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एक नहीं दो फर्जी मार्कशीट बनी, बीयू से बाहर ले जाकर चार्ट में हुई कटिंग
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्र की एक नहीं बल्कि दो फर्जी मार्कशीट बनाई गई। इसके अलावा चार्ट को बीयू से बाहर ले जाकर कटिंग की गई। सत्यापन के दौरान मार्कशीट में श्रेणी की जगह पास लिखा होने से मामला पकड़ में आया।
बताया गया कि 1998 से बीकेडी से लॉ करने वाले छात्र ने अंतिम वर्ष की फर्जी मार्कशीट इसी साल मार्च से जून के बीच में बनाया गया। कमेटी की जांच में ये बात उजागर हुई। जब मार्कशीट बनती है तो उसमें तिथि भी दर्ज हो जाती है। कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि चार्ट में कटिंग भी बीयू से बाहर ले जाकर की गई, क्योंकि चार्ट में ऊपर लेमिनेशन होता है। बीयू में दोबारा लेमिनेशन चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाहर ही चार्ट में कटिंग के बाद लेमिनेशन कराकर कर्मचारियों द्वारा दोबारा अभिलेख विभाग में रख दिया गया। उन्होंने बताया कि जांच में ये भी सामने आया है कि छात्र की एक नहीं बल्कि दो फर्जी मार्कशीट बनाई गई। पहले मार्कशीट में कर्मचारियों ने सिर्फ पास लिख दिया था। जबकि, मार्कशीट में श्रेणी लिखी होनी चाहिए। इसके आधार पर छात्र को डिग्री भी जारी हो गई। बाद में जब कर्मचारियों को इसका अहसास हुआ तब उन्होंने उसी रोलनंबर की दूसरी मार्कशीट श्रेणी लिखकर जारी कर दी। सत्यापन के दौरान पास की मार्कशीट लगी होने पर मामला प्रकाश में आ गया।
उन्होंने कहा कि ये मामला बेहद गंभीर है। अब फाइनल जांच समिति का गठन हो गया है। समिति से जल्द जांच कराकर आरोपी कर्मचारियों पर दोष सिद्ध होने के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बताया गया कि 1998 से बीकेडी से लॉ करने वाले छात्र ने अंतिम वर्ष की फर्जी मार्कशीट इसी साल मार्च से जून के बीच में बनाया गया। कमेटी की जांच में ये बात उजागर हुई। जब मार्कशीट बनती है तो उसमें तिथि भी दर्ज हो जाती है। कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि चार्ट में कटिंग भी बीयू से बाहर ले जाकर की गई, क्योंकि चार्ट में ऊपर लेमिनेशन होता है। बीयू में दोबारा लेमिनेशन चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाहर ही चार्ट में कटिंग के बाद लेमिनेशन कराकर कर्मचारियों द्वारा दोबारा अभिलेख विभाग में रख दिया गया। उन्होंने बताया कि जांच में ये भी सामने आया है कि छात्र की एक नहीं बल्कि दो फर्जी मार्कशीट बनाई गई। पहले मार्कशीट में कर्मचारियों ने सिर्फ पास लिख दिया था। जबकि, मार्कशीट में श्रेणी लिखी होनी चाहिए। इसके आधार पर छात्र को डिग्री भी जारी हो गई। बाद में जब कर्मचारियों को इसका अहसास हुआ तब उन्होंने उसी रोलनंबर की दूसरी मार्कशीट श्रेणी लिखकर जारी कर दी। सत्यापन के दौरान पास की मार्कशीट लगी होने पर मामला प्रकाश में आ गया।
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उन्होंने कहा कि ये मामला बेहद गंभीर है। अब फाइनल जांच समिति का गठन हो गया है। समिति से जल्द जांच कराकर आरोपी कर्मचारियों पर दोष सिद्ध होने के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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