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ट्रामा सेंटर स्टाफ को नौ माह से मानदेय की दरकार
ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2016 12:51 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने ट्रामा सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय नहीं मिला है। ऐसा मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा समय से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट न भेजने के कारण हुआ है।
मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर के कर्मचारी कई बार प्राचार्य से मिलकर मानदेय की मांग को लेकर प्रार्थनापत्र सौंप चुके हैं। कुछ माह पूर्व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा महानिदेशक के कॉलेज आगमन के दौरान भी कर्मचारियों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराते हुए जल्द से जल्द मानदेय दिलवाने की गुहार लगाई थी।
तब उन्होंने पंद्रह दिन में पैसा जारी हो जाने की बात कही थी लेकिन मौजूदा समय तक कर्मियों को रोजी का पैसा नहीं मिल सका है। सूत्रों ने बताया कि ऐसा कॉलेज प्रशासन द्वारा देर से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेजने के चलते हुआ है। मानदेय नहीं मिलने के चलते दिनों दिन स्टाफ के कर्मचारी भी नौकरी छोड़कर जाते जा रहे हैं।
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हाल यह है कि सितंबर 2010 में ट्रामा सेंटर शुरू होने के समय करीब 75 का स्टाफ था, लेकिन बाद में मानदेय न मिलने के चलते कई डॉक्टर, स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन आदि कार्य छोड़कर चले गए हैं। मौजूदा समय में ट्रामा सेंटर का स्टाफ आधा हो गया है।
पहले शासन फिर केंद्र के पास जाता
कॉलेज प्रशासन द्वारा यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट पहले उत्तर प्रदेश शासन को भेजा जाता है, फिर शासन सर्टिफिकेट को केंद्र सरकार के पास भेज देता है। इसके बाद केंद्र सरकार पैसा रिलीज कर देती है। बताया गया कि यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट एक तरह से कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्यों का प्रमाणपत्र होता है।
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मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर के कर्मचारी कई बार प्राचार्य से मिलकर मानदेय की मांग को लेकर प्रार्थनापत्र सौंप चुके हैं। कुछ माह पूर्व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा महानिदेशक के कॉलेज आगमन के दौरान भी कर्मचारियों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराते हुए जल्द से जल्द मानदेय दिलवाने की गुहार लगाई थी।
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तब उन्होंने पंद्रह दिन में पैसा जारी हो जाने की बात कही थी लेकिन मौजूदा समय तक कर्मियों को रोजी का पैसा नहीं मिल सका है। सूत्रों ने बताया कि ऐसा कॉलेज प्रशासन द्वारा देर से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेजने के चलते हुआ है। मानदेय नहीं मिलने के चलते दिनों दिन स्टाफ के कर्मचारी भी नौकरी छोड़कर जाते जा रहे हैं।
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हाल यह है कि सितंबर 2010 में ट्रामा सेंटर शुरू होने के समय करीब 75 का स्टाफ था, लेकिन बाद में मानदेय न मिलने के चलते कई डॉक्टर, स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन आदि कार्य छोड़कर चले गए हैं। मौजूदा समय में ट्रामा सेंटर का स्टाफ आधा हो गया है।
पहले शासन फिर केंद्र के पास जाता
कॉलेज प्रशासन द्वारा यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट पहले उत्तर प्रदेश शासन को भेजा जाता है, फिर शासन सर्टिफिकेट को केंद्र सरकार के पास भेज देता है। इसके बाद केंद्र सरकार पैसा रिलीज कर देती है। बताया गया कि यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट एक तरह से कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्यों का प्रमाणपत्र होता है।