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उधमपुर एक्स अग्निकांड: ...ऐसे कैसे बुझेगी ट्रेनों में लगी आग
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झांसी। ट्रेनों में आग बुझाने के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी हैं। खासकर जिन कोचों (स्लीपर और जनरल) में ज्यादा भीड़ रहती है, वहां अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। ट्रेन में एसी कोच, गार्ड डिब्बा और इंजन में जरूर अग्निशमन यंत्रों का इंतजाम रहता है। इनमें भी अधिकांश ट्रेनों के एसी कोचों में अग्निशमन यंत्र असुरक्षित रखे रहते हैं।
शुक्रवार को मंडल के हेतमपुर स्टेशन पर उधमपुर दुर्ग सुपरफास्ट एक्सप्रेस के खड़ी होने के बाद कर्मचारियों ने कोच में रखे अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग को बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन वह काम नहीं कर सके थे। यात्रियों ने बताया था कि अगर अग्निशमन दुरुस्त होते तो आग बढ़ने से पहले ही उस पर काबू पा लिया जाता। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को झांसी से गुजरी ट्रेनों में अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव की पड़ताल की।
दोपहर 12.34 बजे प्लेटफार्म पर आई 12050 गतिमान एक्सप्रेस के ई टू व सी 3 कोच में रखा अग्निशमन यंत्र बेल्ट से नहीं बंधा था। सी 4 कोच में उपकरण के निरीक्षण, रिफलिंग व खत्म होने की तिथियां स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थीं। इसी तरह दोपहर 1.14 बजे प्लेटफार्म तीन पर आई 19665 खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के बी 4 कोच में अग्निशमन यंत्र नहीं रखा था। बी 3 कोच में रखा था। स्लीपर व जनरल कोच में यंत्र नहीं थे। दोपहर 1.30 बजे प्लेटफार्म दो पर आई 18238 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के एसी कोचों में यंत्र अपने स्थानों पर रखे थे। बाकी श्रेणियों के कोचों में उपकरणों का कोई इंतजाम नहीं था।
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पता हो कि देश में प्रतिदिन लगभग 14000 ट्रेनों का संचालन होता है, जिनमें दस लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें अस्सी फीसदी जनरल या स्लीपर कोचों में सफर करते हैं। झांसी स्टेशन से प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रेनें गुजरतीं हैं। इस संबंध में उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि ट्रेनों में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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शताब्दी, गतिमान व राजधानी की सुरक्षा पर ही फोकस
झांसी से गुजरने वाली शताब्दी एक्सप्रेस, गतिमान एक्सप्रेस व राजधानी एक्सप्रेस में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इन दोनों गाड़ियों के हर कोच में शौचालय के पास अग्निशमन यंत्र मौजूद रहते हैं। इन्हें चलाने के लिए मेकेनिकल व कोच अटेंडेंट स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। रेलवे के अधिकारी व निरीक्षक अक्सर अभियान चलाकर उपकरणों की जांच करते हैं। जबकि, दूसरी ट्रेनों में जांच की अनदेखी की जाती है।
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यह भी जानिए
झांसी स्टेशन पर स्थित सभी डिपो कार्यालयों में अग्निशमन यंत्रों का इंतजाम तो किया गया है, लेकिन उनको चलाने का प्रशिक्षण कुछ ही कर्मचारियों को दिया गया है। आमतौर पर स्टेशन प्रबंधक कार्यालय के बाहर सभी आवश्यक फोन नंबर व अग्निशमन यंत्रों को दीवार पर लटका कर रखा जाता है, लेकिन यहां इन सभी मानकाें की अनदेखी की जा रही है।
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शुक्रवार को मंडल के हेतमपुर स्टेशन पर उधमपुर दुर्ग सुपरफास्ट एक्सप्रेस के खड़ी होने के बाद कर्मचारियों ने कोच में रखे अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग को बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन वह काम नहीं कर सके थे। यात्रियों ने बताया था कि अगर अग्निशमन दुरुस्त होते तो आग बढ़ने से पहले ही उस पर काबू पा लिया जाता। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को झांसी से गुजरी ट्रेनों में अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव की पड़ताल की।
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दोपहर 12.34 बजे प्लेटफार्म पर आई 12050 गतिमान एक्सप्रेस के ई टू व सी 3 कोच में रखा अग्निशमन यंत्र बेल्ट से नहीं बंधा था। सी 4 कोच में उपकरण के निरीक्षण, रिफलिंग व खत्म होने की तिथियां स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थीं। इसी तरह दोपहर 1.14 बजे प्लेटफार्म तीन पर आई 19665 खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के बी 4 कोच में अग्निशमन यंत्र नहीं रखा था। बी 3 कोच में रखा था। स्लीपर व जनरल कोच में यंत्र नहीं थे। दोपहर 1.30 बजे प्लेटफार्म दो पर आई 18238 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के एसी कोचों में यंत्र अपने स्थानों पर रखे थे। बाकी श्रेणियों के कोचों में उपकरणों का कोई इंतजाम नहीं था।
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पता हो कि देश में प्रतिदिन लगभग 14000 ट्रेनों का संचालन होता है, जिनमें दस लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें अस्सी फीसदी जनरल या स्लीपर कोचों में सफर करते हैं। झांसी स्टेशन से प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रेनें गुजरतीं हैं। इस संबंध में उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि ट्रेनों में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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शताब्दी, गतिमान व राजधानी की सुरक्षा पर ही फोकस
झांसी से गुजरने वाली शताब्दी एक्सप्रेस, गतिमान एक्सप्रेस व राजधानी एक्सप्रेस में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इन दोनों गाड़ियों के हर कोच में शौचालय के पास अग्निशमन यंत्र मौजूद रहते हैं। इन्हें चलाने के लिए मेकेनिकल व कोच अटेंडेंट स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। रेलवे के अधिकारी व निरीक्षक अक्सर अभियान चलाकर उपकरणों की जांच करते हैं। जबकि, दूसरी ट्रेनों में जांच की अनदेखी की जाती है।
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झांसी स्टेशन पर स्थित सभी डिपो कार्यालयों में अग्निशमन यंत्रों का इंतजाम तो किया गया है, लेकिन उनको चलाने का प्रशिक्षण कुछ ही कर्मचारियों को दिया गया है। आमतौर पर स्टेशन प्रबंधक कार्यालय के बाहर सभी आवश्यक फोन नंबर व अग्निशमन यंत्रों को दीवार पर लटका कर रखा जाता है, लेकिन यहां इन सभी मानकाें की अनदेखी की जा रही है।
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