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लिवर, फेफड़े और आंतों से होकर भी दिमाग तक पहुंच जाता ट्यूमर
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झांसी। दिमाग की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं तो एक गांठ बन जाती है। उसे ही ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। मगर लिवर, फेफड़े, किडनी, आंतों समेत शरीर के अन्य अंगों के ट्यूमर की कोशिकाएं भी खून के जरिए दिमाग तक पहुंच जाती हैं। इस वजह से भी ब्रेन ट्यूमर हो जाता है। 35 से 40 फीसदी मरीजों को तो दूसरे अंगों से ही ब्रेन ट्यूमर हो जाता है।
झांसी में हर महीने 30 से 35 ब्रेन ट्यूमर के मरीज मिलते हैं। ये बेहद खतरनाक बीमारी है। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो फिजीशियन डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीज सिर दर्द, हाथ-पैर में कमजोरी, मिर्गी के दौरे, याददाश्त या व्यवहार में बदलाव, उल्टी आदि की समस्या लेकर दिखाने के लिए आते हैं। ट्यूमर भी दो तरह के होते हैं। एक धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसके लक्षण दस साल बाद भी सामने आ सकते हैं। दूसरा ट्यूमर बहुत तेजी से बढ़ता है, जिसके लक्षण छह महीने में ही दिखने लगते हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कई मरीज ऐसा सामने आए हैं, जिन्हें दूसरे अंगों ओवरी, फेफड़े, किडनी, लंग्स, आंत, लिवर आदि में गांठ होने के बाद ब्रेन ट्यूमर हो गया। उन्होंने बताया कि ट्यूमर की कोशिकाएं खून के जरिए दिमाग तक पहुंच जाती हैं। इसे मेटास्टेसिस कहते हैं। ब्रेन ट्यूमर में दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है। दूसरों अंगों से फैलने वाला ट्यूमर ज्यादा घातक होता है। ब्रेन ट्यूमर के हर महीने 10 से 15 मरीज आते हैं। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के दौरान या बाद में मरीज के लकवाग्रस्त होने, कोमा में जाने की आशंका रहती है। हर महीने 10 से 12 ब्रेन ट्यूमर के नए मरीज दिखाने आते हैं।
मेडिकल कॉलेज में आईं आधुनिक मशीनें
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी की अलग यूनिट बनी हुई है। यहां पर आधुनिक मशीनें लग गई हैं। इसके जरिए जल्द ही बीमारी पहचान में आ जाती है। इलाज की भी बेहतर सुविधा उपलब्ध है।
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ये हैं लक्षण
- सिर दर्द
- हाथ-पैर में कमजोरी
- मिर्गी के दौरे
- याददाश्त कम होना
- व्यवहार में बदलाव
- उल्टी की समस्या
ये हैं कारण
- जंक फूड का अधिक सेवन
- अनियंत्रित खानपान
- धूम्रपान
- शराब पीना
- गड़बड़ दिनचार्य
- कम व्यायाम करना
- आनुवंशिक
केस-1
एक साथ तीन जगहों पर गांठ हो गई
65 साल के बुजुर्ग को परिजन बेहोशी, मिर्गी के दौरे, सुस्ती की समस्या के साथ मेडिकल कॉलेज दिखाने के लिए पहुंचे। जांच में फेफड़े, लिवर के साथ-साथ दिमाग में भी गांठ निकली। डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी कराने की सलाह दी है।
केस-2
कमजोर होने लगी याददाश्त जांच में निकला ब्रेन ट्यूमर
35 साल के युवक की अचानक याददाश्त कम होने लगी। उसे चलने-फिरने में भी तकलीफ शुरू हो गई। परिजन दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जांच कराई तो ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर निकला। अभी उसका इलाज चल रहा है।
केस-3
छह महीने में लिवर, फेफड़े से दिमाग तक पहुंचा ट्यूमर
मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान 62 साल के बुजुर्ग को लिवर और फेफड़े में ट्यूमर पाया गया। उसका इलाज चल ही रहा था कि ट्यूमर दिमाग तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने सर्जरी कराने की सलाह दी तो परिजन लखनऊ दिखाने के लिए ले गए।
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झांसी में हर महीने 30 से 35 ब्रेन ट्यूमर के मरीज मिलते हैं। ये बेहद खतरनाक बीमारी है। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो फिजीशियन डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीज सिर दर्द, हाथ-पैर में कमजोरी, मिर्गी के दौरे, याददाश्त या व्यवहार में बदलाव, उल्टी आदि की समस्या लेकर दिखाने के लिए आते हैं। ट्यूमर भी दो तरह के होते हैं। एक धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसके लक्षण दस साल बाद भी सामने आ सकते हैं। दूसरा ट्यूमर बहुत तेजी से बढ़ता है, जिसके लक्षण छह महीने में ही दिखने लगते हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कई मरीज ऐसा सामने आए हैं, जिन्हें दूसरे अंगों ओवरी, फेफड़े, किडनी, लंग्स, आंत, लिवर आदि में गांठ होने के बाद ब्रेन ट्यूमर हो गया। उन्होंने बताया कि ट्यूमर की कोशिकाएं खून के जरिए दिमाग तक पहुंच जाती हैं। इसे मेटास्टेसिस कहते हैं। ब्रेन ट्यूमर में दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है। दूसरों अंगों से फैलने वाला ट्यूमर ज्यादा घातक होता है। ब्रेन ट्यूमर के हर महीने 10 से 15 मरीज आते हैं। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के दौरान या बाद में मरीज के लकवाग्रस्त होने, कोमा में जाने की आशंका रहती है। हर महीने 10 से 12 ब्रेन ट्यूमर के नए मरीज दिखाने आते हैं।
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मेडिकल कॉलेज में आईं आधुनिक मशीनें
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी की अलग यूनिट बनी हुई है। यहां पर आधुनिक मशीनें लग गई हैं। इसके जरिए जल्द ही बीमारी पहचान में आ जाती है। इलाज की भी बेहतर सुविधा उपलब्ध है।
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ये हैं लक्षण
- सिर दर्द
- हाथ-पैर में कमजोरी
- मिर्गी के दौरे
- याददाश्त कम होना
- व्यवहार में बदलाव
- उल्टी की समस्या
ये हैं कारण
- जंक फूड का अधिक सेवन
- अनियंत्रित खानपान
- धूम्रपान
- शराब पीना
- गड़बड़ दिनचार्य
- कम व्यायाम करना
- आनुवंशिक
केस-1
एक साथ तीन जगहों पर गांठ हो गई
65 साल के बुजुर्ग को परिजन बेहोशी, मिर्गी के दौरे, सुस्ती की समस्या के साथ मेडिकल कॉलेज दिखाने के लिए पहुंचे। जांच में फेफड़े, लिवर के साथ-साथ दिमाग में भी गांठ निकली। डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी कराने की सलाह दी है।
केस-2
कमजोर होने लगी याददाश्त जांच में निकला ब्रेन ट्यूमर
35 साल के युवक की अचानक याददाश्त कम होने लगी। उसे चलने-फिरने में भी तकलीफ शुरू हो गई। परिजन दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जांच कराई तो ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर निकला। अभी उसका इलाज चल रहा है।
केस-3
छह महीने में लिवर, फेफड़े से दिमाग तक पहुंचा ट्यूमर
मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान 62 साल के बुजुर्ग को लिवर और फेफड़े में ट्यूमर पाया गया। उसका इलाज चल ही रहा था कि ट्यूमर दिमाग तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने सर्जरी कराने की सलाह दी तो परिजन लखनऊ दिखाने के लिए ले गए।