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Jhansi News: हल्दी के अर्क से दूर होगा प्रसूताओं का दर्द, परीक्षण मई से
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हल्दी के अर्क से ऑपरेशन से डिलीवरी करावनी वाली प्रसूताओं का दर्द दूर करेंगे। मई से शुरू होने वाले ट्रायल के दौरान 120 प्रसूताओं को दवाओं के साथ करक्यूमिन अर्क का भी सेवन कराया जाएगा। फिर स्वस्थ होने के समय पर एनेस्थीसिया और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टर अध्ययन करेंगे। मेडिकल कॉलेज की एथिकल कमेटी (नैतिक समिति) से क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी भी मिल गई है। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि ट्रायल के दौरान ऑपरेशन से डिलीवरी करवाने वाली 240 प्रसूताओं के दो ग्रुप बनाए जाएंगे। एक ग्रुप की 120 प्रसूताओं को नियमित उपचार के दौरान दी जाने वाली दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक दी जाएंगी। जबकि, दूसरे ग्रुप की 120 प्रसूताओं को इन दवाओं के साथ-साथ हल्दी को चमकीला पीला रंग देने वाले करक्यूमिन अर्क का भी सेवन कराया जाएगा। फिर अध्ययन किया जाएगा कि नियमित इलाज के बजाय करक्यूमिन अर्क का सेवन करने वाली प्रसूताओं के ऑपरेशन के घाव जल्दी भरे या नहीं। साथ ही पहले ग्रुप की महिलाओं की तुलना में दूसरे ग्रुप की प्रसूताओं की सूजन और दर्द में भी कितनी जल्दी कमी आई। शोध कार्य में राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन और एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा से भी समन्वय स्थापित किया गया है। इस शोध कार्य में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या जैन, डॉ. सिप्पी अग्रवाल, डॉ. फहाद, डॉ. बृजेंद्र भी शामिल हैं।
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हल्दी के अर्क से ऑपरेशन से डिलीवरी करावनी वाली प्रसूताओं का दर्द दूर करेंगे। मई से शुरू होने वाले ट्रायल के दौरान 120 प्रसूताओं को दवाओं के साथ करक्यूमिन अर्क का भी सेवन कराया जाएगा। फिर स्वस्थ होने के समय पर एनेस्थीसिया और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टर अध्ययन करेंगे। मेडिकल कॉलेज की एथिकल कमेटी (नैतिक समिति) से क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी भी मिल गई है। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि ट्रायल के दौरान ऑपरेशन से डिलीवरी करवाने वाली 240 प्रसूताओं के दो ग्रुप बनाए जाएंगे। एक ग्रुप की 120 प्रसूताओं को नियमित उपचार के दौरान दी जाने वाली दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक दी जाएंगी। जबकि, दूसरे ग्रुप की 120 प्रसूताओं को इन दवाओं के साथ-साथ हल्दी को चमकीला पीला रंग देने वाले करक्यूमिन अर्क का भी सेवन कराया जाएगा। फिर अध्ययन किया जाएगा कि नियमित इलाज के बजाय करक्यूमिन अर्क का सेवन करने वाली प्रसूताओं के ऑपरेशन के घाव जल्दी भरे या नहीं। साथ ही पहले ग्रुप की महिलाओं की तुलना में दूसरे ग्रुप की प्रसूताओं की सूजन और दर्द में भी कितनी जल्दी कमी आई। शोध कार्य में राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन और एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा से भी समन्वय स्थापित किया गया है। इस शोध कार्य में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या जैन, डॉ. सिप्पी अग्रवाल, डॉ. फहाद, डॉ. बृजेंद्र भी शामिल हैं।