{"_id":"690cfc0702b0e6b4ef01556c","slug":"there-is-hope-for-a-concrete-road-to-manjubara-chhingewara-jhansi-news-c-332-1-ban1001-101732-2025-11-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: मंजुबारा-छिंगेवारा तक पक्की सड़क बनने की उम्मीद जागी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: मंजुबारा-छिंगेवारा तक पक्की सड़क बनने की उम्मीद जागी
विज्ञापन
- आने जाने के लिए बैलगाड़ी पर निर्भर हैं यहां के लाेग- पिछले दिनों अस्पताल पहुंचने से पहले ही वृद्ध ने तोड़ दिया था दम
फॉलोअप
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगरा। ग्राम पंचायत मगरवारा अंतर्गत खिरक मंजुबारा-छिंगेवारा मजरा मुख्य सड़क से तीन किलोमीटर दूर बसा है। संपर्क मार्ग कीचड़ और कंटीली झाड़ियों से पटा पड़ा है। पिछले दिनों प्रसूता के बैलगाड़ी से एंबुलेंस तक पहुंचने और वृद्ध की रास्ते में मौत हो जाने के बाद अब प्रशासन ने इसकी सुध ली है। बृहस्पतिवार को लेखपाल और प्रधान समेत अन्य लोगों ने यहां पहुंचकर जायजा लिया। इससे अब जल्द ही पक्की सड़क के बनने की उम्मीद जाग उठी है।
पिछले दिनों में प्रसूता को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। प्रसव पीड़ा को सहते हुए महिला ने तीन किमी का सफर बैलगाड़ी से तय करना पड़ा। प्रसव के बाद भी फिर जच्चा बच्चा को बैलगाड़ी से ही घर तक आना पड़ा था। इसी प्रकार, कुछ दिन पहले किसान को आपात स्थिति में बैलगाड़ी से ले जाना पड़ा। लेकिन वह समय से अस्पताल नहीं पहुंच सका और रास्ते में ही दम तोड़ दिया। दोनों ही खबरें अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
संपर्क मार्ग जर्जर होने से यहां रह रही करीब डेढ़ हजार लोगों की आबादी आज भी सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोग बैलगाड़ी पर ही निर्भर हैं। इसी कारण यह मजरा हाल ही के दिनों में खासा सुर्खियों में भी रहा। अब लोक निर्माण विभाग, खंड विकास कार्यालय समेत अन्य विभाग के अधिकारी यहां स्थिति का जायजा लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
इस मौके पर लेखपाल अपूर्वा अग्रवाल, ग्राम प्रधान मुन्नी देवी रामेश्वर कुशवाहा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
फॉलोअप
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगरा। ग्राम पंचायत मगरवारा अंतर्गत खिरक मंजुबारा-छिंगेवारा मजरा मुख्य सड़क से तीन किलोमीटर दूर बसा है। संपर्क मार्ग कीचड़ और कंटीली झाड़ियों से पटा पड़ा है। पिछले दिनों प्रसूता के बैलगाड़ी से एंबुलेंस तक पहुंचने और वृद्ध की रास्ते में मौत हो जाने के बाद अब प्रशासन ने इसकी सुध ली है। बृहस्पतिवार को लेखपाल और प्रधान समेत अन्य लोगों ने यहां पहुंचकर जायजा लिया। इससे अब जल्द ही पक्की सड़क के बनने की उम्मीद जाग उठी है।
पिछले दिनों में प्रसूता को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। प्रसव पीड़ा को सहते हुए महिला ने तीन किमी का सफर बैलगाड़ी से तय करना पड़ा। प्रसव के बाद भी फिर जच्चा बच्चा को बैलगाड़ी से ही घर तक आना पड़ा था। इसी प्रकार, कुछ दिन पहले किसान को आपात स्थिति में बैलगाड़ी से ले जाना पड़ा। लेकिन वह समय से अस्पताल नहीं पहुंच सका और रास्ते में ही दम तोड़ दिया। दोनों ही खबरें अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
विज्ञापन
संपर्क मार्ग जर्जर होने से यहां रह रही करीब डेढ़ हजार लोगों की आबादी आज भी सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोग बैलगाड़ी पर ही निर्भर हैं। इसी कारण यह मजरा हाल ही के दिनों में खासा सुर्खियों में भी रहा। अब लोक निर्माण विभाग, खंड विकास कार्यालय समेत अन्य विभाग के अधिकारी यहां स्थिति का जायजा लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
इस मौके पर लेखपाल अपूर्वा अग्रवाल, ग्राम प्रधान मुन्नी देवी रामेश्वर कुशवाहा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।