फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   track security high speed train

पटरियों की सुरक्षा के बाद ही दौड़ सकेगी हाईस्पीड ट्रेन

Sat, 14 Nov 2020 10:35 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Nov 2020 10:35 PM IST
विज्ञापन
track security high speed train
train accident.jpg - फोटो : train accident.jpg
झांसी। आगरा से झांसी और झांसी से बीना के बीच हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाने का काम पटरियों को सुरक्षित करने के बाद ही हो सकेगा। इस संबंध में रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) ने कहा है कि पटरियों की सुरक्षा बिना हाई स्पीड ट्रेन चलाना संभव नहीं है। पटरियों के पास दीवार या अन्य कोई बैरिकेडिंग लगना जरूरी है।
विज्ञापन

रेलवे बोर्ड नई दिल्ली से कटरा के बीच चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह अन्य ट्रैकों पर भी तेज गति वाली गाड़ियां दौड़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आरडीएसओ के अफसर लगातार अलग- अलग ट्रैकों की पटरियों की जांच कर रहे हैं। इसी पहल के तहत आरडीएसओ के अधिकारियों ने पिछले साल नवंबर में धौलपुर से झांसी के बीच (163 किलोमीटर) ट्रायल की प्लानिंग की थी। इसमें आरडीएसओ की कार और उसके पीछे एलएचबी के दो वातानुकूलित कोचों को जोड़कर हाई स्पीड से दौड़ाया गया। अधिकतम गति 159 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई। मगर, ट्रायल के दौरान जानवर कट गया और प्रयोग सफल नहीं हो सका। इसके बाद हाई स्पीड ट्रेन चलाने का कोई प्रयोग नहीं किया गया। आरडीएसओ के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हाई स्पीड ट्रेनें दौड़ाने के लिए पटरियां तो सुरक्षित हैं, मगर पटरी पर जानवर कब आ जाए? इसका कोई भरोसा नहीं है। जब तक पटरियों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा। तब तक हाई स्पीड ट्रेन नहीं दौड़ाई जा सकती है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पटरियों पर जानवर न आएं, इसके लिए लगातार पटरियों के पास सुरक्षा के इंतजाम चल रहा है। जगह- जगह सीमेंट के स्लीपर व अन्य बैरिकेडिंग लगाए जा रहे हैं। ये कार्य झांसी- कानपुर और झांसी- मानिकपुर ट्रैक पर भी चल रहा है।
विज्ञापन

हर महीने ट्रैक पर कटते हैं जानवर
दिल्ली मुंबई मुख्य ट्रैक पर झांसी रेल मंडल के अंतर्गत धौलपुर से झांसी व झांसी से आगासौद तक का सेक्शन आता है। इस सेक्शन में हर महीने ट्रेनों से 40 से 50 जानवर कटने का आंकड़ा बना रहता है। अक्सर जानवर का मांस इंजन में फंसने से वह खराब हो जाते हैं। ऐसे में कई ट्रेनें लेट हो जातीं हैं। पटरियों पर जानवर न जाएं, इसके लिए आरपीएफ आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाती रहती है, लेकिन घटनाएं कम नहीं हो रहीं हैं। हालांकि, रेल प्रशासन ने पटरियों के पास दीवार या बैरिकेडिंग लगाने काकाम शुरू किया था, लेकिन तीसरी रेल लाइन के काम के चलते इस पर ब्रेक लगा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed