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Jhansi News: खेतों में है गेहूं...बूंदाबांदी के साथ गरज रहे बादल...किसानों को डर कहीं फिर न आ जाए आफत
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। शुक्रवार को दोपहर बाद से अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। बादलों की गड़गड़ाहट के साथ शुरू हुई बूंदाबांदी ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है जिनकी गेहूं पककर खेत में खड़ी है या फिर गहाई के लिए कटी पड़ी है। कुछ जगहों से बरसात की भी सूचना है और वहां गेहूं की फसल को नुकसान भी बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जो गेहूं कटकर खेत में पड़ी है उसके भीगने से दाना काला पड़ सकता है।
इस समय गेहूं कटाई का समय है। कुछ इलाकों में अगैती गेहूं थी वह कट चुकी है जबकि कई जगह कटाई चल रही है। इस समय बदला मौसम का मिजाज गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि शुक्रवार को ज्यादा बरसात नहीं हुई है लेकिन जिस तरह से मौसम विभाग का अनुमान है कि उस हिसाब से एक दो दिन आगे भी बरसात या बूंदाबांदी हो सकती है। ओलावृष्टि की भी संभावना जताई जा रही है। अगर इस समय बरसात हो जाती है तो गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। कृषि अफसरों का कहना है कि इस साल झांसी जनपद में 1.49 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की खेती हुई है। जिसमें 10 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल की कटाई हो चुकी है। बाकी अभी खेत में ही है। ऐसे में मौसम किसानों को बेचैन कर रहा है।
दो मार्च को बरसात और ओलावृष्टि से 68 हजार किसानों को हुआ था 83 करोड़ का नुकसान
झांसी। दो मार्च को जिले भर में बारिश और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे झांसी जिले में गेहूं के 1.49 लाख हेक्टेयर रकबे में शामिल 145 गांवों के 50 हजार हेक्टेअर रकबे पर खड़ी फसल प्रभावित हुई थी। कुदरत की इस मार से 68,599 किसानों को 83 करोड़ रुपये का नुकसान भी झेलना पड़ा। इस आसमानी आफत ने कुछ गावों में तो ऐसा तांडव किया कि वहां खेत के खेत साफ हो गए। प्रशासन और बीमा कंपनियों ने जब फसल बर्बादी का आंकलन किया तो पता चला कि खेतों में खड़ी गेहूं, चना, मटर व सरसों की 33 प्रतिशत फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी हैं। अभी किसानों को मुआवजा दिया ही जा रहा है कि शुक्रवार को फिर से बादलों की गड़बड़ाहट के साथ बूंदाबांदी हो गई।
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फिलहाल ऐसी कोई सूचना नहीं आई है कि शुक्रवार को हुई हल्की बूंदाबांदी से फसल को नुकसान हुआ हो। इस समय वैसे भी गेहूं के अलावा दूसरी उपज नहीं है।
केके सिंह, जिला कृषि अधिकारी, झांसी।
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ये बोले कृषि वैज्ञानिक
शुक्रवार को हुई बारिश से उन फसल को अधिक नुकसान है, जाे कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी गई हैं। किसान फसल के गट्ठे बनाकर रखते हैं, जिसमें अब पानी पड़ने से गेहूं का दाना काला पड़ेगा। साथ ही उसका भंडारण भी अब लंबे समय तक नहीं हो सकेगा। इसके अलावा गेहूं की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. अमित सिंह, कृषि वैज्ञानिक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
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झांसी। शुक्रवार को दोपहर बाद से अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। बादलों की गड़गड़ाहट के साथ शुरू हुई बूंदाबांदी ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है जिनकी गेहूं पककर खेत में खड़ी है या फिर गहाई के लिए कटी पड़ी है। कुछ जगहों से बरसात की भी सूचना है और वहां गेहूं की फसल को नुकसान भी बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जो गेहूं कटकर खेत में पड़ी है उसके भीगने से दाना काला पड़ सकता है।
इस समय गेहूं कटाई का समय है। कुछ इलाकों में अगैती गेहूं थी वह कट चुकी है जबकि कई जगह कटाई चल रही है। इस समय बदला मौसम का मिजाज गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि शुक्रवार को ज्यादा बरसात नहीं हुई है लेकिन जिस तरह से मौसम विभाग का अनुमान है कि उस हिसाब से एक दो दिन आगे भी बरसात या बूंदाबांदी हो सकती है। ओलावृष्टि की भी संभावना जताई जा रही है। अगर इस समय बरसात हो जाती है तो गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। कृषि अफसरों का कहना है कि इस साल झांसी जनपद में 1.49 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की खेती हुई है। जिसमें 10 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल की कटाई हो चुकी है। बाकी अभी खेत में ही है। ऐसे में मौसम किसानों को बेचैन कर रहा है।
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दो मार्च को बरसात और ओलावृष्टि से 68 हजार किसानों को हुआ था 83 करोड़ का नुकसान
झांसी। दो मार्च को जिले भर में बारिश और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे झांसी जिले में गेहूं के 1.49 लाख हेक्टेयर रकबे में शामिल 145 गांवों के 50 हजार हेक्टेअर रकबे पर खड़ी फसल प्रभावित हुई थी। कुदरत की इस मार से 68,599 किसानों को 83 करोड़ रुपये का नुकसान भी झेलना पड़ा। इस आसमानी आफत ने कुछ गावों में तो ऐसा तांडव किया कि वहां खेत के खेत साफ हो गए। प्रशासन और बीमा कंपनियों ने जब फसल बर्बादी का आंकलन किया तो पता चला कि खेतों में खड़ी गेहूं, चना, मटर व सरसों की 33 प्रतिशत फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी हैं। अभी किसानों को मुआवजा दिया ही जा रहा है कि शुक्रवार को फिर से बादलों की गड़बड़ाहट के साथ बूंदाबांदी हो गई।
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फिलहाल ऐसी कोई सूचना नहीं आई है कि शुक्रवार को हुई हल्की बूंदाबांदी से फसल को नुकसान हुआ हो। इस समय वैसे भी गेहूं के अलावा दूसरी उपज नहीं है।
केके सिंह, जिला कृषि अधिकारी, झांसी।
ये बोले कृषि वैज्ञानिक
शुक्रवार को हुई बारिश से उन फसल को अधिक नुकसान है, जाे कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी गई हैं। किसान फसल के गट्ठे बनाकर रखते हैं, जिसमें अब पानी पड़ने से गेहूं का दाना काला पड़ेगा। साथ ही उसका भंडारण भी अब लंबे समय तक नहीं हो सकेगा। इसके अलावा गेहूं की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. अमित सिंह, कृषि वैज्ञानिक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।