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तो ‘चोरी’ हो गई थी कैंसर का इलाज करने वाली कोबाल्ट मशीन और सोता रहा मेडिकल प्रशासन!
Sat, 02 Jan 2021 02:17 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2021 02:17 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कैंसर के इलाज में सहायक कोबाल्ट मशीन के संबंध में अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की लिखा पढ़ी देखकर लग रहा है कि मशीन ‘चोरी’ हो गई थी। वो भी इस तरह की कॉलेज प्रशासन को पता भी नहीं चला। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम भेजी गई। इसके बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
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मामला तूल पकड़ने के बाद अब मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की तरफ से नवाबाद थाने में प्रार्थनापत्र देकर कंपनी के खिलाफ चेन्नई की एक कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि यह प्रक्रिया शासन की जांच शुरू होने के बाद ही क्यों शुरू हुई।
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मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग में उपचार के लिए एक मशीन थैराटॉन कोबाल्ट 780 ई वर्ष 2005-06 में स्थापित की गई थी। इसमें लगा हुआ कोबाल्ट सोर्स आयु पूर्ण होने के कारण क्रियाशील नहीं रह गया था। इसको नष्ट करने के लिए चेन्नई की कंपनी को आदेश दिया गया था। बताया गया कि अक्तूबर में कंपनी का स्टाफ सोर्स के साथ-साथ पूरी मशीन ही ले गया।
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बड़ी बात ये है कि मेडिकल कॉलेज के अधिकारी इससे पूरी तरह अंजान रहे। मामला तूल पकड़ा तो हड़कंप मच गया। बीते दिनों कोबाल्ट मशीन न चलने के कारणों की जांच करने आई शासन की टीम ने भी मशीन जाने पर सवाल खड़े किए। अब मेडिकल कॉलेज के अधिकारी हरकत में आए और प्राचार्य की तरफ से नवाबाद थाने में मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया है।
प्राचार्य ने प्रार्थनापत्र में कहा गया है कि कंपनी को सिर्फ कोबाल्ट सोर्स ले जाकर डिस्पोज करने के लिए कोटा तक ट्रांसपोर्टेशन करने के लिए आदेशित किया गया। शेष मशीन को डिस्मेंटल व कलेक्शन करके रेडियोथेरेपी विभाग में ही छोड़ना था। मगर कंपनी वर्क ऑर्डर के निर्देशों के विपरीत संपूर्ण मशीन अपने साथ ले गई, जो कि पूर्णत: गलत है।
पनी से 28 दिसंबर को ई-मेल द्वारा जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मशीन ले जाने की बात स्वीकारी। पत्र के साथ संलग्न कुटेशन से भी यह जानकारी प्राप्त हुई कि कंपनी ने मशीन के स्क्रेप बेचने के लिए कुटेशन प्राप्त किए। इस प्रकार कंपनी ने बिना अधिकृत व्यक्ति की अनुमति के मशीन को ले जाकर आपराधिक कृत्य किया है। प्राचार्य ने मांग की कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
कंपनी को सिर्फ सोर्स को नष्ट करने का आदेश दिया गया था लेकिन वह मशीन ही ले गए। मामला संज्ञान में आने के बाद कंपनी के खिलाफ मुकदमे के लिए नवाबाद थाने में प्रार्थनापत्र दिया गया है। मामले की जांच भी की जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।