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तेज दर्द से रात में सो नहीं पाते हैं बीस हजार लोग
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झांसी। जिले में करीब बीस हजार लोग लंबे समय से दर्द से परेशान हैं। ये लोग रात में सही से सो तक नहीं पाते हैं। इनमें से 40 प्रतिशत से ज्यादा मरीज को तो कमर दर्द बना रहता है, जिन्हें स्लिप डिस्क, साइटिका, रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में दिक्कत, लंबर स्पॉन्डिलाइटिस आदि की समस्या होती है। करीब दस हजार मरीज तो पिछले एक साल में मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं जबकि इतनी ही संख्या उन मरीजों की है जो प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
कई लोग कसरत करने के लिए जिम जाते हैं और शुरूआत में ही भारी वजन उठाने लगते हैं। इस कारण उन्हें स्लिप डिस्क या फिर साइटिका का दर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा फास्ट फूड का चलन बढ़ जाने से लोग खाने में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं लेते हैं। इस कारण उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। मेडिकल कॉलेज की न्यूरो सर्जरी, मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक और पेन क्लीनिक की ओपीडी में ऐसे मरीज दिखाने के लिए आते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य एवं दर्द निवारण विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि अस्पताल में दर्द से परेशान करीब दस हजार मरीज पिछले एक साल में अलग-अलग ओपीडी में दिखाने के लिए आ चुके हैं। जबकि, इतने ही मरीजों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा होगा। उन्होंने बताया कि दवाएं लेने के साथ-साथ जो मरीज नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और बढ़ा हुआ वजन कम कर लेते हैं, उन्हें ही दर्द से राहत मिल पाती है। ऐसे मरीजों की संख्या पांच से दस प्रतिशत होती है। बाकी, 90 फीसदी रोगी जीवनशैली में बदलाव की जगह डॉक्टर बदलते रहते हैं। इस कारण उन्हें जीवन भर दर्द से जूझना पड़ता है। पेन क्लीनिक की चिकित्सक डॉ. छवि सहगल ने बताया कि करीब साढ़े तीन हजार मरीज क्लीनिक में पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से करीब 1500 यानी 42 प्रतिशत रोगियों ने कमर दर्द की परेशानी बताई है। लगभग 1200 मरीज गठिया के दर्द की समस्या लेकर आए हैं। 300 मरीजों ने कंधे के दर्द का इलाज कराया है। 400 रोगी टेनिस एल्बो के अलावा विभिन्न प्रकार की नसों के दर्द के आए हैं।
हील वाली सैंडल से हो रहा पैर के तलवे में दर्द
झांसी। इन दिनों युवतियां हील वाली सैंडल भी खूब पहनती हैं। इस सैंडल की वजह से कई युवतियों के पैर के तलवे में दर्द हो जा रहा है। पेन क्लीनिक व हड्डी की ओपीडी में पिछले एक साल में करीब 200 रोगी तो इसी समस्या के साथ पहुंचे हैं।
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कई लोग कसरत करने के लिए जिम जाते हैं और शुरूआत में ही भारी वजन उठाने लगते हैं। इस कारण उन्हें स्लिप डिस्क या फिर साइटिका का दर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा फास्ट फूड का चलन बढ़ जाने से लोग खाने में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं लेते हैं। इस कारण उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। मेडिकल कॉलेज की न्यूरो सर्जरी, मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक और पेन क्लीनिक की ओपीडी में ऐसे मरीज दिखाने के लिए आते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य एवं दर्द निवारण विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि अस्पताल में दर्द से परेशान करीब दस हजार मरीज पिछले एक साल में अलग-अलग ओपीडी में दिखाने के लिए आ चुके हैं। जबकि, इतने ही मरीजों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा होगा। उन्होंने बताया कि दवाएं लेने के साथ-साथ जो मरीज नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और बढ़ा हुआ वजन कम कर लेते हैं, उन्हें ही दर्द से राहत मिल पाती है। ऐसे मरीजों की संख्या पांच से दस प्रतिशत होती है। बाकी, 90 फीसदी रोगी जीवनशैली में बदलाव की जगह डॉक्टर बदलते रहते हैं। इस कारण उन्हें जीवन भर दर्द से जूझना पड़ता है। पेन क्लीनिक की चिकित्सक डॉ. छवि सहगल ने बताया कि करीब साढ़े तीन हजार मरीज क्लीनिक में पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से करीब 1500 यानी 42 प्रतिशत रोगियों ने कमर दर्द की परेशानी बताई है। लगभग 1200 मरीज गठिया के दर्द की समस्या लेकर आए हैं। 300 मरीजों ने कंधे के दर्द का इलाज कराया है। 400 रोगी टेनिस एल्बो के अलावा विभिन्न प्रकार की नसों के दर्द के आए हैं।
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हील वाली सैंडल से हो रहा पैर के तलवे में दर्द
झांसी। इन दिनों युवतियां हील वाली सैंडल भी खूब पहनती हैं। इस सैंडल की वजह से कई युवतियों के पैर के तलवे में दर्द हो जा रहा है। पेन क्लीनिक व हड्डी की ओपीडी में पिछले एक साल में करीब 200 रोगी तो इसी समस्या के साथ पहुंचे हैं।
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