भांडेरी गेट मार्ग पर भी यही स्थिति है। जगह-जगह से इस परकोटा की दीवार खासकर बारिश के दिनों में ढह भी जाती है। वहीं, किले से सैंयर गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी परकोटा काफी जगह पर क्षतिग्रस्त हो गया है। पुराना बस स्टैंड से सैंयर गेट तक जाने वाले परकोटा का काफी हिस्सा तोड़ दिया गया है। अब फिर से बारिश का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में परकोटा के जीर्णोद्धार के लिए जल्द ही सरकारी महकमा कोई योजना नहीं बनाता है तो भविष्य में इसका नामोनिशान मिट सकता है।
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ये दरवाजे और खिड़कियां बनी हैं
परकोटा के चारों तरफ 10 गेट बने हुए हैं। ओरछा गेट, लक्ष्मीगेट गेट, भांडेरी गेट, दतिया गेट, बड़ागांव गेट, उनाव गेट, खंडेराव गेट, सैंयर गेट, चांद दरवाजा और सागर गेट शामिल हैं। छह लघुद्वार यानी खिड़कियां भी हैं। इसमें भैरो खिड़की, सूजे खां खिड़की, आलीगोल खिड़की, गनपत खिड़की, सागर खिड़की आदि शामिल हैं।
ये बोले शहरवासी
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परकोटा इतिहास की अनूठी विरासत है। इसका संरक्षण बहुत जरूरी है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इसको संवारा जा सकता था। - पीके अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएएस।
अगर परकोटा का सही से जीर्णोद्धार कर दिया जाए तो ये पर्यटन के लिहाज से भी अच्छा होगा। परकोटा देखने के लिए भी कई सैलानी झांसी आएंगे। - शानू कंचन।
विदेशों में विरासत को सहेजकर रखा जाता है। जबकि, भारत में ऐसा देखने को नहीं मिलता। झांसी के परकोटा को कब्जामुक्त कराया जाना चाहिए। - डॉ. प्रगति गुप्ता।
वर्जन..
स्मार्ट सिटी के तहत जो बजट मिला था, उससे परकोटे के नौ दरवाजों का एक साल पहले ही जीर्णोद्धार किया गया है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति भी ली गई थी। - मो. कमर, अपर नगर आयुक्त।