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उधारी चुकाने के लिए रची थी खुद के अपहरण की साजिश

Sun, 06 Oct 2019 07:27 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 07:27 PM IST
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udhari chukane ke liye rachi thi khud ke apharn ki sajish
ओरछा पुलिस की गिरफ्तर में खुद की अपहरण की साजिश रचाने का वाला आरोपी। व साथ में है दो अन्य आरोपी। - फोटो : DEHAT
उधारी चुकाने के लिए रची थी खुद के अपहरण की साजिश
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ओरछा। पर्यटन नगरी ओरछा में हुई अपहरण की वारदात के बाद पुलिस परेशान हो उठी थी। सूचना पर निवाड़ी एसपी, एएसपी के साथ ही पुलिस अमला इस गुत्थी को सुलझाने में लग गया था। लेकिन जब मामला खुला तो सब हैरत में रह गए। यहां पर अपहृत ने उधारी के रुपये चुकाने से बचने के लिए खुद ही अपहरण करने की साजिश रची थी। पुलिस ने इस घटना में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हैं।
ओरछा के गंज मोहल्ला निवासी पुष्पेंद्र पुत्र बलवान यादव का 28 सितंबर को अपहरण हो गया था। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने 3 अक्टूबर को पुष्पेंद्र के बड़े भाई नरेंद्र को फोन कर 5 लाख रुपये की फिरौती की मांग की थी। पहले तो पुष्पेंद्र अपने भाई को छुड़ाने के लिए रकम की व्यवस्था करता रहा, लेकिन जब व्यवस्था होते न दिखी तो शनिवार को उसने ओरछा पुलिस से इसकी शिकायत की। गिरफ्तार हुए आरोपी अपहरण की शिकायत एवं फिरौती की मांग का फोन आने की जानकारी होते ही निवाड़ी पुलिस ने अफसर इस गुत्थी को सुलझाने में लग गए। निवाड़ी एएसपी एसके जैन ने बताया कि साइबर सेल की मदद से फिरौती को आने वाले फोन कॉल को ट्रेस किया और इनकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के ग्राम सैंयर बबीना रेंज एवं सुकवां-ढुकुवां डैम के पास मिली। फिरौती की मांग के बाद फोन कॉल बंद होने से पुलिस की टीमें इन क्षेत्रों में भेजी गई। वहीं जब रात के समय फिर से फोन आया तो उसकी लोकेशन आर्मी रेंज सैंयर जाते हुए एक ढाबा के पास मिली। इस पर पुलिस ने तत्काल सभी टीमों को यहां के लिए रवाना कर दिया। पुलिस ने ढाबा के सामने ग्राम बिजौली से आरोपी मोनू पुत्र कालीचरण यादव निवासी सैंयर एवं नीतेश पुत्र बाबूलाल यादव निवासी पहगुंवा को गिरफ्तार कर लिया गया। इनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अपहृत पुष्पेंद्र यादव को भी बरामद कर लिया। रविवार को मामले का खुलासा करते हुए एएसपी एसके जैन ने बताया कि यह पूरी कहानी अपहृत पुष्पेंद्र एवं उसके दोस्त मोनू यादव ने रची थी। पुष्पेंद्र ने अपने दोस्त को कार खरीदने के लिए किसी से ढाई लाख रुपये दिलाए थे। कार खरीदने के बाद उसके दोस्त ने रुपये देने से इंकार कर दिया था। वहीं उधारी देने वाले उसे परेशान कर रहे थे। पुष्पेंद्र ने उधारी चुकाने के लिए हर माह 10 हजार रुपये देने को कहा था। लेकिन वह खुद 8 हजार रुपये की नौकरी करता था। ऐसे में उधारी का पैसा नहीं चुका पा रहा था। उसने जब यह समस्या अपने दोस्त मोनू को बताई तो दोनों ने अपहरण की योजना बनाई। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
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इस घटना का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव के निर्देश पर एएसपी के नेतृत्व में एक टीम गठित की। जिसमें एसडीओपी अशोक घनघोरिया, निरीक्षक दीपेंद्र सिंह कुशवाह, नगर निरीक्षक नरेंद्र त्रिपाठी, एएसआई लीलाधर तिवारी, प्रधान आरक्षक करन सिंह बुंदेला, साइबर सेल से रविंद्र यादव, विशाल सोनी व इकबाल आदि की भूमिका सराहनीय रही।
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