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रेलवे ट्रैक छोड़ अफसरों के घर का रखरखाव कर रहे ट्रैकमैन
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झांसी। रेलवे यात्री सुरक्षा पर जोर देता है, लेकिन रेल पटरियों की सुरक्षा करने वाले ट्रैकमैन अफसरों के घरों के रखरखाव में जुटे हुए हैं। मंडल में आठ सौ ट्रैकमैनों (ट्रैक मेंटेनर) की कमी होने के बाद भी उनको ऑफिस और बंगलों में काम कराने का मोह अधिकारियों का खत्म नहीं हो रहा है। पिछले साल रेल मंत्री ने बंगलों और ऑफिस पर तैनात ट्रैकमैनों को तत्काल प्रभाव से ट्रैक पर भेजने के निर्देश दिए थे। लेकिन, अब भी तीन सौ से अधिक ट्रैकमैन बंगलों और मंडल के अगल-अलग डिपो कार्यालयों में पर ही नजर आ रहे हैं।
रेल पटरियों (ट्रैक) के रखरखाव का काम रेल पथ निरीक्षक (पीडब्ल्यूआई) के नेतृत्व में होता हैं। ट्रैक पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण पीडब्ल्यूआई के लिए रखरखाव करना मुश्किल होता जा रहा है। इसका एक कारण उनके गैंग में ट्रैकमैनों की कमी भी हैं। सिंगल ट्रैक पर एक गैंग में कम से कम 12 और डबल ट्रैक पर 24 ट्रैकमैन का होना जरूरी हैं, तभी पटरियों का रखरखाव बेहतर ढंग से किया जा सकता है। झांसी रेल मंडल में किलोमीटर के हिसाब से कम से कम पांच हजार ट्रैकमैनों की आवश्यकता हैं, जबकि 4180 ही तैनात हैं। इस संख्या में भी तीन सौ से अधिक ट्रैकमैन इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों, सुपरवाइजरों और अन्य उच्च अधिकारियों के बंगलों और मंडल के अलग-अलग डिपो कार्यालय में काम कर रहे हैं।
पिछले साल सितंबर में रेल मंत्री ने सभी ट्रैकमैनों को पटरियों के रखरखाव में लगाने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन इस आदेश के बाद भी अभी तक सभी ट्रैकमैनों को पटरियों पर नहीं भेजा गया है। तीन सौ के करीब अभी कार्यालय और बंगलों पर लगे हैं। जबकि इन कर्मचारियों का वेतन कागजों में दर्ज उनके कार्य स्थल पर बन रहा है।
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मंडल के सभी ट्रैकमैन अलग-अलग गैंग में तैनात हैं। सभी अपनी ड्यूटी के हिसाब से काम कर रहे हैं।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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रेल पटरियों (ट्रैक) के रखरखाव का काम रेल पथ निरीक्षक (पीडब्ल्यूआई) के नेतृत्व में होता हैं। ट्रैक पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण पीडब्ल्यूआई के लिए रखरखाव करना मुश्किल होता जा रहा है। इसका एक कारण उनके गैंग में ट्रैकमैनों की कमी भी हैं। सिंगल ट्रैक पर एक गैंग में कम से कम 12 और डबल ट्रैक पर 24 ट्रैकमैन का होना जरूरी हैं, तभी पटरियों का रखरखाव बेहतर ढंग से किया जा सकता है। झांसी रेल मंडल में किलोमीटर के हिसाब से कम से कम पांच हजार ट्रैकमैनों की आवश्यकता हैं, जबकि 4180 ही तैनात हैं। इस संख्या में भी तीन सौ से अधिक ट्रैकमैन इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों, सुपरवाइजरों और अन्य उच्च अधिकारियों के बंगलों और मंडल के अलग-अलग डिपो कार्यालय में काम कर रहे हैं।
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पिछले साल सितंबर में रेल मंत्री ने सभी ट्रैकमैनों को पटरियों के रखरखाव में लगाने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन इस आदेश के बाद भी अभी तक सभी ट्रैकमैनों को पटरियों पर नहीं भेजा गया है। तीन सौ के करीब अभी कार्यालय और बंगलों पर लगे हैं। जबकि इन कर्मचारियों का वेतन कागजों में दर्ज उनके कार्य स्थल पर बन रहा है।
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मंडल के सभी ट्रैकमैन अलग-अलग गैंग में तैनात हैं। सभी अपनी ड्यूटी के हिसाब से काम कर रहे हैं।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।