फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   There is no safety cover in the trains... the journey of passengers is dangerous

Jhansi News: ट्रेनों में नहीं है सुरक्षा कवच... खतरनाक है मुसाफिरों का सफर

Mon, 05 Jun 2023 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jun 2023 12:36 AM IST
विज्ञापन
There is no safety cover in the trains... the journey of passengers is dangerous
ओडिशा में हुए रेल हादसे के बाद चर्चा में है रेलवे की यह सुरक्षा प्रणाली
विज्ञापन

भारी पड़ सकता है यात्रियों की संरक्षा से खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो

ललितपुर। दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए रेलवे की ओर से दो साल पहले कवच प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इसे ट्रैक और ट्रेनों के इंजनों में लगाया जाना था। लेकिन, अब तक यह झांसी रेल मंडल के मुख्य ट्रैक तक पर नहीं लग पाई है। इसके अलावा इक्का-दुक्का प्रीमियम ट्रेनों को छोड़कर यहां से शुरू होने वालीं व गुजरने वालीं किसी भी ट्रेन को कवच अब तक नहीं मिल पाया है। रेलवे की यह अनदेखी यात्रियों की संरक्षा पर कभी भी भारी पड़ सकती है।



ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे की जांच में सामने आया है कि यह ट्रैक कवच प्रणाली से लैस नहीं था। यदि रेलवे की ओर से सुरक्षा का यह इंतजाम किया गया होता तो हादसा नहीं होता। झांसी रेल मंडल भी अभी तक इस प्रणाली से अछूता बना हुआ है। यहां तक कि मंडल के 296 किलोमीटर लंबे मुख्य ट्रैक तक को इससे लैस नहीं किया जा सका है। इसके अलावा यहां से रोजाना गुजरने वाली 195 ट्रेनों में से वंदेभारत, शताब्दी और राजधानी को छोड़कर अन्य किसी में कवच प्रणाली नहीं है।
विज्ञापन


झांसी रेल मंडल से शुरू होने वाली प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस, झांसी-कोलकाता एक्सप्रेस, झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस, ग्वालियर बरौनी मेल, बुंदेलखंड एक्सप्रेस व ताज एक्सप्रेस में भी यह सिस्टम अभी तक नहीं लगाया जा सका है। जबकि, रेलवे की यह अनदेखी यात्रियों की सुरक्षा पर कभी भी भारी पड़ सकती है। हालांकि, ओडिशा में हुए रेल हादसे के बाद रेलवे की ओर से अब तेजी से कवच प्रणाली से रेल मंडलों को लैस किए जाने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन




स्वत: लग जाता है ट्रेन में ब्रेक
झांसी। कवच (एंटी-ट्रेन टक्कर प्रणाली) लोको पायलट को उस वक्त एलर्ट करता है, जब वह किसी सिग्नल (सिग्नल पार एट डेंजर-स्पैड) को पार कर जाता है। आमतौर ट्रेनों की टक्कर की प्रमुख वजह यह ही होती है। इसके अलावा इस तकनीक में जब ट्रेन ऐसे सिग्नल से गुजरती है, जहां से गुजरने की अनुमति नहीं होती है, तो कवच के जरिये खतरे वाला सिग्नल भेजा जाता है। इसके बाद भी यदि लोको पायलट ट्रेन रोकने में विफल साबित होता है, तो फिर कवच तकनीक के जरिये ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाते हैं, जिससे ट्रेन हादसे से बच जाती है।


कवच प्रणाली से ट्रैक और ट्रेनों को लैस किए जाने काम तेजी से जारी है। जल्द ही झांसी रेल मंडल में भी सुरक्षा का यह उपाय कर लिया जाएगा। रेलवे यात्रियों की संरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed