{"_id":"61a70ecab0a7ca7ceb448732","slug":"the-name-of-the-city-the-situation-is-still-like-a-village-jhansi-news-jhs2099278143","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाम शहर का, हालात आज भी गांव सरीखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाम शहर का, हालात आज भी गांव सरीखे
विज्ञापन
झांसी। बीस साल पहले नगर निगम सीमा का दायरा बढ़ाते हुए 18 नए गांव शामिल किए गए थे लेकिन, यह इलाके अभी तक शहरी विकास से अछूते हैं। न तो आबादी के लिहाज से यहां नए पोस्ट ऑफिस खोले गए न ही दूसरी सहूलियतें ही अब तक बढ़ाई गईं। नगर निगम करीब दस साल से यहां से हाउसटैक्स वसूल रहा है लेकिन, नियमित तौर पर सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं की।
वर्ष 2002 में झांसी को नगर महापालिका से नगर निगम बना दिया गया। नगर निगम सीमा का दायरा 18 गांवों तक बढ़ गए। पूर्वी दिशा में सीमा मैरी, बूढ़ा, कोछा भांवर, करगुवां तक बढ़ गई। यहां करीब 45-50 हजार लोग निवास करते हैं। इसके बाद होटल, रेस्टारेंट समेत अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में खूब इजाफा हुआ। गांव के अधिकांश पक्के मकान भी अब पक्के हो चुके लेकिन, सरकारी सहूलियतें नहीं बढ़ी।
पुरानी आबादी के आधार पर महज एक पोस्ट आफिस सिर्फ बूढ़ा गांव में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश समय यहां ताला पड़ा रहता है। पढ़ाई के लिए यहां तीन अलग-अलग प्राथमिक विद्यालय हैं। इंटर कॉलेज करीब दो किलो मीटर दूर भोजला में है। उच्च शिक्षा के लिए करीब पांच-आठ किमी दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि यहां साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। जल निकासी के लिए नाली भी निगम नहीं बनवाता। नालियों की सफाई नहीं होती। यह पूरी तरह सिल्टेड है। बूढ़ा एवं मैरी के कुछ हिस्से छोड़कर कहीं भी सफाईकर्मी नहीं आते। शहरी इलाकों में कूड़ा उठाने को सीधे घरों से कूड़ा उठवाया जा रहा है लेकिन, यहां इस पूरे इलाके में व्यवस्था का कोई अता-पता नहीं। सफाई के लिए लोगों को प्राइवेट सफाईकर्मियों की मदद लेनी पड़ती है। मोहल्ले के बाहर पड़ा कूड़ा भी कई दिनों के बाद हटता है।
बूढ़ा, मैरी में पीने का पानी भी लोगों को नहीं मिलता। खासकर बूढ़ा गांव में सड़क पर लगा एकमात्र हैंडपंप यहां रहने वाले करीब पांच सौ आबादी की प्यास बुझाने का इकलौता सहारा है। यह हैंडपंप भी आबादी से करीब आधा किलोमीटर दूर है। रोजाना यहां गांव की महिलाएं पीने का पानी भरने को इतनी दूर जाती हैं।
गांव के भीतरी इलाकों की सड़कों की हालत भी खराब है। बाहरी इलाकों मेें सड़क बनी हुई है लेकिन, अंदर के इलाकों का रास्ता कच्चा है। यहां एपेक्स तक नहीं बिछा। लोगों का कहना है बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती है। कई बार स्थानीय पार्षद से शिकायत की लेकिन, कोई सुनवाई नहीं होती।
बिजली की समस्या से भी लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। घंटों बिजली नहीं आती। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि बिल शहरी दरों के मुताबिक लिया जाता है लेकिन, आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ।
-----------
- इस पूरे इलाके से हाउसटैक्स वसूला जाता है लेकिन, सफाईकर्मी की तैनाती नहीं है। पूरे इलाके में सफाई के लिए कोई आदमी नहीं आता। कूड़ा नहीं उठता। नालियां भी भरी हुई हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं होती।
मलखान सिंह
- पीने के पानी रोजाना दूर से भरकर लाना पड़ता है। गांव के बाहर लगे हैंडपंप से ही सभी लोग पानी लेते हैं। इसके लिए लाइन लगाना पड़ता है।
अंजली
घरों से कूड़ा नहीं उठाया जाता। मोहल्ले से निकलने वाला कूड़ा सड़क के किनारे ही पड़ा रहता है। नगर निगम से उठाने कोई नहीं आता है।
प्रमोद
- नालियों की कभी सफाई नहीं होती। गंदगी होने की वजह से मच्छरों का बहुत प्रकोप है। डेंगू से भी पिछले महीने लोग बीमार पड़े।
हरि कुमार
पीने के पानी के लिए बहुत परेशानी होती है। कई बार शिकायत की गई लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई।
रवींद्र कुमार
गांव के भीतर की सड़क कच्ची है। यहां आज तक एपेक्स नहीं डलवाया गया। बारिश में काफी समस्या होती है।
रामभजन
घरों से कभी कूड़ा नहीं उठता, मोहल्ले के लोगों को खुद से कूड़ा बाहर फिकवाना पड़ता है। सड़क पर ही कचरे का ढेर इक्कठा हो जाता है।
प्रमोद
गांव के आसपास आवारा जानवर घूमते रहते हैं। कूड़े के ढ़ेर में सारे जानवर रहते हैं। अकसर यह लोगों को काट लेते हैं।
राधा
बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों की भी पढ़ाई नहीं हो पाती है। शिकायत की जाती है तब भी कोई सुनवाई नहीं होती।
रामसेवक
घरों तक पाइप लाइन नहीं पहुंची। कुछ समय पर सर्वे हुआ था लेकिन, उसके बाद अभी तक कोई यहां नहीं आया। बाहर से ही पानी भरकर लाना पड़ता है।
धर्मेंद्र
नगर निगम सीमा मेें शामिल होने के बावजूद इन इलाकों में कोई भी सुविधा आज तक नहीं बढ़ी। सरकारी विभाग ध्यान ही नहीं देते।
नितिन श्रीवास
गांव के भीतरी रास्ता आज तक नहीं बना। नगर निगम से कई बार इसकी मांग की गई लेकिन, उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
विकास
पीने के पानी की सबसे बड़ी समस्या है। नगर निगम में शामिल होने के बाद यहां भी पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था कराई जाए।
कुलदीप
पूरे गांव में गंदगी है। कोई सफाई कर्मचारी नहीं आता। हम लोगों को प्राइवेट सफाईकर्मी लगाना पड़ता है जबकि इस पूरे इलाके से हाउसटैक्स की वसूली होती है।
छाया
बिजली की सबसे ज्यादा कटौती होती है। इसे ठीक कराया जाना चाहिए।
नीरज
करीब आठ किमी दूर थाना
झांसी की आबादी साल दर साल बढ़ती जा रही है लेकिन, बीस साल बाद भी नया थाना नहीं खुला। बूढ़ा, मैरी आदि इलाकों के रहने वालों को अपनी शिकायत लेकर करीब आठ किमी दूर सीपरी बाजार थाना जाना पड़ता है। इतनी दूर थाना होने की वजह से यहां की आबादी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। अपराध होने पर भी पुलिस को यहां तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
विज्ञापन
वर्ष 2002 में झांसी को नगर महापालिका से नगर निगम बना दिया गया। नगर निगम सीमा का दायरा 18 गांवों तक बढ़ गए। पूर्वी दिशा में सीमा मैरी, बूढ़ा, कोछा भांवर, करगुवां तक बढ़ गई। यहां करीब 45-50 हजार लोग निवास करते हैं। इसके बाद होटल, रेस्टारेंट समेत अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में खूब इजाफा हुआ। गांव के अधिकांश पक्के मकान भी अब पक्के हो चुके लेकिन, सरकारी सहूलियतें नहीं बढ़ी।
विज्ञापन
पुरानी आबादी के आधार पर महज एक पोस्ट आफिस सिर्फ बूढ़ा गांव में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश समय यहां ताला पड़ा रहता है। पढ़ाई के लिए यहां तीन अलग-अलग प्राथमिक विद्यालय हैं। इंटर कॉलेज करीब दो किलो मीटर दूर भोजला में है। उच्च शिक्षा के लिए करीब पांच-आठ किमी दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि यहां साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। जल निकासी के लिए नाली भी निगम नहीं बनवाता। नालियों की सफाई नहीं होती। यह पूरी तरह सिल्टेड है। बूढ़ा एवं मैरी के कुछ हिस्से छोड़कर कहीं भी सफाईकर्मी नहीं आते। शहरी इलाकों में कूड़ा उठाने को सीधे घरों से कूड़ा उठवाया जा रहा है लेकिन, यहां इस पूरे इलाके में व्यवस्था का कोई अता-पता नहीं। सफाई के लिए लोगों को प्राइवेट सफाईकर्मियों की मदद लेनी पड़ती है। मोहल्ले के बाहर पड़ा कूड़ा भी कई दिनों के बाद हटता है।
बूढ़ा, मैरी में पीने का पानी भी लोगों को नहीं मिलता। खासकर बूढ़ा गांव में सड़क पर लगा एकमात्र हैंडपंप यहां रहने वाले करीब पांच सौ आबादी की प्यास बुझाने का इकलौता सहारा है। यह हैंडपंप भी आबादी से करीब आधा किलोमीटर दूर है। रोजाना यहां गांव की महिलाएं पीने का पानी भरने को इतनी दूर जाती हैं।
गांव के भीतरी इलाकों की सड़कों की हालत भी खराब है। बाहरी इलाकों मेें सड़क बनी हुई है लेकिन, अंदर के इलाकों का रास्ता कच्चा है। यहां एपेक्स तक नहीं बिछा। लोगों का कहना है बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती है। कई बार स्थानीय पार्षद से शिकायत की लेकिन, कोई सुनवाई नहीं होती।
बिजली की समस्या से भी लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। घंटों बिजली नहीं आती। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि बिल शहरी दरों के मुताबिक लिया जाता है लेकिन, आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ।
-----------
- इस पूरे इलाके से हाउसटैक्स वसूला जाता है लेकिन, सफाईकर्मी की तैनाती नहीं है। पूरे इलाके में सफाई के लिए कोई आदमी नहीं आता। कूड़ा नहीं उठता। नालियां भी भरी हुई हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं होती।
मलखान सिंह
- पीने के पानी रोजाना दूर से भरकर लाना पड़ता है। गांव के बाहर लगे हैंडपंप से ही सभी लोग पानी लेते हैं। इसके लिए लाइन लगाना पड़ता है।
अंजली
घरों से कूड़ा नहीं उठाया जाता। मोहल्ले से निकलने वाला कूड़ा सड़क के किनारे ही पड़ा रहता है। नगर निगम से उठाने कोई नहीं आता है।
प्रमोद
- नालियों की कभी सफाई नहीं होती। गंदगी होने की वजह से मच्छरों का बहुत प्रकोप है। डेंगू से भी पिछले महीने लोग बीमार पड़े।
हरि कुमार
पीने के पानी के लिए बहुत परेशानी होती है। कई बार शिकायत की गई लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई।
रवींद्र कुमार
गांव के भीतर की सड़क कच्ची है। यहां आज तक एपेक्स नहीं डलवाया गया। बारिश में काफी समस्या होती है।
रामभजन
घरों से कभी कूड़ा नहीं उठता, मोहल्ले के लोगों को खुद से कूड़ा बाहर फिकवाना पड़ता है। सड़क पर ही कचरे का ढेर इक्कठा हो जाता है।
प्रमोद
गांव के आसपास आवारा जानवर घूमते रहते हैं। कूड़े के ढ़ेर में सारे जानवर रहते हैं। अकसर यह लोगों को काट लेते हैं।
राधा
बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों की भी पढ़ाई नहीं हो पाती है। शिकायत की जाती है तब भी कोई सुनवाई नहीं होती।
रामसेवक
घरों तक पाइप लाइन नहीं पहुंची। कुछ समय पर सर्वे हुआ था लेकिन, उसके बाद अभी तक कोई यहां नहीं आया। बाहर से ही पानी भरकर लाना पड़ता है।
धर्मेंद्र
नगर निगम सीमा मेें शामिल होने के बावजूद इन इलाकों में कोई भी सुविधा आज तक नहीं बढ़ी। सरकारी विभाग ध्यान ही नहीं देते।
नितिन श्रीवास
गांव के भीतरी रास्ता आज तक नहीं बना। नगर निगम से कई बार इसकी मांग की गई लेकिन, उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
विकास
पीने के पानी की सबसे बड़ी समस्या है। नगर निगम में शामिल होने के बाद यहां भी पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था कराई जाए।
कुलदीप
पूरे गांव में गंदगी है। कोई सफाई कर्मचारी नहीं आता। हम लोगों को प्राइवेट सफाईकर्मी लगाना पड़ता है जबकि इस पूरे इलाके से हाउसटैक्स की वसूली होती है।
छाया
बिजली की सबसे ज्यादा कटौती होती है। इसे ठीक कराया जाना चाहिए।
नीरज
करीब आठ किमी दूर थाना
झांसी की आबादी साल दर साल बढ़ती जा रही है लेकिन, बीस साल बाद भी नया थाना नहीं खुला। बूढ़ा, मैरी आदि इलाकों के रहने वालों को अपनी शिकायत लेकर करीब आठ किमी दूर सीपरी बाजार थाना जाना पड़ता है। इतनी दूर थाना होने की वजह से यहां की आबादी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। अपराध होने पर भी पुलिस को यहां तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।