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Jhansi News: 10 साल से स्कूल को बिजली का इंतजार

Sun, 09 Feb 2025 01:55 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2025 01:55 AM IST
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The school has been waiting for electricity for 10 years
संवाद न्यूज एजेंसी
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चिरगांव। राजकीय हाई स्कूल धमनाखुर्द में 10 साल से बिजली कनेक्शन नहीं है। इससे गर्मी में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान समस्या होती है। साथ ही इस वजह से यहां बोर्ड परीक्षा का केंद्र नहीं बनाया जाता है। यहां के छात्र-छात्राएं हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा देने टहरौली या चिरगांव जाते हैं। इस समस्या को कई बार प्रधानाचार्य ने अधिकारियों के समक्ष उठाया, लेकिन समस्या बरकरार है। स्मार्ट क्लास भी यहां संचालित नहीं हो पा रही हैं। लोगों ने विद्यालय में जल्द ही बिजली कनेक्शन करवाने की मांग की है।

छात्रों ने बताया कि विद्यालय में लगी मोटर चलती नहीं है। इस कारण बच्चे परिसर में लगे हैंडपंप से पानी भरकर पीते हैं। यहां प्रधानाचार्य समेत चार लोगों का स्टाफ है। न कोई लिपिक है और न चपरासी। जबकि यहां सात शिक्षकों के पद सृजित हैं। कंप्यूटर कक्ष बना है, लेकिन बिजली न होने के कारण कंप्यूटर नहीं रखे गए हैं।
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ग्राम धमनाखुर्द के पूर्व प्रधान देवेंद्र राजा ने कहा कि शासन ने गांव में राजकीय हाई स्कूल तो बना दिया है, लेकिन बिजली का कनेक्शन न होने से बच्चे परेशान रहते हैं। राजकीय हाई स्कूल धमनाखुर्द की प्रधानाचार्या जयति शर्मा ने बताया कि विद्यालय में ग्राम धमनाखुर्द, इटौरा, पच्चरगढ़, उजयान, खड़ेसर, सारौल, बारेई, सिकरी, इटवां, बकुवां, पहाड़ी, धवारा, भरौल, बेरीसालपुरा गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। वर्तमान में छात्रांकन 170 है। बिजली न होने से स्मार्ट क्लास नहीं चल पा रही है। साथ ही गर्मी में पंखे नहीं चल पाते।
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हाई स्कूल के छात्र हर्ष पटेल का कहना है कि विद्यालय में गर्मी के दिनों में बहुत परेशानी होती है। चारों ओर खुला मैदान होने के कारण गर्म हवा आती है जिससे पढ़ाई में बाधा होती है। छात्र अनिक अहिरवार ने कहा कि बोर्ड परीक्षा का सेंटर टहरौली में है। अगर बिजली की व्यवस्था होती तो सेंटर भी इसी विद्यालय में बन जाता। इससे परीक्षा के दौरान आने-जाने की समस्या नहीं होती।

छात्र अवनीश कुशवाहा ने कहा कि गर्मी में पढ़ाई के दौरान पसीना आता रहता है। इससे लिखने में दिक्कत होती है।

विद्यालय के शिक्षक आशीष कुमार सिंह ने बताया कि बिजली कनेक्शन न होने से कैमरे नहीं लग पाते हैं। इसलिए परीक्षा केंद्र नहीं बन पा रहा है। वर्ष 2012 से विद्यालय को मान्यता मिली। वर्ष 2015 में नया भवन बन गया था। यहां पर 12 जूनियर विद्यालयों के बच्चे पढ़ने आते हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत शासन द्वारा सूचना मांगी गई थी। उसमें भी यहां से बिजली की समस्या को लिखा गया था।

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