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यह तहसील है जनाब......चप्पलें घिस जाएंगी पर नहीं होंगे काम

Tue, 10 Aug 2021 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 01:15 AM IST
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This is tehsil sir...........slippers will get worn out in getting the work done.
झांसी सदर तहसील के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों के नहीं होते है काम। संवाद
यह तहसील है जनाब..........चप्पलें घिस जाएंगी काम कराने में
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झांसी। तहसील मेें कर्मचारियों की मनमानी चरम पर है। अधिकारियों का दबाव नहीं होने के कारण तहसील में एक ही काम कराने के लिए लोगों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। छोटा हो या बड़ा काम लेकिन कर्मचारियों द्वारा हर बार कागजों की कमी के साथ ही वक्त नहीं होने की बात कहकर टरकाया जा रहा है। जिसके चलते एक ही काम के लिए कई चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई बार तहसील में चप्पलें घिसने के बाद भी काम अंजाम तक नहीं पहुंचता है।
तहसील में जमीन की नाप, पत्थर गड्डी, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राजस्व के कार्य, उत्तराधिकारी, खसरा खतौनी से संबंधित कार्य सहित कई कार्यों को किया जाता है। जिसके चलते जिले भर के लोग जमीन संबंधी कार्याें के अलावा अन्य कई कार्यों को कराने के लिए आते हैं। लेकिन कर्मचारियों की मनमानी के कारण लोगों को एक ही काम के लिए कई बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। शहरी इलाके के लोगों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसकी शिकायतें भी कई बार अधिकारियों से कई हैं। लेकिन शिकायतों को कोई भी असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिसका खामियाजा तहसील में काम के लिए आने वाले दूरदराज के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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इस संबंध में तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि जनता के लिए मेरे दरवाजे हर समय खुले रहते हैं। कोई भी व्यक्ति को कोई भी परेशानी होने पर मुझसे संपर्क कर सकता है। समस्या का निदान किया जाएगा।
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परिवार में आठ सदस्य हैं। लेकिन अंत्योदय कार्ड पर सिर्फ एक ही सदस्य का नाम है। कार्ड पर अन्य नामों को बढ़वाने के लिए कई सालों से तहसील के चक्कर लगा रहें हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
कम्मूलाल, बरुआसागर
दो साल पहले बीमारी से पति की मृत्यु हो गई थी। नेशनल बेनिफिट स्कीम का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। दो साल से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। कोई भी सुनने वाला नहीं है।
आशादेवी, दिगारा
आधार कार्ड में संशोधन के लिए एक साल पहले आवेदन किया था। लेकिन अभी तक यथा स्थिति है। साल भर में तीन से चार हजार रुपए किराए में बर्बाद कर चुके हैं। अभी तक निदान नहीं हो सका है।

खित्ते, बरुआसागर
पिता के नाम सात बीघा जमीन थी। उनकी मृत्यु हो जाने पर जमीन को स्थानांतरण करने के लिए एक महीने पहले लेखपाल को सभी जरूरी कागजात दे दिए हैं। लेकिन जमीन को स्थानांतरित नहीं किया गया है।
सुभद्रा, भोजला
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