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सिंगापुर और भारत की तोपों ने दागे गोले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 12:10 AM IST
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सिंगापुर और भारत की तोपों ने दागे गोले
- फोटो : demo
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बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में तेरह दिन से भारत और सिंगापुर की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास जारी है, जो शनिवार को खत्म होगा। शुक्रवार को युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने अपनी-अपनी तोपों से लक्ष्य पर निशाना साधते हुए गोले बरसाए। इससे फील्ड फायरिंग रेंज युद्ध के मैदान में तब्दील नजर आया। दोनों सेनाओं ने अपने - अपने सैन्य कौशल को साझा किया।
बबीना छावनी के फील्ड फायरिंग रेंज में पांच मार्च से सिंगापुर और भारतीय सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘एक्सरसाइज बोल्ड कुरुक्षेत्र-2017’ शुरू हुआ था, जिसमें दोनों देशों के ढाई-ढाई सौ जवान और अफसर शामिल रहे। युद्धाभ्यास के लिए सिंगापुर की सेना अपने साथ तोप और अन्य हथियार लेकर आई है। अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं ने आपसी समझ और एक दूसरे के हथियारों के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही लक्ष्य पर निशाना साधते हुए उसे कुशलता से भेदने के तौर-तरीकों का भी आदान-प्रदान किया।
शुक्रवार की सुबह फील्ड फायरिंग रेंज में संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं को भारतीय सेना के व्हाइट टाइगर डिवीजन के कार्यवाहक जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सिंगापुर सेना के ब्रिगेडियर जनरल अल्फ्रेड फॉक्स ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त युद्धाभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं की सैन्य क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई है। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा। इस दौरान दोनों अफसरों ने एकदूसरे को अपनी सेनाओं के स्मृति चिह्न भेंट किए। युद्धाभ्यास में सिंगापुर आर्मी के रक्षा सलाहकार कर्नल लून तीयान युआन रिचर्ड, चीफ इंजीनियर ऑफिसर कर्नल ओंग योग लांग तथा ब्रिगेड कमांडर एसएलटीसी वू सिन बून शामिल रहे।
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ग्यारहवीं बार हुआ संयुक्त युद्धाभ्यास
इससे पहले भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच दस बार संयुक्त युद्धाभ्यास हो चुका है। साल 2003 में भारत और सिंगापुर के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के बाद से यह क्रम बना हुआ है। इस समझौते में सैन्य सहयोग विस्तार, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य तकनीकी का विकास और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल था।
सिंगापुर की सेना में भारतीय
युद्धाभ्यास के लिए आई सिंगापुर की सेना में कई जवान भारतीय मूल के नजर आए। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि मुंबई से भी छोटे सिंगापुर की आबादी लगभग पचास लाख है। इस आबादी में दस फीसदी हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। कारोबार हो या सेना, सभी क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोग सिंगापुर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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बबीना छावनी के फील्ड फायरिंग रेंज में पांच मार्च से सिंगापुर और भारतीय सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘एक्सरसाइज बोल्ड कुरुक्षेत्र-2017’ शुरू हुआ था, जिसमें दोनों देशों के ढाई-ढाई सौ जवान और अफसर शामिल रहे। युद्धाभ्यास के लिए सिंगापुर की सेना अपने साथ तोप और अन्य हथियार लेकर आई है। अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं ने आपसी समझ और एक दूसरे के हथियारों के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही लक्ष्य पर निशाना साधते हुए उसे कुशलता से भेदने के तौर-तरीकों का भी आदान-प्रदान किया।
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शुक्रवार की सुबह फील्ड फायरिंग रेंज में संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं को भारतीय सेना के व्हाइट टाइगर डिवीजन के कार्यवाहक जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सिंगापुर सेना के ब्रिगेडियर जनरल अल्फ्रेड फॉक्स ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त युद्धाभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं की सैन्य क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई है। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा। इस दौरान दोनों अफसरों ने एकदूसरे को अपनी सेनाओं के स्मृति चिह्न भेंट किए। युद्धाभ्यास में सिंगापुर आर्मी के रक्षा सलाहकार कर्नल लून तीयान युआन रिचर्ड, चीफ इंजीनियर ऑफिसर कर्नल ओंग योग लांग तथा ब्रिगेड कमांडर एसएलटीसी वू सिन बून शामिल रहे।
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ग्यारहवीं बार हुआ संयुक्त युद्धाभ्यास
इससे पहले भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच दस बार संयुक्त युद्धाभ्यास हो चुका है। साल 2003 में भारत और सिंगापुर के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के बाद से यह क्रम बना हुआ है। इस समझौते में सैन्य सहयोग विस्तार, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य तकनीकी का विकास और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल था।
सिंगापुर की सेना में भारतीय
युद्धाभ्यास के लिए आई सिंगापुर की सेना में कई जवान भारतीय मूल के नजर आए। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि मुंबई से भी छोटे सिंगापुर की आबादी लगभग पचास लाख है। इस आबादी में दस फीसदी हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। कारोबार हो या सेना, सभी क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोग सिंगापुर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।