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- हॉकी के जादूगर को हजारों लोगों ने दी थी अंतिम विदाई

Fri, 03 Dec 2021 02:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 02:03 AM IST
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Thousands of people had given the last farewell to the magician of hockey
झांसी। भारतीय हॉकी की विश्वविजयी पताका फहराने वाले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के अंतिम दर्शनों के लिए झांसी में हजारों लोग उमड़ पड़े थे। उनके पार्थिव शरीर को हेलीकाप्टर से झांसी लाया गया था। सीपरी बाजार स्थित हीरोज मैदान में अंतिम संस्कार की अनुमति न मिलने पर कई लोग अनशन पर बैठ गए। प्रशासन से अनुमति मिलने पर अंतिम संस्कार किया गया। आज इसी स्थल पर दद्दा की समाधि है, जहां देश - दुनिया के खेल प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पण करने आते हैं।
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हॉकी के जादूगर के करिश्माई खेल ने विश्व के कई महानतम राजनेताओं, खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों को हमेशा प्रभावित रखा। यही कारण है कि देश में उनकी जन्मतिथि 29 अगस्त पर खेल दिवस मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद के पुत्र एवं पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद ने बताया कि उनके पिता ध्यानचंद का निधन एम्स दिल्ली में हुआ था। उस दौरान एम्स के सभी अधिकारी व चिकित्सक मौजूद थे। पार्थिव शरीर को झांसी ले जाने की तैयारियां शुरू हो गई। तत्कालीन केंद्र सरकार ने हेलीकाप्टर का प्रबंध कराया, जो दद्दा के पार्थिव शरीर को लेकर ग्वालियर रोड स्थित हवाई अड्डा पर उतरा। यहां पहले से ही हजारों लोग दद्दा के अंतिम दर्शन के लिए मौजूद थेे। ऐसे में एक खुले ट्रक में उनका पार्थिव शरीर रखा गया, ताकि सभी लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकें। मेजर ध्यानचंद अमर रहे.. के जयघोषों के बीच हीरोज ग्राउंड में उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां हुई। जहां ध्यानचंद जी ने हाकी को संवारा और विकसित किया। लेकिन उस वक्त प्रशासन से यहां पर अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में कई खेल प्रेमी व खिलाड़ी अनशन पर बैठ गए। आखिरकार प्रशासन ने सहमति दी और नम आंखों के बीच लोगों ने अपने प्रिय हॉकी के जादूगर को अंतिम विदाई दी। इससे पहले उनको पंजाब रेजीमेंट ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
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हमेशा अहम रहा हीरोज मैदान
कभी हीरोज मैदान की जमीन ऊबड़ खाबड़ थी। इसी जमीन पर ध्यानचंद हॉकी का अभ्यास करते थे। जब उन्होंने खेल से सन्यास लिया। तब उन्होंने इसी मैदान पर नवोदित खिलाड़ियों को हॉकी की बारीकियां सिखायी। यही वजह है कि यह मैदान आज उनकी समाधि स्थल है। प्रशासन ने हाल में ही इस मैदान में कई विकास कार्य कराए हैं।
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उनकी यह हैं खास विशेषताएं
- देश का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार उनके नाम पर ही दिया जाता है।
- भारत सरकार व राज्य सरकारें उनके नाम पर खिलाड़ियों को पुरस्कार व सम्मान प्रदान करती हैं।
- ध्यानचंद ने 1936 के बर्लिन ओलंपिक के फाइनल मुकाबले में तिरंगा व वंदेमातरम की शपथ ली थी।
- वह देश के पहले खिलाड़ी हैं, जिनकी फोटो के साथ भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया।
- वह पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार तीन ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
- उनकी जन्मतिथि 29 अगस्त को खेल दिवस मनाया जाता है।
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