फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Tomorrow the water streams became calm, eight rivers on the verge of extinction

कल-कल करतीं जल धाराएं हुईं शांत, विलुप्त होने की कगार पर आठ नदियां

Mon, 27 Jun 2022 11:12 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jun 2022 11:12 PM IST
विज्ञापन
Tomorrow the water streams became calm, eight rivers on the verge of extinction
झांसी। पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड में नदियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। मंडल के तीनों जिलों में आठ नदियों की कल-कल करतीं जल धाराएं अब शांत हो चुकी हैं। बारिश के दिनों में ही कुछ समय के लिए पानी जमा होने पर इनके अवशेष नजर आते हैं। वरना, बाकी दिनों में नदी सपाट मैदान जैसी दिखती हैं। जबकि, किसी जमाने में ये नदियां पीने का पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेतों की प्यास भी बुझाती थीं।
विज्ञापन

देश में बुंदेलखंड की पहचान सूखाग्रस्त इलाके के रूप में होती है। मानसून यहां सामान्य बारिश का आंकड़ा छूने से पहले ही विदा हो जाता है। इससे भूगर्भ जल का स्तर तो लगातार नीचे खिसक ही रहा है, साथ ही अब नदियों पर भी संकट मंडराने लगा है। मंडल के झांसी, ललितपुर, व जालौन जनपद की आठ नदियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। इनमें झांसी की बोरा, कनेरा व घुरारी नदी, ललितपुर की उतारी व शौर तथा जालौन जनपद की मलंगा, कैमर व मिरगा नदी शामिल हैं। इन नदियों में वर्षाकाल में कुछ समय के लिए पानी जमा होता है, हालांकि ये तब भी नाले जैसी ही दिखती हैं। इसके बाद तकरीबन दस महीनों तक इन नदियों में पानी नजर नहीं आता है। नदियों की तलहटी सपाट मैदान सी दिखती है।
विज्ञापन

अस्तित्व के लिए जूझ रहीं ये नदियां
- बोरा नदी (झांसी) - ये नदी मऊरानीपुर तहसील के बढ़वार एवं उल्दन के आसपास से गुजरती थी। ये स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र भी थी।
- कनेरा नदी (झांसी) - बबीना ब्लॉक के हजारों किसानों को सिंचाई का पानी इस नदी से प्राप्त होता था, लेकिन अब इसका अस्तित्व संकट में है।
- घुरारी (झांसी) - मप्र से निकलकर ये नदी बेतवा में मिल जाती थी। साल भर इसमें पानी रहता था। लेकिन, अब ये विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
- उतारी (ललितपुर) - ललितपुर के जंगलों से गुजरने वाली ये नदी जंगली जानवरों के लिए जीवनदायिनी होती थी। लेकिन, अब ये नदी लगभग विलुप्त हो चुकी है।
- शौर (ललितपुर) - मडौरा इलाके से ये नदी वहां के जंगलों से निकलती है और आगे चलकर धसान नदी में मिलती है। लेकिन, अब इसका अस्तित्व खतरे में है।
- मलंगा (जालौन) - कोंच से निकलने वाली इस नदी में किसी जमाने में वर्षाकाल में बाढ़ आती थी। क्षेत्र की सिंचाई इसी पर आश्रित थी, परंतु अब ये नाला बन चली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- कैमर (जालौन) - ये नदी किसी जमाने में इलाके के लिए वरदान मानी जाती थी। आसपास की आबादी पानी के लिए इसी नदी पर आश्रित थी, परंतु अब ये अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आती है।

- मिरगा (जालौन) - कदौरा व जोलूपुर के बीच में बहने वाली इस नदी में साल भर प्रवाह रहता था। लेकिन, अब इस नदी के ज्यादातर हिस्से में खेत नजर आते हैं।
कनेरा को बचाने की शुरू हुई पहल
झांसी। कनेरा नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू हुई है। इस नदी की सिल्ट निकालने के साथ-साथ इसके इर्दगिर्द हरित पट्टिका भी विकसित की जा रही है। साथ ही दो चेकडैम भी बनाए जाएंगे। मनरेगा के जरिये ये काम किया जा रहा है। इसके अलावा नदी के पुराने जल स्रोत भी खोजे जा रहे हैं। इसमें सामाजिक संस्था परमार्थ द्वारा बड़ी भूमिका अदा की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed