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झोपड़ियों में जीवन गुजारने को मजबूर आदिवासी
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डोंगराखुर्द/धौर्रा। विरधा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम कपासी में सहरिया आदिवासियों को आवास न मिलने से वह झोपड़ियों में गुजारा कर रहे हैं। जानवरों के लिए बनी झोपड़ी के सामने ही बाड़ा (झागड़बारी) लगाए हैं। इन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
कपासी गांव में करीब 100 परिवार निवास कर रहे हैं लेकिन आधे से ज्यादा आदिवासी परिवारों को आवास नहीं मिल पाए
जिससे इन्हें कच्ची झोपड़ी में फटी पुरानी तिरपाल डालकर रहने को विवश होना पड़ रहा है। गरीबी रेखा से नीचे नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए तरस रहे हैं। सरकारी योजना में आवास की आस लगाए कई साले बीत गए लेकिन आवास नहीं मिल पाए। इसी के चलते इन्हें झोपड़ी डालकर रहना पड़ रहा है।
ग्राम कपासी निवासी फुलाबाई उर्फ चिरई पत्नी घनश्याम अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के तले रहने को मजबूर हैं। उसका पति की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी, वह लकड़ी की झोपड़ी बनाकर रहती है आदिवासी महिला पिछले दो सालों से दर दर भटक रही लेकिन आवास नहीं दिया गया।
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ऐसे दर्जनों सहरिया परिवार हैं जिन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, वृद्धा पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान योजना, प्रसव योजना, शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम विभाग में पंजीकृत योजना आदि का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि ग्राम प्रधान इन योजनाओं में रुचि नहीं दिखाते हैं। इन योजनाओं से ग्राम पंचायत के किसी भी पात्र लाभार्थियों को किसी भी तरह का कोई भी लाभ नहीं मिल पाया।
दो साल से आवास बनवाने के लिए परेशान हो रहे लेकिन कोई नहीं सुन रहा है बरसात के दिनों में ज्यादा दिक्कत आती है। फुलाबाई, आदिवासी कपासी ।
सर्वे कर लिया गया है जैसे साइड खुलती है तो तत्काल अपलोड कर दिया जाएगा और जितने सहरिया परिवार निवास उनके आवास शीघ्र बनेंगे। मनोज कुमार सोनी, ग्राम विकास अधिकारी
झुपड़ियों में रहकर गुजारा कर रहे हम लोगों की कोई सुनता है। चुनाव के समय आश्वासन सब देते है लेकिन बाद सब भूल जाते है।- राजाराम,सहरिया पुरा पाचौनी
झुपड़ियां बनाकर उन्ही में अपना जीवन यापन कर रहे हैं पूरी जिंदगी गुजार दी लेकिन पक्का मकान रहने को नहीं मिला।-बडी बहू सहरिया
सरकार भले ही सहरियों के लिए योजना चला रही हो लेकिन हम लोगो कोई लाभ नही मिल रहा है। कच्चे मकानों में रह रहें बरसात के दिनों जहरीले कीड़ा निकलते रहते है।-सुनीता सहरिया
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कपासी गांव में करीब 100 परिवार निवास कर रहे हैं लेकिन आधे से ज्यादा आदिवासी परिवारों को आवास नहीं मिल पाए
जिससे इन्हें कच्ची झोपड़ी में फटी पुरानी तिरपाल डालकर रहने को विवश होना पड़ रहा है। गरीबी रेखा से नीचे नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए तरस रहे हैं। सरकारी योजना में आवास की आस लगाए कई साले बीत गए लेकिन आवास नहीं मिल पाए। इसी के चलते इन्हें झोपड़ी डालकर रहना पड़ रहा है।
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ग्राम कपासी निवासी फुलाबाई उर्फ चिरई पत्नी घनश्याम अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के तले रहने को मजबूर हैं। उसका पति की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी, वह लकड़ी की झोपड़ी बनाकर रहती है आदिवासी महिला पिछले दो सालों से दर दर भटक रही लेकिन आवास नहीं दिया गया।
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ऐसे दर्जनों सहरिया परिवार हैं जिन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, वृद्धा पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान योजना, प्रसव योजना, शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम विभाग में पंजीकृत योजना आदि का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि ग्राम प्रधान इन योजनाओं में रुचि नहीं दिखाते हैं। इन योजनाओं से ग्राम पंचायत के किसी भी पात्र लाभार्थियों को किसी भी तरह का कोई भी लाभ नहीं मिल पाया।
दो साल से आवास बनवाने के लिए परेशान हो रहे लेकिन कोई नहीं सुन रहा है बरसात के दिनों में ज्यादा दिक्कत आती है। फुलाबाई, आदिवासी कपासी ।
सर्वे कर लिया गया है जैसे साइड खुलती है तो तत्काल अपलोड कर दिया जाएगा और जितने सहरिया परिवार निवास उनके आवास शीघ्र बनेंगे। मनोज कुमार सोनी, ग्राम विकास अधिकारी
झुपड़ियों में रहकर गुजारा कर रहे हम लोगों की कोई सुनता है। चुनाव के समय आश्वासन सब देते है लेकिन बाद सब भूल जाते है।- राजाराम,सहरिया पुरा पाचौनी
झुपड़ियां बनाकर उन्ही में अपना जीवन यापन कर रहे हैं पूरी जिंदगी गुजार दी लेकिन पक्का मकान रहने को नहीं मिला।-बडी बहू सहरिया
सरकार भले ही सहरियों के लिए योजना चला रही हो लेकिन हम लोगो कोई लाभ नही मिल रहा है। कच्चे मकानों में रह रहें बरसात के दिनों जहरीले कीड़ा निकलते रहते है।-सुनीता सहरिया