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दो करोड़ की स्ट्रीट लाइट खरीद में गड़बड़झाला
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दो करोड़ की स्ट्रीट लाइट खरीद में गड़बड़झाला
झांसी। नगर निगम शहर में करीब दो हजार स्ट्रीट लाइट लगवाने जा रहा है लेकिन, इसकी आड़ में निगम अफसरों ने चहेतों को फायदा पहुंचाने का पूरा इंतजाम कर लिया है। चहेतों की खातिर पीडब्ल्यूडी मानकों को ताक पर रखने से भी गुरेज नहीं किया गया। अमूमन अच्छी गुणवत्ता की खातिर तमाम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा कराने की कोशिश होती है लेकिन, इसके उलट निगम प्रशासन ने टेंडर सिर्फ एक कंपनी के लिए ही खोला।
पूरे शहर में 3800 स्ट्रीट लाइट प्वांइट हैं। इनमें से पचास फीसदी लाइटें एलईडी में बदली जा चुकीं जबकि 1905 स्ट्रीट लाइटों को बदलने का काम बाकी है। अब नए वित्तीय वर्ष में नगर निगम करीब 2 करोड़ रुपये से यह कार्य कराने जा रहा लेकिन, सूत्रों के मुताबिक चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर से पहले ही कंपनी चयनित कर ली गई। टेंडर में निगम ने जानी-मानी कंपनियों को दरकिनार करके सिर्फ एक इसी कंपनी विशेष की फिटिंग ही मांगी है। इस वजह से दूसरी जानी-मानी कंपनियों के दरवाजे बंद हो गए। इसका फायदा उठाते हुए निगम अफसरों की पंसदीदा कंपनी ने फिटिंग के दाम भी सामान्य से करीब बीस फीसदी तक बढ़ा दिए।
सूत्रों का कहना है 90 वॉट की ब्रांडेड फिटिंग 8000 रुपये, 120 वॉट की 10000 रुपये तक आती है लेकिन, जिसके नाम की फिटिंग मंगाई गई उसके दाम इससे काफी अधिक हैं जबकि बड़ी खरीद होने पर कपंनियां दामों में कमी कर देती हैं। झांसी में 60 वॉट की एलईडी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा जबकि कई निगमों बिजली बिल में कमी लाने के लिए इनका इस्तेमाल शुरू किया है। वहीं, महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि इसकी शर्तों के बारे में विस्तार से जांच कराई जाएगी।
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कहां गई पांच साल की वारंटी
नई एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने वाली कंपनी पांच साल तक रखरखाव का भी जिम्मा लेती है लेकिन, उसके बावजूद नई लगने वाली स्ट्रीट लाइटों में खराब लाइटों को भी शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे कि आखिर जब मरम्मत कराने का जिम्मा कंपनियों पर था, तब उनसे मरम्मत नहीं कराई गई।
अंधेरे में डूबी रहती हैं कानपुर रोड तिराहे समेत कई सड़कें
पूरे शहर में स्ट्रीट लाइट ठीक कराने के नाम पर नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर चुका लेकिन, अभी भी शहर की दर्जनों सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। ग्वालियर रोड में जीआईसी स्कूल के आसपास, कानपुर रोड तिराहे से लेकर भगवंतपुरा, उनाव बालाजी रोड समेत तमाम महत्वपूर्ण सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी ग्वालियर रोड पर स्ट्रीट लाइट बुझी होने से होती है। ग्वालियर से जुड़ा होने के नाते यहां देर-रात को भारी ट्रैफिक रहता है लेकिन, स्ट्रीट लाइट अकसर बुझी रहती है। लाइट न जलने से यहां दुर्घटनाओं की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। यही हाल मोहल्लों के भीतरी हिस्सों का भी है। यहां शुरुआत में एलईडी लगवाई गईं लेकिन, इनमें भी ज्यादातर खराब पड़ी हुई हैं।
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झांसी। नगर निगम शहर में करीब दो हजार स्ट्रीट लाइट लगवाने जा रहा है लेकिन, इसकी आड़ में निगम अफसरों ने चहेतों को फायदा पहुंचाने का पूरा इंतजाम कर लिया है। चहेतों की खातिर पीडब्ल्यूडी मानकों को ताक पर रखने से भी गुरेज नहीं किया गया। अमूमन अच्छी गुणवत्ता की खातिर तमाम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा कराने की कोशिश होती है लेकिन, इसके उलट निगम प्रशासन ने टेंडर सिर्फ एक कंपनी के लिए ही खोला।
पूरे शहर में 3800 स्ट्रीट लाइट प्वांइट हैं। इनमें से पचास फीसदी लाइटें एलईडी में बदली जा चुकीं जबकि 1905 स्ट्रीट लाइटों को बदलने का काम बाकी है। अब नए वित्तीय वर्ष में नगर निगम करीब 2 करोड़ रुपये से यह कार्य कराने जा रहा लेकिन, सूत्रों के मुताबिक चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर से पहले ही कंपनी चयनित कर ली गई। टेंडर में निगम ने जानी-मानी कंपनियों को दरकिनार करके सिर्फ एक इसी कंपनी विशेष की फिटिंग ही मांगी है। इस वजह से दूसरी जानी-मानी कंपनियों के दरवाजे बंद हो गए। इसका फायदा उठाते हुए निगम अफसरों की पंसदीदा कंपनी ने फिटिंग के दाम भी सामान्य से करीब बीस फीसदी तक बढ़ा दिए।
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सूत्रों का कहना है 90 वॉट की ब्रांडेड फिटिंग 8000 रुपये, 120 वॉट की 10000 रुपये तक आती है लेकिन, जिसके नाम की फिटिंग मंगाई गई उसके दाम इससे काफी अधिक हैं जबकि बड़ी खरीद होने पर कपंनियां दामों में कमी कर देती हैं। झांसी में 60 वॉट की एलईडी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा जबकि कई निगमों बिजली बिल में कमी लाने के लिए इनका इस्तेमाल शुरू किया है। वहीं, महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि इसकी शर्तों के बारे में विस्तार से जांच कराई जाएगी।
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कहां गई पांच साल की वारंटी
नई एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने वाली कंपनी पांच साल तक रखरखाव का भी जिम्मा लेती है लेकिन, उसके बावजूद नई लगने वाली स्ट्रीट लाइटों में खराब लाइटों को भी शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे कि आखिर जब मरम्मत कराने का जिम्मा कंपनियों पर था, तब उनसे मरम्मत नहीं कराई गई।
अंधेरे में डूबी रहती हैं कानपुर रोड तिराहे समेत कई सड़कें
पूरे शहर में स्ट्रीट लाइट ठीक कराने के नाम पर नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर चुका लेकिन, अभी भी शहर की दर्जनों सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। ग्वालियर रोड में जीआईसी स्कूल के आसपास, कानपुर रोड तिराहे से लेकर भगवंतपुरा, उनाव बालाजी रोड समेत तमाम महत्वपूर्ण सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी ग्वालियर रोड पर स्ट्रीट लाइट बुझी होने से होती है। ग्वालियर से जुड़ा होने के नाते यहां देर-रात को भारी ट्रैफिक रहता है लेकिन, स्ट्रीट लाइट अकसर बुझी रहती है। लाइट न जलने से यहां दुर्घटनाओं की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। यही हाल मोहल्लों के भीतरी हिस्सों का भी है। यहां शुरुआत में एलईडी लगवाई गईं लेकिन, इनमें भी ज्यादातर खराब पड़ी हुई हैं।