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महानगर में दस साल में बढ़ गई एक लाख 10 हजार की आबादी
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झांसी। प्रदेश सरकार की नई जनसंख्या नीति को लेकर जारी बहस के बीच आबादी बढ़ने के विस्फोटक आंकड़े सामने आए हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केवल झांसी महानगर में ही पिछले एक दशक के दौरान जनसंख्या में एक लाख दस हजार की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आबादी में तेजी से इजाफा होने की वजह से उपलब्ध संसाधन बौने साबित होते जा रहे हैं।
प्रदेश की नई जनसंख्या नीति के मसौदे में कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत जिनके दो से ज्यादा बच्चे होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल पाएगी। नौकरी में पदोन्नति और सरकारी सब्सिडी भी नहीं मिलेगी। यहां तक कि ऐसे लोग स्थानीय चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। इसे अलग-अलग वर्गों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोगों का कहना है कि सरकार ये देर से उठाया हुआ दुरुस्त कदम है, तो वहीं एक वर्ग इसे मौलिक अधिकारों का हनन बता रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच जनसंख्या वृद्धि के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक झांसी महानगर की आबादी 5,05,693 थी, जो अब बढ़कर 6,16,437 पर पहुंच गई है। यानि की पिछले एक दशक के दौरान झांसी महानगर की आबादी में 1,10,744 का इजाफा हुआ है। जनसंख्या में बढ़ोत्तरी की तस्वीर झांसी में हर जगह नजर आती है। महानगर के पार्क हों या अस्पताल, सभी जगह भीड़भाड़ नजर आती हैं। बाजारों और सड़कों पर भी ट्रैफिक लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके नियंत्रण के लिए किए जाने वाले सभी उपाय सिफर साबित ही हो रहे हैं।
58 हजार पुुरुष व 52 हजार महिलाएं बढ़ीं
झांसी। पिछले 10 साल के दरम्यान महानगर में पुरुषों की संख्या में 58,132 का इजाफा हुआ है। जबकि, 52,612 महिलाएं बढ़ी हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक महानगर में पुरुषों की आबादी 2,65,449 थी, जो अब बढ़कर 3,23,581 हो गई है। इसी प्रकार महिलाओं की आबादी 2,40,244 से बढ़कर 2,92,856 हो गई है।
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नसबंदी में पुरुषों की दिलचस्पी नहीं
झांसी। जनसंख्या में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा कारण परिवार नियोजन के उपायों को न अपनाना है। खासतौर पर पुरुष इस मामले में महिलाओं को काफी पीछे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि साल 2018-19 में जिले में 8,122 नसबंदी हुई थीं, इनमें पुरुषों की संख्या केवल 10 ही है। इसी प्रकार 2019-20 में हुई 7,364 नसबंदी में से पुरुषों की संख्या सिर्फ 138 ही रही। 2020-21 में 10,284 नसबंदी के मामलों में केवल 7 पुरुषों ने ही अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। जबकि, इस साल जून माह तक 112 नसबंदी की जा चुकी हैं। पुरुष इनमें एक भी नहीं है। जबकि, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की नसबंदी बेहद आसान होती है। महिलाओं का इसमें ऑपरेशन किया जाता है। वहीं, पुरुषों का नसबंदी का ऑपरेशन बगैर चीरा लगाए ही हो जाता है।
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प्रदेश की नई जनसंख्या नीति के मसौदे में कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत जिनके दो से ज्यादा बच्चे होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल पाएगी। नौकरी में पदोन्नति और सरकारी सब्सिडी भी नहीं मिलेगी। यहां तक कि ऐसे लोग स्थानीय चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। इसे अलग-अलग वर्गों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोगों का कहना है कि सरकार ये देर से उठाया हुआ दुरुस्त कदम है, तो वहीं एक वर्ग इसे मौलिक अधिकारों का हनन बता रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच जनसंख्या वृद्धि के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक झांसी महानगर की आबादी 5,05,693 थी, जो अब बढ़कर 6,16,437 पर पहुंच गई है। यानि की पिछले एक दशक के दौरान झांसी महानगर की आबादी में 1,10,744 का इजाफा हुआ है। जनसंख्या में बढ़ोत्तरी की तस्वीर झांसी में हर जगह नजर आती है। महानगर के पार्क हों या अस्पताल, सभी जगह भीड़भाड़ नजर आती हैं। बाजारों और सड़कों पर भी ट्रैफिक लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके नियंत्रण के लिए किए जाने वाले सभी उपाय सिफर साबित ही हो रहे हैं।
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58 हजार पुुरुष व 52 हजार महिलाएं बढ़ीं
झांसी। पिछले 10 साल के दरम्यान महानगर में पुरुषों की संख्या में 58,132 का इजाफा हुआ है। जबकि, 52,612 महिलाएं बढ़ी हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक महानगर में पुरुषों की आबादी 2,65,449 थी, जो अब बढ़कर 3,23,581 हो गई है। इसी प्रकार महिलाओं की आबादी 2,40,244 से बढ़कर 2,92,856 हो गई है।
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नसबंदी में पुरुषों की दिलचस्पी नहीं
झांसी। जनसंख्या में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा कारण परिवार नियोजन के उपायों को न अपनाना है। खासतौर पर पुरुष इस मामले में महिलाओं को काफी पीछे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि साल 2018-19 में जिले में 8,122 नसबंदी हुई थीं, इनमें पुरुषों की संख्या केवल 10 ही है। इसी प्रकार 2019-20 में हुई 7,364 नसबंदी में से पुरुषों की संख्या सिर्फ 138 ही रही। 2020-21 में 10,284 नसबंदी के मामलों में केवल 7 पुरुषों ने ही अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। जबकि, इस साल जून माह तक 112 नसबंदी की जा चुकी हैं। पुरुष इनमें एक भी नहीं है। जबकि, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की नसबंदी बेहद आसान होती है। महिलाओं का इसमें ऑपरेशन किया जाता है। वहीं, पुरुषों का नसबंदी का ऑपरेशन बगैर चीरा लगाए ही हो जाता है।