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पर्यटकों को दिखाई जाएगी ‘झांसी की झांकी’
Updated Tue, 13 Sep 2016 02:04 AM IST
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bus, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर झांसी से एक टूरिस्ट बस चलाएगा। यह बस पर्यटकों को झांसी और आसपास के इलाकों के एतिहासिक व पौराणिक स्थानों का भ्रमण कराएगी। इस वातानुकूलित 14 सीटर बस में दस वर्ष से कम आयु के बच्चों का किराया नहीं लगेगा।
सुबह नौ बजे वीरांगना होटल से शुरू होकर यह बस पहले ओरछा फिर बरुआसागर, झांसी होती हुई दतिया जाएगी और वापस झांसी आएगी। रात 8.30 बजे इसका सफर पूरा होगा। बस के किराए में वरिष्ठ नागरिकों को छूट नहीं रहेगी। यात्रा करने वाले पर्यटकों को पानी, गाइड तथा पर्यटन से पुस्तक दी जाएगी। वीरांगना होटल के प्रबंधक मुकुल गुप्ता ने बताया कि बस में सफर के लिए टिकट वीरांगना होटल, रेलवे स्टेशन स्थित पर्यटन सुविधा केंद्र से खरीदा जा सकता है, इसके अलावा बस में भी टिकट खरीदा जा सकता है। झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा दिए गए 12 लाख रुपये से यह टूरिज्म बस खरीदी गई। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डा. कल्याण सिंह यादव ने बताया कि 27 सितंबर को टूरिज्म बस का उद्घाटन मंडलायुक्त से कराया जाना प्रस्तावित है।
तीन पैकेज हैं पर्यटकों को
झांसी दर्शन टूरिज्म बस में सफर करने के लिए पर्यटकों को तीन पैकेज है। फुल डे पैकेज में भारतीय को 650 रुपये तथा विदेशी पर्यटक को 1200 रुपये चुकाने होंगे। हाफ डे पैकेज में भारतीय को 450 रुपये तथा विदेशी को 500 रुपये, तीसरे पैकेज में भारतीय को 550 रुपये तथा 1100 रुपये देने होंगे।
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फुल डे पैकेज: झांसी दर्शन टूरिज्म बस वीरांगना होटल से रेलवे स्टेशन पर सुबह लगभग 9 बजे पहुंचेगी। यहां से पर्यटकों को लेकर वह पहले ओरछा जाएगी। इसके बाद बरुआसागर, जराय मठ, सेंट ज्यूड श्राइन, राजकीय संग्रहालय जाएगी और दोपहर 2 बजे होटल वीरांगना में लंच कराकर एतिहासिक दुर्ग, रानी महल, दतिया व आखिर में किले में लाइट एंड साउंड शो दिखाएगी। रात 8:30 बजे टूरिज्म बस वापस वीरांगना होटल तथा रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी।
हाफ डे पैकेज: इसमें पर्यटक को ओरछा, बरुआसागर, जराय मठ, सेंट ज्यूड श्राइन, राजकीय संग्रहालय में ले जाया जाएगा।
तीसरा पैकेज: इसमें पर्यटक को दोपहर 3 बजे से झांसी का किला, रानी महल, दतिया एवं झांसी के किले में लाइट एंड साउंड दिखाया जाएगा।
इन स्थलों से होगा परिचय
टूरिज्म बस निर्धारित एतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के दीदार के साथ पर्यटन मार्ग पर पड़ने वाले बरुआसागर के स्वर्गाश्रम झरना, झोकन बाग सिमेट्री मेमोरियल व पहूज बांध भी दिखाएगी।
ओरछा
ओरछा भले ही श्रीराम राजा सरकार के मंदिर के कारण प्रसिद्ध हो, लेकिन यहां से बहने वाली बेतवा नदी के किनारे कई रमणीक व ऐतिहासिक स्थल हैं, जो दर्शनीय हैं। जहांगीर महल, राज महल, राय प्रवीन महल, लक्ष्मीनारायण मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, फूलबाग, हरदौल की बैठक व सुंदर महल भी पर्यटन और आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
जराय का मठ
झांसी-मऊरानीपुर मार्ग पर बरुआसागर के पास स्थित जराय का मठ के बारे में कहा जाता है कि महाभारत में वर्णित राजगृह की यक्षिणी जरा के नाम से इसे बनवाया गया था। यह मंदिर खजुराहो में बने मंदिरों की तरह स्थापित है। यह मंदिर किसने बनवाया था यह यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 1100 साल पहले नौवीं शताब्दी में कराया गया था। मुगल शासक औरंगजेब ने इस मंदिर की देवी मूर्तियों को खंडित करा दिया था, लेकिन वह मंदिर को पूरी तरह से नहीं तोड़ सका था।
झांसी का संग्रहालय
झांसी किले के पास स्थित संग्रहालय में झांसी की रानी से जुड़ी चित्र गैलरियां व उनके अस्त्र-शस्त्रों के साथ प्राचीन मूर्तियां, परिधान, कांस्य, चांदी, सोने और तांबे के सिक्के देखने मिलते हैं। यहां चंदेल कालीन राजाओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें व गुप्त कालीन मूर्तियां रखी हैं। संग्रहालय में 1857 के विद्रोह में शामिल रहे मंगल पांडेय, तात्या टोपे, झांसी की रानी जैसे कई वीरों की मूर्तियां भी हैं।
दतिया
झांसी-ग्वालियर मार्ग पर मध्यप्रदेश का शहर दतिया पीतांबरा माता मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। देश के इस प्रमुख शक्ति पीठ पर दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन के लिए आते हैं। दतिया में कई प्राचीन महल भी दर्शनीय हैं। 17वीं शताब्दी में बना बीर सिंह महल उत्तर भारत की सबसे बेहतरीन इमारतों में से एक है।
झांसी का किला
झांसी में बंगरा नाम की पहाड़ी पर बना यह किला 1613 में ओरछा के बुंदेला राजा वीर सिंह जूदेव ने बनवाया था। 25 वर्षों तक बुंदेलों ने यहां राज्य किया बाद में यह मराठा शासक के अधिकार में आ गया था। मराठा शासक नारुशंकर ने इस दुर्ग में कई परिवर्तन कराया और इसे शंकरगढ़ नाम दिया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। किले में शिव मंदिर, गणेश मंदिर, बारादरी, पंचमहल, कड़क बिजली तोप पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
ये नहीं देखा तो क्या देखा
झांसी दर्शन टूरिज्म बस जिन स्मारकों व स्थानों का दर्शन करा रही है, उसके अलावा भी कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जिन्हें देखे बिना झांसी का दर्शन अधूरा है। पर्यटकों को लुभाने वाले यह मनोरम स्थल अगर आपने नहीं देखे तो झांसी में कुछ नहीं देखा।
गढ़मऊ झील- झांसी शहर के पास स्थित गढ़मऊ झील पहाड़ियों के बीच होने से काफी मनोरम स्थल है। सर्दियों में यहां विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते है।
लक्ष्मी ताल- बुंदेलों, गुसाइयों व मराठों द्वारा विकसित लक्ष्मी तालाब के चारों ओर मंदिरों की श्रृंखला है, इनमें मराठाओं द्वारा निर्मित लक्ष्मी मंदिर के अलावा महाकाली मंदिर, नवग्रह मंदिर भी है।
गंगाराव राव की छतरी- महाराजा गंगाधर राव की छतरी लक्ष्मी तालाब के तट पर है, जिसे राव की छतरी भी कहते है, इसे रानी लक्ष्मीबाई ने बनवाया था। यह एकमात्र स्थान है, जहां राजा गंगाधर राव की प्रतिमा है।
पानी वाली धर्मशाला- चंदेल कालीन इस जलाशय में गहरे कुएं है। हजारिया महादेव मंदिर, मां अन्नपूर्णा का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है।
गणेश मंदिर- महाराष्ट्रीय समाज के इस प्राचीन मंदिर में राजा गंगाधर राव व रानी लक्ष्मी बाई का विवाह हुआ था। कई एतिहासिक कार्यक्रमों का साक्षी यह मंदिर पानी वाली धर्मशाला के पास है।
झोकन बाग- 1857 की क्रांति में झोकनबाग अंग्रेज अधिकारियों व उनके परिवार के सदस्यों का कत्लगाह बना था। बाद में ब्रिट्रिश शासन ने झोकनबाग में स्मारक बनाया था।
नारायण बाग- लक्ष्मी तालाब से लगा नारायण बाग अपने हरियाली से मन को शांति प्रदान करता है। यहां केवडे़ के बाग वर्षा के दौरान समूचे माहौल को सुगंध से भर देते है।
करगुवां जैन मंदिर- मेडिकल कॉलेज के सामने करगुवां क्षेत्र में प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल है। यहां जैन तीर्थंकरों की अत्यन्न प्राचीन मूर्तियां है।
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सुबह नौ बजे वीरांगना होटल से शुरू होकर यह बस पहले ओरछा फिर बरुआसागर, झांसी होती हुई दतिया जाएगी और वापस झांसी आएगी। रात 8.30 बजे इसका सफर पूरा होगा। बस के किराए में वरिष्ठ नागरिकों को छूट नहीं रहेगी। यात्रा करने वाले पर्यटकों को पानी, गाइड तथा पर्यटन से पुस्तक दी जाएगी। वीरांगना होटल के प्रबंधक मुकुल गुप्ता ने बताया कि बस में सफर के लिए टिकट वीरांगना होटल, रेलवे स्टेशन स्थित पर्यटन सुविधा केंद्र से खरीदा जा सकता है, इसके अलावा बस में भी टिकट खरीदा जा सकता है। झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा दिए गए 12 लाख रुपये से यह टूरिज्म बस खरीदी गई। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डा. कल्याण सिंह यादव ने बताया कि 27 सितंबर को टूरिज्म बस का उद्घाटन मंडलायुक्त से कराया जाना प्रस्तावित है।
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तीन पैकेज हैं पर्यटकों को
झांसी दर्शन टूरिज्म बस में सफर करने के लिए पर्यटकों को तीन पैकेज है। फुल डे पैकेज में भारतीय को 650 रुपये तथा विदेशी पर्यटक को 1200 रुपये चुकाने होंगे। हाफ डे पैकेज में भारतीय को 450 रुपये तथा विदेशी को 500 रुपये, तीसरे पैकेज में भारतीय को 550 रुपये तथा 1100 रुपये देने होंगे।
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फुल डे पैकेज: झांसी दर्शन टूरिज्म बस वीरांगना होटल से रेलवे स्टेशन पर सुबह लगभग 9 बजे पहुंचेगी। यहां से पर्यटकों को लेकर वह पहले ओरछा जाएगी। इसके बाद बरुआसागर, जराय मठ, सेंट ज्यूड श्राइन, राजकीय संग्रहालय जाएगी और दोपहर 2 बजे होटल वीरांगना में लंच कराकर एतिहासिक दुर्ग, रानी महल, दतिया व आखिर में किले में लाइट एंड साउंड शो दिखाएगी। रात 8:30 बजे टूरिज्म बस वापस वीरांगना होटल तथा रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी।
हाफ डे पैकेज: इसमें पर्यटक को ओरछा, बरुआसागर, जराय मठ, सेंट ज्यूड श्राइन, राजकीय संग्रहालय में ले जाया जाएगा।
तीसरा पैकेज: इसमें पर्यटक को दोपहर 3 बजे से झांसी का किला, रानी महल, दतिया एवं झांसी के किले में लाइट एंड साउंड दिखाया जाएगा।
इन स्थलों से होगा परिचय
टूरिज्म बस निर्धारित एतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के दीदार के साथ पर्यटन मार्ग पर पड़ने वाले बरुआसागर के स्वर्गाश्रम झरना, झोकन बाग सिमेट्री मेमोरियल व पहूज बांध भी दिखाएगी।
ओरछा
ओरछा भले ही श्रीराम राजा सरकार के मंदिर के कारण प्रसिद्ध हो, लेकिन यहां से बहने वाली बेतवा नदी के किनारे कई रमणीक व ऐतिहासिक स्थल हैं, जो दर्शनीय हैं। जहांगीर महल, राज महल, राय प्रवीन महल, लक्ष्मीनारायण मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, फूलबाग, हरदौल की बैठक व सुंदर महल भी पर्यटन और आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
जराय का मठ
झांसी-मऊरानीपुर मार्ग पर बरुआसागर के पास स्थित जराय का मठ के बारे में कहा जाता है कि महाभारत में वर्णित राजगृह की यक्षिणी जरा के नाम से इसे बनवाया गया था। यह मंदिर खजुराहो में बने मंदिरों की तरह स्थापित है। यह मंदिर किसने बनवाया था यह यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 1100 साल पहले नौवीं शताब्दी में कराया गया था। मुगल शासक औरंगजेब ने इस मंदिर की देवी मूर्तियों को खंडित करा दिया था, लेकिन वह मंदिर को पूरी तरह से नहीं तोड़ सका था।
झांसी का संग्रहालय
झांसी किले के पास स्थित संग्रहालय में झांसी की रानी से जुड़ी चित्र गैलरियां व उनके अस्त्र-शस्त्रों के साथ प्राचीन मूर्तियां, परिधान, कांस्य, चांदी, सोने और तांबे के सिक्के देखने मिलते हैं। यहां चंदेल कालीन राजाओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें व गुप्त कालीन मूर्तियां रखी हैं। संग्रहालय में 1857 के विद्रोह में शामिल रहे मंगल पांडेय, तात्या टोपे, झांसी की रानी जैसे कई वीरों की मूर्तियां भी हैं।
दतिया
झांसी-ग्वालियर मार्ग पर मध्यप्रदेश का शहर दतिया पीतांबरा माता मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। देश के इस प्रमुख शक्ति पीठ पर दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन के लिए आते हैं। दतिया में कई प्राचीन महल भी दर्शनीय हैं। 17वीं शताब्दी में बना बीर सिंह महल उत्तर भारत की सबसे बेहतरीन इमारतों में से एक है।
झांसी का किला
झांसी में बंगरा नाम की पहाड़ी पर बना यह किला 1613 में ओरछा के बुंदेला राजा वीर सिंह जूदेव ने बनवाया था। 25 वर्षों तक बुंदेलों ने यहां राज्य किया बाद में यह मराठा शासक के अधिकार में आ गया था। मराठा शासक नारुशंकर ने इस दुर्ग में कई परिवर्तन कराया और इसे शंकरगढ़ नाम दिया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। किले में शिव मंदिर, गणेश मंदिर, बारादरी, पंचमहल, कड़क बिजली तोप पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
ये नहीं देखा तो क्या देखा
झांसी दर्शन टूरिज्म बस जिन स्मारकों व स्थानों का दर्शन करा रही है, उसके अलावा भी कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जिन्हें देखे बिना झांसी का दर्शन अधूरा है। पर्यटकों को लुभाने वाले यह मनोरम स्थल अगर आपने नहीं देखे तो झांसी में कुछ नहीं देखा।
गढ़मऊ झील- झांसी शहर के पास स्थित गढ़मऊ झील पहाड़ियों के बीच होने से काफी मनोरम स्थल है। सर्दियों में यहां विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते है।
लक्ष्मी ताल- बुंदेलों, गुसाइयों व मराठों द्वारा विकसित लक्ष्मी तालाब के चारों ओर मंदिरों की श्रृंखला है, इनमें मराठाओं द्वारा निर्मित लक्ष्मी मंदिर के अलावा महाकाली मंदिर, नवग्रह मंदिर भी है।
गंगाराव राव की छतरी- महाराजा गंगाधर राव की छतरी लक्ष्मी तालाब के तट पर है, जिसे राव की छतरी भी कहते है, इसे रानी लक्ष्मीबाई ने बनवाया था। यह एकमात्र स्थान है, जहां राजा गंगाधर राव की प्रतिमा है।
पानी वाली धर्मशाला- चंदेल कालीन इस जलाशय में गहरे कुएं है। हजारिया महादेव मंदिर, मां अन्नपूर्णा का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है।
गणेश मंदिर- महाराष्ट्रीय समाज के इस प्राचीन मंदिर में राजा गंगाधर राव व रानी लक्ष्मी बाई का विवाह हुआ था। कई एतिहासिक कार्यक्रमों का साक्षी यह मंदिर पानी वाली धर्मशाला के पास है।
झोकन बाग- 1857 की क्रांति में झोकनबाग अंग्रेज अधिकारियों व उनके परिवार के सदस्यों का कत्लगाह बना था। बाद में ब्रिट्रिश शासन ने झोकनबाग में स्मारक बनाया था।
नारायण बाग- लक्ष्मी तालाब से लगा नारायण बाग अपने हरियाली से मन को शांति प्रदान करता है। यहां केवडे़ के बाग वर्षा के दौरान समूचे माहौल को सुगंध से भर देते है।
करगुवां जैन मंदिर- मेडिकल कॉलेज के सामने करगुवां क्षेत्र में प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल है। यहां जैन तीर्थंकरों की अत्यन्न प्राचीन मूर्तियां है।