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अलौकिक है साढ़े तीन सौ साल पुराना कुं ज बिहारी मंदिर
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झांसी। शहर का साढ़े तीन सौ साल पुराना बीकेडी स्थित श्री कुं ज बिहारी मंदिर श्रद्धा और अलौकिक शक्ति का प्रतीक है। मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की अद्तिीय मूर्ति देखते ही बनती है। हर वर्ष जन्माष्टमी पर यहां भगवान का सुंदर शृंगार कर उनकी झांकी सजाई जाती है।
सेवादार पवन दास बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना कुंज बिहारी बाबा ने साढ़े तीन सौ साल पहले की थी। मूर्ति भी प्राचीन है। मंदिर में हर दिन अलग-अलग भोग प्रसाद लगता है। मंदिर की यह परंपरा रही है कि यहां जो भी महंत होगा वह मंदिर से बाहर नहीं जाएगा। मंदिर में कभी कोई चंदा नहीं मांगा गया। भक्त स्वेच्छा से जो भी दान करते हैं वह ही दान लिया जाता है। मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि परिसर में जितने भी फूल-पौधे हैं उन्हें कभी तोड़ा नहीं जाता, रोज उनकी पूजा की जाती है।
मंदिर राधामोहन महाराज वर्ष में कई महीनों के लिए एकांतवास कर साधना में लीन होते हैं, इस दौरान कोई उनके दर्शन नहीं कर पाता है। देवोत्थान एकादशी पर उनके दर्शन सुलभ होते हैं। जन्माष्टमी पर मंदिर में सुंदर झांकी सजाकर भगवान का अभिषेक किया जाता है। परिसर में बधाई गाई जाती है, उत्सव रूप में रात 12 बजे भगवान का जन्म मनाते हैं, इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है।
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सेवादार पवन दास बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना कुंज बिहारी बाबा ने साढ़े तीन सौ साल पहले की थी। मूर्ति भी प्राचीन है। मंदिर में हर दिन अलग-अलग भोग प्रसाद लगता है। मंदिर की यह परंपरा रही है कि यहां जो भी महंत होगा वह मंदिर से बाहर नहीं जाएगा। मंदिर में कभी कोई चंदा नहीं मांगा गया। भक्त स्वेच्छा से जो भी दान करते हैं वह ही दान लिया जाता है। मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि परिसर में जितने भी फूल-पौधे हैं उन्हें कभी तोड़ा नहीं जाता, रोज उनकी पूजा की जाती है।
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मंदिर राधामोहन महाराज वर्ष में कई महीनों के लिए एकांतवास कर साधना में लीन होते हैं, इस दौरान कोई उनके दर्शन नहीं कर पाता है। देवोत्थान एकादशी पर उनके दर्शन सुलभ होते हैं। जन्माष्टमी पर मंदिर में सुंदर झांकी सजाकर भगवान का अभिषेक किया जाता है। परिसर में बधाई गाई जाती है, उत्सव रूप में रात 12 बजे भगवान का जन्म मनाते हैं, इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है।
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