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ट्रामा सेंटर को मिलेगा खुद का स्टाफ
ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:29 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर को अब खुद का स्टाफ मिल जाएगा। शासन ने डॉक्टर, नर्स और लैब टेक्नीशियन के सौ पदों को सृजित कर दिया है। पद भरने के बाद ट्रामा सेंटर के क्रियान्वयन को मेडिकल कॉलेज के स्टाफ की जरूरत नहीं पड़ेगी।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में 2010 में ट्रामा सेंटर बनकर तैयार हो गया था। यहां झांसी समेत आसपास के सौ किलोमीटर क्षेत्र के एक्सीडेंटल केस इलाज के लिए आते हैं, जिसमें कुछ तो बहुत गंभीर होते हैं। सितंबर 2010 में ट्रामा सेंटर में डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, स्वीपर समेत 75 कर्मचारियों को संविदा पर रख लिया गया था।
इसके बाद धीरे-धीरे स्टाफ कम होता चला गया और इसके संचालन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खुद के स्टाफ की सेवाएं लेनी शुरू कर दीं। मौजूदा समय में ट्रामा सेंटर में 13 स्टाफ नर्स, सात टेक्नीशियन, 15 वार्ड ब्वॉय, 15 स्वीपर संविदा पर कार्यरत हैं।
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जबकि, डॉक्टरों की बात करें तो एनस्थीसिया के दो, एक आर्थोपेडिक, एक सर्जरी और एक ईएमओ है। इन समस्याओं के मद्देनजर अब शासन ने ट्रामा सेंटर को खुद का स्टाफ देने पर हरी झंडी दिखा दी है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि ट्रामा सेंटर में जल्द ही 44 डॉक्टर, 30 स्टाफ नर्स और 26 टेक्नीशियन के पद भरे जाएंगे।
व्यवस्था में होगा सुधार
ट्रामा सेंटर को खुद का स्टाफ मिल जाने के बाद व्यवस्थाएं भी सुचारू रूप से चलेंगी। अभी ऑथोपेडिक विभाग के स्टाफ को ट्रामा सेंटर में सेवाएं देने के लिए कॉलेज प्रशासन को संतुलन बैठाना पड़ता है। कभी-कभी को ट्रामा सेंटर में ड्यूटी के दौरान हड्डी रोग विभाग में कोई गंभीर केस आ जाने पर डॉक्टर वहां चले जाते हैं, इससे ट्रामा सेंटर का कार्य प्रभावित होता है। मगर जब ट्रामा सेंटर में सृजित पद भरे जाएंगे तो डॉक्टर व स्टाफ हर समय यहां मौजूद रहेंगे।
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गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में 2010 में ट्रामा सेंटर बनकर तैयार हो गया था। यहां झांसी समेत आसपास के सौ किलोमीटर क्षेत्र के एक्सीडेंटल केस इलाज के लिए आते हैं, जिसमें कुछ तो बहुत गंभीर होते हैं। सितंबर 2010 में ट्रामा सेंटर में डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, स्वीपर समेत 75 कर्मचारियों को संविदा पर रख लिया गया था।
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इसके बाद धीरे-धीरे स्टाफ कम होता चला गया और इसके संचालन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खुद के स्टाफ की सेवाएं लेनी शुरू कर दीं। मौजूदा समय में ट्रामा सेंटर में 13 स्टाफ नर्स, सात टेक्नीशियन, 15 वार्ड ब्वॉय, 15 स्वीपर संविदा पर कार्यरत हैं।
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जबकि, डॉक्टरों की बात करें तो एनस्थीसिया के दो, एक आर्थोपेडिक, एक सर्जरी और एक ईएमओ है। इन समस्याओं के मद्देनजर अब शासन ने ट्रामा सेंटर को खुद का स्टाफ देने पर हरी झंडी दिखा दी है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि ट्रामा सेंटर में जल्द ही 44 डॉक्टर, 30 स्टाफ नर्स और 26 टेक्नीशियन के पद भरे जाएंगे।
व्यवस्था में होगा सुधार
ट्रामा सेंटर को खुद का स्टाफ मिल जाने के बाद व्यवस्थाएं भी सुचारू रूप से चलेंगी। अभी ऑथोपेडिक विभाग के स्टाफ को ट्रामा सेंटर में सेवाएं देने के लिए कॉलेज प्रशासन को संतुलन बैठाना पड़ता है। कभी-कभी को ट्रामा सेंटर में ड्यूटी के दौरान हड्डी रोग विभाग में कोई गंभीर केस आ जाने पर डॉक्टर वहां चले जाते हैं, इससे ट्रामा सेंटर का कार्य प्रभावित होता है। मगर जब ट्रामा सेंटर में सृजित पद भरे जाएंगे तो डॉक्टर व स्टाफ हर समय यहां मौजूद रहेंगे।