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सवा पांच करोड़ अघोषित आय स्वीकारी
ब्यूरो
Updated Wed, 23 Dec 2015 01:33 AM IST
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झांसी। आयकर विभाग के सर्वे के उपरांत बिल्डर व सिविल ठेकेदार ने 5.35 करोड़ की अघोषित आय स्वीकार कर ली है। जबकि बोरी बनाने वाली कंपनी के संचालक के न होने के कारण अभी प्रपत्रों की जांच चल रही है।
आयकर विभाग की टीमों ने सोमवार को ग्वालियर रोड स्थित सीमेंट की बोरी बनाने वाली हैंकुल पैकविल प्राइवेट लिमिटेड, जीवन शाह के निकट स्थित वीएसएस हाउसिंग आफिस व पारीछा की आशीष इंटरप्राइजेज का सर्वे किया था। सर्वे कार्य मंगलवार की सुबह पूरा हो सका।
जांच के दौरान मिले प्रपत्रों के आधार पर वीएसएस हाउसिंह ने 4.25 करोड़ व आशीष इंटरप्राइजेज ने 1.10 करोड़ की अघोषित आय स्वीकार कर ली। आयकर टीम ने हैंकुल पैकविल प्राइवेट लिमिटेड के संचालक के दिल्ली में होने के कारण कारखाने के आफिस से अभिलेखों को जब्त कर लिया था।
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बुधवार को संचालक के कार्यालय आने पर अघोषित आय की गणना होेगी। स्वीकार की गई अघोषित आय पर संबंधित आयकर दाताओं को 30.9 प्रतिशत टैक्स जमा करना होगा।
मालूम हो कि, आयकर विभाग कंपनी संचालकों से हर सत्र में चार किस्तों में (पंद्रह जून, पंद्रह सितंबर, पंद्रह दिसंबर व पंद्रह मार्च) अग्रिम एडवांस टैक्स जमा कराता है। इसी तरह गैर कंपनियों को तीन किस्तों (पंद्रह सितंबर, पंद्रह दिसंबर व पंद्रह मार्च) में अग्रिम टैक्स चुकाना पड़ता है। अग्रिम एडवांस टैक्स न जमा करने के क्रम में ही विभाग द्वारा सर्वे किए जा रहे हैं।
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आयकर विभाग की टीमों ने सोमवार को ग्वालियर रोड स्थित सीमेंट की बोरी बनाने वाली हैंकुल पैकविल प्राइवेट लिमिटेड, जीवन शाह के निकट स्थित वीएसएस हाउसिंग आफिस व पारीछा की आशीष इंटरप्राइजेज का सर्वे किया था। सर्वे कार्य मंगलवार की सुबह पूरा हो सका।
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जांच के दौरान मिले प्रपत्रों के आधार पर वीएसएस हाउसिंह ने 4.25 करोड़ व आशीष इंटरप्राइजेज ने 1.10 करोड़ की अघोषित आय स्वीकार कर ली। आयकर टीम ने हैंकुल पैकविल प्राइवेट लिमिटेड के संचालक के दिल्ली में होने के कारण कारखाने के आफिस से अभिलेखों को जब्त कर लिया था।
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बुधवार को संचालक के कार्यालय आने पर अघोषित आय की गणना होेगी। स्वीकार की गई अघोषित आय पर संबंधित आयकर दाताओं को 30.9 प्रतिशत टैक्स जमा करना होगा।
मालूम हो कि, आयकर विभाग कंपनी संचालकों से हर सत्र में चार किस्तों में (पंद्रह जून, पंद्रह सितंबर, पंद्रह दिसंबर व पंद्रह मार्च) अग्रिम एडवांस टैक्स जमा कराता है। इसी तरह गैर कंपनियों को तीन किस्तों (पंद्रह सितंबर, पंद्रह दिसंबर व पंद्रह मार्च) में अग्रिम टैक्स चुकाना पड़ता है। अग्रिम एडवांस टैक्स न जमा करने के क्रम में ही विभाग द्वारा सर्वे किए जा रहे हैं।