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Jhansi News: महानगर में आज भी निभाई जा रहीं परंपराएं
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झांसी। महानगर में होली की तैयारियां पूरे उत्साह से चल रही है। होलिका दहन के पश्चात रंगोत्सव का शुभारंभ होगा। रंग पंचमी तक लोग होली की मस्ती और उल्लास में डूबे रहेंगे। वहीं, महानगर में होली से जुड़ी कई परंपराएं आज भी निभाई जा रही हंै।
घास मंडी में होलिका दहन शहर कोतवाल द्वारा किया जाता है। यह परंपरा महाराजा गंगाधर राव के समय से चली आ रही है। धर्माचार्य वसंत विष्णु गोलवलकर व हर्षल गोलवलकर के अनुसार महाराजा गंगाधर राव एक समय बीमार पड़ गए थे। महाराज के निर्देश पर तब शहर कोतवाल ने होलिका दहन किया था। होलिका दहन शहर कोतवाल द्वारा ही किया जाने लगा, जो आज भी जारी है। वहीं, होलिका दहन के पश्चात नगर में प्रतिपदा पर होली नहीं खेलने की परंपरा के संबंध में विद्वानों में कई अलग - अलग मान्यताएं हंै। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर के अनुसार, प्रतिपदा पर महाराजा गंगाधर राव का निधन हो गया था। महाराष्ट्रीय समाज सहित अन्य नगरवासी प्रतिपदा पर महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते है। इसके पश्चात होली खेलते है। इधर नेताजी सुभाष फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहन नेपाली के अनुसार अंग्रेज सरकार द्वारा झांसी को अधिग्रहण करने का पत्र होली की प्रतिपदा पर आया था। इससे झांसी वासी दुखी हो गए थे और उन्होंने होली नहीं खेली थी। तब से प्रतिपदा पर होली नहीं खेलने की परंपरा चली आ रही है। संवाद
घास मंडी में होलिका दहन शहर कोतवाल द्वारा किया जाता है। यह परंपरा महाराजा गंगाधर राव के समय से चली आ रही है। धर्माचार्य वसंत विष्णु गोलवलकर व हर्षल गोलवलकर के अनुसार महाराजा गंगाधर राव एक समय बीमार पड़ गए थे। महाराज के निर्देश पर तब शहर कोतवाल ने होलिका दहन किया था। होलिका दहन शहर कोतवाल द्वारा ही किया जाने लगा, जो आज भी जारी है। वहीं, होलिका दहन के पश्चात नगर में प्रतिपदा पर होली नहीं खेलने की परंपरा के संबंध में विद्वानों में कई अलग - अलग मान्यताएं हंै। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर के अनुसार, प्रतिपदा पर महाराजा गंगाधर राव का निधन हो गया था। महाराष्ट्रीय समाज सहित अन्य नगरवासी प्रतिपदा पर महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते है। इसके पश्चात होली खेलते है। इधर नेताजी सुभाष फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहन नेपाली के अनुसार अंग्रेज सरकार द्वारा झांसी को अधिग्रहण करने का पत्र होली की प्रतिपदा पर आया था। इससे झांसी वासी दुखी हो गए थे और उन्होंने होली नहीं खेली थी। तब से प्रतिपदा पर होली नहीं खेलने की परंपरा चली आ रही है। संवाद
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