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दो दिन के दौरे में विधायकों की थाह ले गए योगी

Fri, 12 Mar 2021 01:46 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 01:46 AM IST
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Two days thoura CM khow every MLA
झांसी। दो दिन में बुंदेलखंड के छह जिलों का दौरा कर जनता को विकास का संदेश देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्षेत्र के विधायकों की कार्यशैली और जनता के बीच उनकी छवि की थाह भी ले गए। दरअसल उन्हें क्षेत्र के कुछ विधायकों और नेताओं की शह पर खनन, सट्टा व अन्य अवैध कारोबार के फलने फूलने की शिकायत मिल रही थीं। यह भी इनपुट था कि बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर बंपर जीत से अति उत्साहित कई भाजपा विधायकों ने जनता से दूरी बना ली है। यही नहीं, पुलिस-प्रशासन के कामकाज में भी कुछ माननीय हस्तक्षेप करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस आकलन के बाद अगले विधानसभा चुनाव में कुछ विधायकों के टिकट कटने के आसार हैं।
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2022 विधानसभा चुनाव के लिए मात्र एक साल का समय रह गया है। पिछले चुनाव में 19 सीट दिलाने वाले बुंदेलखंड में पार्टी को लेकर सकारात्मक माहौल नहीं है। देश में किसानों का आंदोलन गरमाया हुआ है। बुंदेलखंड में किसानों की आत्महत्या, आर्थिक तंगी और सिंचाई व पीने के पानी की कमी लगातार चुनौती बने हुए हैं। किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में सूखा और किसानों का मुद्दा उठा कर विरोधी दल भाजपा की जीत का ग्राफ बदल सकते हैं। यह विधानसभा चुनाव के साथ ही तात्कालिक रूप से पंचायत चुनाव में भी पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है।
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यही नहीं, राजस्व और विकास के मानकों पर भी क्षेत्र पिछड़ा हुआ ही चल रहा है। शासन के प्रोत्साहन के बावजूद चार साल में संतोषजनक परिणाम नहीं मिले हैं। कागजों में आंकड़े कुछ भी चल रहे हों न तो बहुत उद्योग बढ़े और न राजस्व। मजदूरों का पलायन बदस्तूर जारी है। कोरोना की पाबंदी हटते ही मजदूर दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, पंजाब को सरपट भागे। इसका एक प्रमुख कारण मनरेगा के तहत पर्याप्त काम न मिलना और किए गए काम का भुगतान न होना भी है।
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एक-दो विधायकों को छोड़ दें तो किसी विधायक ने शासन को लोगों की परेशानियों से अवगत नहीं कराया। इससे योगी को अधिकारियों और विधायकों के बीच गठजोड़ की भी शंका हुई। लिहाजा बुंदेलखंड दौरे के साथ ही सीएम ने विधायकों की कार्यशैली की हकीकत जानने की योजना पहले ही तैयार कर ली थी। उन्होंने तीन स्तर पर जानकारी हासिल की। पहले स्तर पर संघ की गोपनीय टीम, जो समय-समय पर उन्हें अपना फीडबैक दे रही थी दूसरी भाजपा के ही वरिष्ठ और विश्वसनीय नेताआें का दल और तीसरा शासन के चुनिंदा ब्यूरोक्रेट्स। तीन जगह से जानकारी हासिल करने के पीछे मुख्यमंत्री की मंशा थी कि बुंदेलखंड का आईना सामने आ जाएगा। मजे की बात यह है कि दो दिन साथ रहे माननीयों को पता भी नहीं चला कि कब सीएम ने उनका सच जान लिया है। उन्होंने क्षेत्र में तैनात वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से भी कुछ खास बात की।
अफसर हमारी सुनते नहीं हैं, रटते रहे विधायक
विधायक भी समझ रहे हैं कि क्षेत्र में उनकी सक्रियता न होने की रिपोर्ट संगठन और शासन तक लगातार पहुंच रही है। इसलिए संगठन पदाधिकारी, प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री से वे यही रोना रोते रहते हैं कि अफसर उनकी सुन नहीं रहे। सूत्रों के अनुसार सीएम ने इस पर सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिधियों को यह शोभा नहीं देता। जनप्रतिनिधि की किसी भी जायज मांग को अफसर लगातार कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं। अगर ऐसे कुछ अड़ियल अफसर हैं तो तथ्यों के साथ उनकी शिकायत दी जाए, जरूर कार्रवाई होगी। लेकिन विधायकों को अपना फर्ज निभाना होगा।

जनता का दुख-दर्द भूले
निजाम बदल गया। पिछली सरकार में शासन-प्रशासन के बड़े नाम बुंदेलखंड में खनन घोटाले में घिर गए। जांच चल रही है। इसके बाद भी अवैध खनन के धंधे में रसूखदार अभी भी चांदी काट रहे हैं। यह सब सरकार के राजस्व के नुकसान की कीमत पर हो रहा है। यही हाल क्षेत्र में सट्टा कारोबार को लेकर है। कुछ विधायकों और उनके चहेतों के नाम इन धंधों में उछल रहे हैं। खुद जीएसटी विभाग के सूत्रों का कहना है कि खनन से पर्याप्त जीएसटी मिल सकता है लेकिन माननीयों की संलिप्तता के कारण न तो पुलिस, प्रशासन कोई कार्रवाई कर पाता है और न राजस्व की वसूली हो पाती है। माननीय जनता के दुख, दर्द भूलकर अपने हित साध रहे हैं।
इन मुद्दों पर हैं खामोश
- क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत, कई जगह खरीदकर पीना पड़ रहा।
- सिंचाई के लिए भी नहीं हैं पर्याप्त संसाधन।
- उद्योगों की कमी, युवाआें का बदस्तूर पलायन जारी।
- चरमराई हुई है विद्युत आपूर्ति, कई इलाके आपूर्ति से वंचित।
- क्षेत्र में कुपोषण बड़ी चुनौती, सरकार नहीं देती ध्यान।
- धड़ल्ले से होता है लिंग परीक्षण। रोकथाम की नहीं उठती आवाज।
- सुकवां-ढुकवां समेत कई इलाकों में पुल बह जाने पर लोगों और सामान पार कराते हैं मल्लाह।
- अभी तक झांसी मंडल मुख्यालय में भी कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं।
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