{"_id":"6109a6a78ebc3ec1be7782d9","slug":"the-rock-collided-with-the-engine-due-to-the-lack-of-iron-fencing-at-the-bottom-of-the-hill-jhansi-news-jhs201097926","type":"story","status":"publish","title_hn":"मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतरने का मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतरने का मामला
विज्ञापन
झांसी। प्रयागराज रेल मार्ग पर सोमवार की सुबह बेतवा पुल के निकट मालगाड़ी के इंजन से चट्टान के टकराने के मामले में इंजीनियरिंग विभाग की प्रथम दृष्टया जांच में लापरवाही पाई गई है। इंजीनियरिंग विभाग ने दूसरी जगहों की तरह यहां की पहाड़ी के नीचे लोहे की जाली से फेंसिंग नहीं कर रखी थी। बारिश के दौरान पहाड़ी से टूटकर एक बड़ी चट्टान पटरियों के पास आ गई, जिससे दुर्घटना हो गई। मंगलवार को ज्वाइंट रिपोर्ट मंडल रेल प्रबंधक को सौंप दी गई।
ओरछा व बरुआसागर स्टेशन के बीच पड़ने वाले बेतवा पुल के निकट पहाड़ी से एक चट्टान सोमवार तड़के बारिश के दौरान टूटकर पटरी के पास आ गई थी। इसी बीच सुबह पांच बजे झांसी से बांदा की तरफ तेज गति से जा रही खाली मालगाड़ी से उक्त चट्टान का एक सिरा टकराने से इंजन के दो पहिये पटरी से उतर गए। पटरी भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई। झटका इतना जोर का था कि इंजन का कैटल गार्ड, बफर, एक्सल, ट्रांसफार्मर टैंक, प्रेशर पाइप, लिंक पैंटो, तीन बेस इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि मालगाड़ी के वैगन पटरी से नहीं उतर सके। अन्यथा यातायात को सामान्य बनाने में ज्यादा वक्त लग जाता। इस घटना से पांच घंटे तक प्रयागराज रेल मार्ग का पांच घंटे तक ठप रहा। यातायात सामान्य होने के बाद मुख्य रेल पथ निरीक्षक सतीश कौशल, मुख्य लोको निरीक्षक अरुण भामे, यातायात निरीक्षक सुमित तिवारी व आरपीएफ निरीक्षक नरेश कुमार ने घटनास्थल पर जांच कर ज्वाइंट रिपोर्ट तैयार की। जांच में पाया गया कि इंजीनियरिंग विभाग ने पहाड़ी के नीचे की तरफ कहीं भी लोहे ही जाली (फैंसिंग) नहीं लगा रखी थी। अगर जाली लगी होती तो चट्टान पटरी के पास नहीं आ पाती। इससे दुर्घटना को रोका जा सकता था। चट्टान लंबाई ,चौड़ाई व ऊंचाई में 2600 गुणा 1600 गुणा 1100 एमएम पायी गई, जो करीब 13 मीटर की होती है। इंजन को जांच के लिए शेड में लाया गया है।
बारिश में अधिक होने लगती है धमक
बारिश में पटरियों के नीचे की मिट्टी गिली हो जाती है। इससे ट्रेन के निकलते समय जमीन में धमक अधिक होने लगती है। अगर पटरियों के पास पहाड़ी है तो धमक से पत्थरों के टूटकर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। वैसे रेल पथ निरीक्षक व ट्राली पर निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पहाड़ी के नीचे लोहे की जाली लगवाने का ध्यान अवश्य रखें। जैसे की मंडल के मोहासा, संदलपुर पहाड़ी क्षेत्रों में सावधानी बरती जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ओरछा व बरुआसागर स्टेशन के बीच पड़ने वाले बेतवा पुल के निकट पहाड़ी से एक चट्टान सोमवार तड़के बारिश के दौरान टूटकर पटरी के पास आ गई थी। इसी बीच सुबह पांच बजे झांसी से बांदा की तरफ तेज गति से जा रही खाली मालगाड़ी से उक्त चट्टान का एक सिरा टकराने से इंजन के दो पहिये पटरी से उतर गए। पटरी भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई। झटका इतना जोर का था कि इंजन का कैटल गार्ड, बफर, एक्सल, ट्रांसफार्मर टैंक, प्रेशर पाइप, लिंक पैंटो, तीन बेस इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि मालगाड़ी के वैगन पटरी से नहीं उतर सके। अन्यथा यातायात को सामान्य बनाने में ज्यादा वक्त लग जाता। इस घटना से पांच घंटे तक प्रयागराज रेल मार्ग का पांच घंटे तक ठप रहा। यातायात सामान्य होने के बाद मुख्य रेल पथ निरीक्षक सतीश कौशल, मुख्य लोको निरीक्षक अरुण भामे, यातायात निरीक्षक सुमित तिवारी व आरपीएफ निरीक्षक नरेश कुमार ने घटनास्थल पर जांच कर ज्वाइंट रिपोर्ट तैयार की। जांच में पाया गया कि इंजीनियरिंग विभाग ने पहाड़ी के नीचे की तरफ कहीं भी लोहे ही जाली (फैंसिंग) नहीं लगा रखी थी। अगर जाली लगी होती तो चट्टान पटरी के पास नहीं आ पाती। इससे दुर्घटना को रोका जा सकता था। चट्टान लंबाई ,चौड़ाई व ऊंचाई में 2600 गुणा 1600 गुणा 1100 एमएम पायी गई, जो करीब 13 मीटर की होती है। इंजन को जांच के लिए शेड में लाया गया है।
विज्ञापन
बारिश में अधिक होने लगती है धमक
बारिश में पटरियों के नीचे की मिट्टी गिली हो जाती है। इससे ट्रेन के निकलते समय जमीन में धमक अधिक होने लगती है। अगर पटरियों के पास पहाड़ी है तो धमक से पत्थरों के टूटकर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। वैसे रेल पथ निरीक्षक व ट्राली पर निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पहाड़ी के नीचे लोहे की जाली लगवाने का ध्यान अवश्य रखें। जैसे की मंडल के मोहासा, संदलपुर पहाड़ी क्षेत्रों में सावधानी बरती जाती है।
विज्ञापन