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बुंदेलखंड के स्टोन क्रशरों पर लगे गिट्टी के ढेर, खदानें भी पड़ी हैं बंद

Mon, 27 Apr 2020 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2020 12:48 AM IST
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unemployement rate increase
unemployement rate increase - फोटो : REPORTERS
झांसी। लॉकडाउन के चलते बुंदेलखंड के स्टोन क्रशरों पर ताले लगे हैं। हालांकि सरकार ने इन्हें शुरू करने की अनुमति दे दी है लेकिन अभी गिट्टी की मांग न होने और खदानों में खनन के लिए विस्फोटक की कमी के कारण यह उद्योग स्टार्ट नहीं हो पा रहा है। क्योंकि अभी रास्ते बंद हैं और आने-जाने का कोई साधन भी नहीं, लिहाजा मजदूर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। माना जा रहा है कि क्रशर शुरू होने में अभी समय लगेगा।
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बुंदेलखंड के क्रशर पर जो गिट्टी तैयार होती है उसमें 40 एमएम और 20 एमएम वाली गिट्टी का प्रयोग सड़कों के निर्माण में ही होता है। जबकि दस एमएम और छह एमएम वाली भवन निर्माण में इस्तेमाल होती है। यहां डस्ट भी तैयार होती है जिसे बालू के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन मौजूदा समय में न तो सड़कों का निर्माण गति पकड़ सका है और भवन निर्माण का काम तो बंद ही है। झांसी में भी केवल 20 क्रशर ही शुरू हो सके हैं। तमाम खदानें भी बंद हैं जिससे काम नहीं हो पा रहा है।
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मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा का कहना है कि क्रशर उद्योग को लॉकडाउन से मुक्त कर दिया गया है। ताकि विकास की परियोजनाओं को शुरू कराया जा सके और मजदूरों को रोजगार मिले। लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का सभी जगह पालन कराया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मंडल के सभी क्रशर जल्द शुरू करा दिए जाएंगे।
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500 से भी ज्यादा खदानें बंद हैं, झांसी में ही 150 बंद
झांसी। अगर पत्थर की खदानों की बात करें तो झांसी, महोबा, चित्रकूट और सोनभद्र में हैं। इन्हीं जिलों में क्रशर भी सर्वाधिक हैं। लाखों मजदूरों का परिवार पत्थरों के इस कारोबार से चलता है। लेकिन अब सैकड़ों खदान बंद पड़ी हैं। स्टोन क्रशर एसोसिएशन झांसी के उपाध्यक्ष अशोक कुमार आनंदानी बताते हैं कि मौजूदा पालिसी की वजह से खदानें बंद हैं। पहले लीज की व्यवस्था थी। लीज खत्म हो जाने पर रिन्यूवल भी हो जाता करता था। लेकिन अब ई टेंडरिंग के कारण स्थिति गड़बड़ाई है। खनन की मात्रा भी निर्धारित कर दी। झांसी में ही 150 खदानें बंद हैं। जबकि प्रदेश में बंद खदानों की संख्या 500 से भी ज्यादा होगी। क्रशर एसोसिएशन झांसी के उपाध्यक्ष का कहना है कि कोरोना के कारण यह उद्योग भी प्रभावित है लिहाजा सरकार को चाहिए कि जिन खदानों के पट्टे खत्म हो रहे हैं उनका एक साल से पांच साल तक का एक्सटेंशन कर दिया जाए। ताकि लोग कारोबार कर सकें। क्योंकि लॉकडाउन में इस कारोबार को भारी नुकसान है। वहीं सरकार अपनी खनिज नीति में बदलाव करके दोबारा लागू करे तभी यह उद्योग जीवित रह सकेगा।
खनन के लिए विस्फोटक भी नहीं
झांसी। फिलहाल खदानों में पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोटक भी नहीं है। लिहाजा काम शुरू न होने की एक बड़ी वजह यह भी है। क्योंकि जब तक विस्फोटक नहीं आएगा खनन शुरू नहीं हो सकेगा। खदानों के पट्टा धारकों का कहना है कि जब तक लॉकडाउन पूरी तरह से हट नहीं जाएगा क्रशर को चला पाना आसान नहीं होगा। क्योंकि इन हालातों में न तो विस्फोटक मिल रहा है और न ही लाने के हालात हैं। सभी जगह सीमाएं सील हैं।
एक क्रशर पर काम करते 15 से 20 मजदूर, बुंदेलखंड में 600 क्रशर
झांसी। अगर महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर और झांसी की बात करें तो इन जिलों में करीब 600 स्टोन क्रशर हैं। जबकि इन जिलों के आसपास बसे मध्यप्रदेश के जनपदों में संचालित होने वाले क्रशर अलग हैं। 15 से 20 मजदूर तक क्रशर पर काम करते हैं। लॉकडाउन के चलते क्रशर बंद हैं लिहाजा सभी मजदूर भी बेरोजगार हैं। क्रशर संचालक हिरदेश गुर्जर का कहना है कि बिहार की लेबर भी बहुत काम करती है। सब घरों को चले गए हैं। अब वह आएं तभी काम शुरू हो सकेगा। क्योंकि अगर उनसे कहो तो सभी का एक ही सवाल होता है कि वह आएं कैसे।
1500 से ज्यादा ट्रक लगे रहते क्रशर से गिट्टी की सप्लाई करने में
झांसी। क्रेशर से गिट्टी सप्लाई करने में बुंदेलखंड में 1500 ट्रक लगे हैं। यह ट्रक गिट्टी लेकर कानपुर और लखनऊ जाते हैं। मगर इस समय यह ट्रक भी बंद हैं। इन ट्रकों के चालक और क्लीनर के सामने भी बड़ा संकट आ गया है। ट्रक चालक प्रमोद कुमार ने बताया कि जब काम ही नहीं मिल रहा तो मजदूरी कहां से आएगी। चालक के साथ क्लीनर की भी यही स्थिति है। यह लोग अपना ट्रक क्रशर पर खड़ा करके गांवों को चले गए हैं।

हर रोज 10 हजार ट्रक गिट्टी का होता व्यापार
झांसी। बुंदेलखंड से हर रोज 10 हजार ट्रक गिट्टी का कारोबार होता है। अकेले झांसी से ही सामान्य दिनों में 1500 ट्रक गिट्टी सप्लाई होती है। सरकार को भी मोटी रॉयल्टी मिलती है। एक ट्रक से रायल्टी और जीएसटी मिलाकर 4500 रुपये सरकार के खजाने में प्रति ट्रक के हिसाब से जाते हैं।
गिट्टी का भावन 100 रुपये से लेकर 400 रुपये टन तक
जिलावार खदानें
झांसी-90
टीकमगढ़-35
दतिया-20
महोबा-250
सोनभद्र-150
चित्रकूट-70
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