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Jhansi News: लूू के थपेड़ों से बचाव के लिए बसों में नहीं कोई इंतजाम, यात्री हो रहे परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। भीषण गर्मी में तप रही रोडवेज की बसों में यात्रा करना दुश्वार हो गया है। कानपुर रोड स्थित बस अड्डे पर बसों को छांव में खड़ा करने से लेकर यात्रियों के बैठने और ठंडी हवा तक के कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में धूप में तपती बसों में बैठकर सफर करना यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है।
झांसी प्रदेश ही नहीं, देश के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गया है। गर्मी से जनजीवन प्रभावित है। वहीं सफर में भी यात्रियों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या इन दिनों परिवहन निगम की साधारण बसों में देखा जा रहा है। बुधवार को कानपुर रोड स्थित बस अड्डे पर बसों को छांव में खड़ा करने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। ऐसे में करीब 45 डिग्री तापमान में दिनभर दर्जनों बसें तेज धूप में खड़ी रहीं। इससे उनके भीतर बैठना आसान नहीं है। यहां बैठने के लिए टीनशेड है, लेकिन पंख न चलने से यह तपता रहा। बसों में शीशे भी जाम दिखे तो कुछ के फाटक भी जर्जर थे। बात सफर की करें तो गर्मी में यात्री रास्ते भर पसीना बहाते हुए सफर तय करने को मजबूर हैं। ऊपर से तपती छत और खिड़कियों से लू के थपेड़ों की वजह से यात्रा में दुश्वारियां बनी हुई हैं। यही वजह है कि गर्मी में साधारण बसों से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में कमी हो रही है।
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घटे 40 फीसदी यात्री, हर रोज 5 लाख का नुकसान
वर्तमान में झांसी डिपो के पास 129 बसें हैं। इन बसों में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 12 हजार यात्री सफर करते हैं। बुधवार को पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। बसों में यात्रा करने वाले लोग खासे परेशान दिखाई दिए। अब ऐसे में यात्री इन बसों में यात्रा करने से कतरा भी रहे हैं। इसके चलते परिवहन निगम की आय पर इसका असर पड़ा है। बताया गया कि करीब 40 फीसदी यात्रियों की संख्या घट गई है। रोजाना होने वाली आय में 5 लाख रुपये का नुकसान निगम को उठाना पड़ रहा है। वहीं, रोजवेज बसों के यात्रियों का कहना है कि परिवहन निगम भले ही गर्मी में थोड़ा किराया बढ़ा दे, लेकिन हर सीट पर कम से कम पंखे की व्यवस्था करा दे। दरअसल बसों की छत टिन की होने की वजह से गर्मी में सफर काफी मुसीबत भरा साबित हो रहा है।
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निगम की बसों में नहीं है ओआरएस और फर्स्ट एड किट
निगम की बस में यात्रा के दौरान अगर किसी यात्री को कोई समस्या होती है तो उसे राहत देने के लिए कोई साधन भी नहीं है। भीषण गर्मी के बावजूद अधिकांश बसों में प्राथमिक चिकित्सा किट और ओआरएस की व्यवस्था नहीं की गई है।
वर्जन
बसों में कोई कमी है तो उसके लिए कार्रवाई कर सुधार कार्य के निर्देश दिए जाएंगे। बसों में हवा की कोई व्यवस्था नहीं होती, जिसके चलते बसों से यात्री सफर करना कम पसंद करते हैं। यही वजह है कि वर्तमान में लोड फैक्टर भी कम हो गया है। - संतोष कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, उप्र परिवहन निगम, झांसी