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Jhansi News: एसी कोच में बढ़ी चोरियां, रडार पर कोच अटेंडेंट

Mon, 08 Jun 2026 02:16 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 02:16 AM IST
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Thefts on the rise in AC coaches; coach attendants under scrutiny.
संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। ट्रेनों के एसी कोच में बढ़ रही चोरी की घटनाओं से अब कोच अटेंडेंट जीआरपी के रडार पर है। कुछ घटनाओं में यात्रियों से पूछताछ के बाद मिली महत्वपूर्ण जानकारी व छानबीन के बाद जीआरपी ने संदेह के आधार पर गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
पिछले कई माह से ट्रेनों के एसी कोच में लगातार चोरी की बढ़ रही घटनाओं के बाद यात्री कोच अटेंडेंट की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते रहे हैं। पिछले दिनाें एक विशेष ट्रेन के एसी कोच में चोरी की घटनाओं को लेकर जीआरपी की छानबीन में कुछ कोच अटेंडेंट की तैनाती पाए जाने के बाद राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने अटेंडेंट को रडार पर लेकर जांच गोपनीय जांच शुरू की। इसमें कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिससे जीआरपी का संदेह गहरा गया और फोर्स ने शिकंजा कसना शुरू किया तो कोच अटेंडेंट की गाड़ी बदल दी गई।
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जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि एसी कोच में तैनात कोच अटेंडेंट की जिम्मेदारी है कि कोई बाहरी यात्री बिना टिकट एसी कोच में सवार न हो। यदि कोई जबरन सवार हुआ है तो तत्काल इसकी जानकारी ट्रेन में तैनात सुरक्षा कर्मियों और टीटीई स्टाफ को देनी चाहिए। बावजूद इसके लगातार एसी कोच में यात्री सामान चोरी की घटनाएं घटित होने पर कुछ कोच अटेंडेंट की छानबीन की गई है। महत्वपूर्ण सुराग भी हाथ लगे है। जीआरपी गोपनीय जांच कर रही है।
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इनसेट
गाड़ियों में सीसीटीवी है तो डीवीआर नहीं
गरीब रथ एक्सप्रेस (12593) में सात दिसंबर 2025 को जी-17 कोच की सीट नंबर 4 और 5 पर सवार दो महिला यात्रियों के साथ झांसी आउटर पर छिनैती की वारदात हुई थी। प्राथमिकी दर्ज कराने पर जीआरपी ने सीसीटीवी कोच में लगा देख मामला के खुलासे में जुट गई, जीआरपी ने जांच की तो उसे रेलवे विभाग ने जवाब दिया कि सीसीटीवी का डीवीआर नहीं है। तीन सप्ताह तक रेलवे के चक्कर काटने के बाद जीआरपी की जांच पूरी नहीं हो सकी।

इनसेट
जीआरपी के पास कोच अटेंडेंट का रिकार्ड नहीं
जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी कोच अटेंडेंट ठेके पर रखे जाते है। इसका कोई रिकार्ड जीआरपी के पास नहीं है। ऐसे में कोच अटेंडेंट के रिकार्ड के लिए जीआरपी को संबंधित जोनल व मंडल रेलवे से संपर्क करना पड़ता है। ऐसे में गोपनीय जांच के लीक होने की पूरी संभावना रहती है। वहीं संबंधित रेलवे से भी जानकारी लेने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
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