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अन्ना जानवर नहीं पहुंचा पाते हैं तुलसी को नुकसान
Wed, 20 Feb 2019 01:27 AM IST
Pragyan dubey
jhansi
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Published by: Pragyan dubey
Updated Wed, 20 Feb 2019 01:27 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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झांसी। आयुर्वेद और धार्मिक दृष्टि से तुलसी का व्यापक महत्व है। यही वजह है कि तुलसी हमेशा जन - जन में उपयोगी रही है। किसानों के अनुसार तुलसी की फसल जलवायु परिवर्तन, आवारा जानवरों की समस्या से मुक्त है। बुंदेलखंड की भूमि इस फसल के लिए बेहतर है। यही वजह है कि क ई आयुर्वेदिक कंपनियों का ध्यान इस ओर व्यापक रूप से गया है। इससे किसान भी लाभांवित हो रहे हैं। तुलसी की पैदावार साल में दो बार होती है। खास बात यह है कि तुलसी को अन्ना जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। यह 65 से 70 दिनों की फसल है। इसके अलावा पानी भी एक ही बार लगता है। इसे बंजर, पथरीली भूमि में भी उगाया जा सकता है।
यह कंपनियां खरीद रही हैं तुलसी को
किसान राम सहाय व पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में आर्गेनिक इंडिया, आर्गेनिक वेलनेस, फलादा, पतंजलि, सन फ्लैग आदि कंपनियां तुलसी को खरीदती हैं। तीन साल का एग्रीमेंट होता है। जरूरत पर कंपनियां बीज, तिरपाल, बोरियां जैसी सुविधाएं भी देती हैं। हालांकि इन कंपनियों के प्रतिनिधि ब्लाक स्तर पर सक्रिय रहते हैं, जो एग्रीमेंट किये किसानों की फसल की देखरेख भी करते हैं। नीमच भी औषधीय फसलों की बड़ी मंडी है। उद्यान विभाग के अनुसार किसान तुलसी की फसल बेचने के लिए ई चरक वेबसाइट पर ऑनलाइन संपर्क करते हैं। इस साइट पर फसल खरीदने वाली कंपनियों का ब्योरा रहता है।
पानी की जरूरत नहीं
पांच एकड़ जमीन में तुलसी लगाते हैं। साल में दो बार फसल तैयार करते हैं। एक बार में एक एकड़ में 15 से 20 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। साल में दो लाख रुपये का मुनाफा हो जाता है। लागत कम है। पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। फसल भी जल्द तैयार हो जाती है। एक एकड़ में चार से पांच क्विंटल तक फसल तैयार हो जाती है।
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दिनेश कुमार प्रजापति, किसान, बंगरा
एक लाख रुपये मिलता है अतिरिक्त मुनाफा
तुलसी की खेती दो हेक्टेअर जमीन में एक बार करता हूं। इससे साल में एक लाख से अधिक का अतिरिक्त मुनाफा हो जाता है। एक एकड़ में लगभग आठ से दस हजार रुपये की लागत आती है। बेचने में भी परेशानी नहीं होती है।
पुष्पेंद्र सिंह यादव, किसान टोड़ी फतेहपुर
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यह कंपनियां खरीद रही हैं तुलसी को
किसान राम सहाय व पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में आर्गेनिक इंडिया, आर्गेनिक वेलनेस, फलादा, पतंजलि, सन फ्लैग आदि कंपनियां तुलसी को खरीदती हैं। तीन साल का एग्रीमेंट होता है। जरूरत पर कंपनियां बीज, तिरपाल, बोरियां जैसी सुविधाएं भी देती हैं। हालांकि इन कंपनियों के प्रतिनिधि ब्लाक स्तर पर सक्रिय रहते हैं, जो एग्रीमेंट किये किसानों की फसल की देखरेख भी करते हैं। नीमच भी औषधीय फसलों की बड़ी मंडी है। उद्यान विभाग के अनुसार किसान तुलसी की फसल बेचने के लिए ई चरक वेबसाइट पर ऑनलाइन संपर्क करते हैं। इस साइट पर फसल खरीदने वाली कंपनियों का ब्योरा रहता है।
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पानी की जरूरत नहीं
पांच एकड़ जमीन में तुलसी लगाते हैं। साल में दो बार फसल तैयार करते हैं। एक बार में एक एकड़ में 15 से 20 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। साल में दो लाख रुपये का मुनाफा हो जाता है। लागत कम है। पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। फसल भी जल्द तैयार हो जाती है। एक एकड़ में चार से पांच क्विंटल तक फसल तैयार हो जाती है।
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दिनेश कुमार प्रजापति, किसान, बंगरा
एक लाख रुपये मिलता है अतिरिक्त मुनाफा
तुलसी की खेती दो हेक्टेअर जमीन में एक बार करता हूं। इससे साल में एक लाख से अधिक का अतिरिक्त मुनाफा हो जाता है। एक एकड़ में लगभग आठ से दस हजार रुपये की लागत आती है। बेचने में भी परेशानी नहीं होती है।
पुष्पेंद्र सिंह यादव, किसान टोड़ी फतेहपुर